
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 16, 2023 7:01 AM IST
Subrata Roy Cancer Type: सहारा ग्रुप के प्रमुख सुब्रत रॉय के अचानक निधन (Subrata Roy Death) से लोगों में शोक और हैरानगी की लहर है। डायबिटीज, हाई बीपी जैसे कई क्रोनिक बीमारियों से जूझ रहे रॉय (Subrata Roy diseases) को एक दुर्लभ प्रकार के कैंसर होने की जानकारी भी सामने आयी है। बताया जा रहा है कि सुब्रत रॉय को मेटास्टेटिक मैलिग्नेंसी नामक एक रेयर कैंसर (Metastatic Cancer) था। बता दें कि यह गम्भीर और दुर्लभ प्रकार का कैंसर (rare type of cancer) है जिसके इलाज में काफी समय लग सकता है।
बता दें कि बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे जिन्हें कुछ साल पहले कैंसर (Sonali Bendre cancer) होने का पता चला था उन्हें भी मेटास्टेटिक कैंसर भी था। जिससे उबरने में उन्हें काफी समय लग गया। इस लेख में पढ़ें मेटास्टेटिक मैलिग्नेंसी कैंसर शरीर के किस हिस्से में होता है और यह कितना गम्भीर कैंसर है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार मेटास्टैटिक कैंसर (Metastatic Cancer) के बारे अक्सर देर से पता चलता है और दुर्लभ प्रकार का कैंसर होने के कारण लोगों में इसके बारे में जानकारी भी बहुत कम है। आमतौर पर यह कैंसर लिवर, प्रोस्टेट, फेफड़ों, कोलोरेक्टल, सटोमेक, सर्विक्स और ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित लोगों में देखा जाता है। यह एक एडवांस स्टेज का कैंसर है जो अनियंत्रित कैंसर कोशिकाओं (uncontrolled cancerous cells) की वजह से होता है। इसमें कैंसर वाली कोशिकाएं प्रभावित अंग के ऊपरी आवरण या मेंब्रेन को फाड़कर बाहर की ओर बढ़ने लगती हैं। इसी तरह यह ये कैंसरस सेल्स नसों से होते हुए लंग्स, लिवर, ब्रेन और हड्डियों तक फैल जाती हैं जिससे कैंसर दूसरे अंगों को भी प्रभावित करता है और वहां भी बढ़ने लगता है।
इस प्रकार के कैंसर में दिखने वाले लक्षण कुछ अन्य बीमारियों में भी दिखायी देते हैं इसीलिए, कई बार लोगों को कैंसर होने का अंदाजा बहुत देर से होता है। ऐसे में कैंसर के लक्षणों के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। मेटास्टेटिक मैलिग्नेंसी कैंसर में इस प्रकार के लक्षण दिखायी देते हैं। इन पर ध्यान दें और अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें-
दुर्लभ और गम्भीर होने के कारण मेटास्टैटिक मैलिग्नेंसी कैंसर का उपचार थोड़ा मुश्किल होता है। इस कैंसर का पता लगाने के लिए लिक्विड बायोप्सी नाम का ब्लड टेस्ट कराया जाता है। ट्यूमर का पता लगने के बाद इलाज की प्रक्रिया शुरू किया जाता है। कैंसर का इलाज करने के लिए मरीज को कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, रेडिएशन और सर्जरी की सलाह दी जाती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार कैंसर के लक्षणों को जितनी जल्दी पहचान लिया जाए और इलाज जितनी जल्दी शुरू किया जाए, मरीज के जल्द ठीक होने और उसके बचने की संभावना उतनी बढ़ सकती है।