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Written By: Jitendra Gupta | Published : January 26, 2021 4:37 PM IST
कोवैक्सीन हो या फिर कोविशील्ड! वैक्सीन लगवाने से पहले ये टिप्स कम करेंगे साइड-इफेक्ट का खतरा
कोरोना महामारी वक़्त की सबसे बड़ी चुनौतियों को सामने लेकर आई है। ऐसे में जहाँ जीवन जीने के ढंग ही संक्रमण के बचाव के तरीकों के अनुसार ढल चुके हैं वहीँ शुरुवात से सभी को इंतज़ार था इसकी वैक्सीन का। इस सन्दर्भ में दुनिया भर में विमर्श चला, शोध हुए, सभी डॉक्टर्स, वैज्ञानिक आदि ने ऊर्जा लगे हुई है। लेकिन अभी भी लोगो के मन में बहुत सी शंकाएं और भ्रम है। यहां बेहद ज़रूरी है कि लोग डरने के बजाय अपनी जानकारी का विस्तार करें और मौलिक बातों को समझें।
लेकिन सबसे पहले समझें कोई भी वैक्सीन काम कैसे करती है, वह हमारे शरीर को संबंधित रोग से बचाती किस प्रकार है? इस पर प्रकाश डाल रहीं है डॉक्टर ज्योति मुट्टा, सीनियर कंसल्टेंट, माइक्रोबायोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट :-
वैक्सीन दरअसल किसी विशेष बीमारी से बचाव के लिए विकसित किया गया एक प्रकार का प्रतिरोधक है। वैक्सीन को बनाने के लिए अक्सर उस बीमारी के ऑर्गेनिज्म को प्रयोग में लाया जाता है जिसमें उसके मृत या कमजोर हो चुके वर्ज़न का इस्तेमाल होता है। किसी किसी बीमारी के वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया में एंटीजेन विकसित करने के लिए जेनेटिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल हो सकता है।
कैसे करती है वैक्सीन काम?
वैक्सीन हमारे इम्यून सिस्टम में संबंधित बीमारी के एंटीबॉडीज का निर्माण करता है। ऐसे में वैक्सीन लेने के बाद यदि हमारा शरीर उस बीमारी के संपर्क में आता है तो यह उसे शरीर में बीमारी के रूप में विकसित होने से पहले इम्यून सिस्टम को इसे नष्ट करने के योग्य बनता है।
डॉक्टर की सलाह पर व्यक्ति को बचपन से लेकर व्यस्क होने तक सभी ज़रूरी वैक्सीन लगवानी चाहिए ताकि जोखिम रोका जा सके।
कोविड वैक्सीन की यदि बात करें तो इस वक़्त देश में किस किस वैक्सीन को मंज़ूरी को मिली है और अन्य संबंधित मौलिक जानकारियां साझा कर रहीं डॉक्टर गीताली भागवती, कंसल्टेंट एंड हेड, डिपार्टमेंट ऑफ़ माइक्रोबायोलॉजी एंड इन्फेक्शन कण्ट्रोल, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल :-
कोविशील्ड/ कोवैक्सीन (Covishield/ Covaxin) : सेंट्रल ड्रग्स स्टैण्डर्ड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (CDSCO) ने हाल ही में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया (कोविशील्ड) और भारत बायोटेक (कोवैक्सीन) की कोविड वैक्सीन को “रिस्ट्रिक्टेड इमरजेंसी अप्रूवल” को मंज़ूरी दी।
कोविशील्ड :- कोविशील्ड वैक्सीन को दरसल ऑक्सफ़ोर्ड द्वारा ऐस्ट्राज़ेनेका के सहयोग से विकसित किया है। भारत का सीरम इंस्टिट्यूट इनका मैन्युफैक्चरिंग और ट्रायल पार्टनर है। कोविशील्ड रीकॉम्बिनेंट चिम्पेंज़ी एडीनोवायरस वेक्टर वैक्सीन है जो टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर से SARS-CoV-2 Spike (S) ग्लाइकोप्रोटीन को एनकोड करती है। रीकॉम्बिनेंट वायरस वेक्टर दरअसल टी- साईटोटॉक्सिक सेल्स के निर्माण में मदद करता है जिससे सेल मीडियेटेड इम्युनिटी विकसित होती है।
कोवैक्सीन :- कोवैक्सीन की यदि बात करें तो यह भारत में विकसित हुई कोविड की पहली वैक्सीन है। इसे भारत बायोटेक द्वारा इंडियन कौंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरलॉजी के सहयोग से विकसित किया गया है। कोवैक्सीन वायरोन इनेक्टिवेटिड कोरोना वायरस वैक्सीन है। इसे वेरो सेल प्लेटफार्म पर विकसित किया जाता है। इस प्रकार की वैक्सीन को पैथोजेन को न्यूट्रलाइज़ करके उत्पादित किया जाता है। इनेक्टीवेटेड वायरस संक्रामक नहीं होते और इम्युनिटी को रोग से लड़ने में मदद करते हैं।
वैक्सीन के 2 डोज़ 4 से 6 हफ्ते के अंतराल में रेकमेंड किये जाते हैं। दूसरी डोज़ के 14 दिनों बाद वैक्सीन के चिकित्सकीय प्रभाव देखे जाते हैं।
याद रखने योग्य बातें :-
वैक्सीन के दोनों डोज़ एक ही मैन्युफैक्चरर के होने चाहिये
जो पहले कोविड से संक्रमित हो चुके हैं वे भी इन्हें ले सकते हैं।
सबसे अहम बात, कोविड वैक्सीन का मतलब यह नहीं कि अब लापरवाही की जाए। कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर फिर भी रखना ज़रूरी है, यानी कोविड वैक्सीन लेते समय और डोज़ के दौरान और उसके बाद भी हैण्ड हाइजीन, मास्क लगाना और अन्य कोविड संबंधी सावधानियों का ज़रूर पालन करना है।