
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : June 9, 2026 12:42 PM IST
Tele Surgery
Heart surgery from 20000 km away: जरा सोचकर देखिए कि आपका ऑपरेशन भारत में हो रहा हो, लेकिन सर्जन हजारों किलोमीटर दूर किसी दूसरे देश में बैठा हो। कुछ साल पहले तक यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लगती, लेकिन अब यह हकीकत बन चुकी है। भारतीय डॉक्टर्स और स्वदेशी तकनीक ने मेडिकल फिल्ड में एक नया अध्याय जोड़ते हुए दुनिया की सबसे लंबी दूरी की रोबोटिक कार्डियक टेली-सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।
इस उपलब्धि की सबसे अच्छी बात यह है कि सर्जरी पूरी तरह भारत में एडवांस एसएसआई मंत्रा सर्जिकल रोबोटिक सिस्टम की मदद से की गई। इस प्रोसेस में एसएसआई मंत्रा के फाउंडर कार्डियक सर्जन डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने दक्षिण अमेरिका के देश गुयाना से बैठकर भारत के इंदौर में मौजूद एक मरीज के हार्ट की सर्जरी की। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन दोनों स्थानों के बीच की दूरी करीब 20,000 किलोमीटर थी।
टेली-सर्जरी ऐसी टेक्नीक है, जिसमें सर्जन और मरीज एक ही ऑपरेशन थिएटर में मौजूद नहीं होते। डॉक्टर एक विशेष रोबोटिक कंसोल के जरिए सर्जरी को कंट्रोल करते हैं, जबकि रोबोटिक आर्म्स मरीज के शरीर पर उसी सटीकता से काम करती हैं।
इस प्रक्रिया में डॉक्टर के हाथों की हर एक्टिव रियल टाइम में रोबोट तक पहुंचती है, जिससे ऑपरेशन संभव हो पाता है। एक्सपर्ट का मानना है कि यह टेक्नीक फ्यूचर में उन फिल्ड के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां एक्सपर्ट सर्जनों की कमी है।
हार्ट की सर्जरी को मेडिकल क्षेत्र की सबसे जटिल प्रोसेस में से एक मानी जाती है। इसमें मिलीमीटर लेवल की सटीकता की जरूरत होती है। इस मामले में रोबोटिक सिस्टम की मदद से हार्ट से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
अच्छी बात यह रही कि हजारों किलोमीटर की दूरी और नेटवर्क लेटेंसी के बावजूद ऑपरेशन सुरक्षित तरीके से संपन्न हुआ।
डॉ. सुधीर श्रीवास्तव का मानना है कि आने वाले वर्षों में टेली-सर्जरी स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल सकती है। इसके कुछ फायदे हो सकते हैं, जैसे-
हालांकि, तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि टेली-सर्जरी अभी भी पूरी तरह पारंपरिक सर्जरी का ऑप्शन नहीं बनी है। ऑपरेशन के दौरान मरीज के पास प्रशिक्षित मेडिकल टीम, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और बैकअप सर्जन की मौजूदगी जरूरी होती है। इसलिए फिलहाल इसे विशेषज्ञता की पहुंच बढ़ाने वाली तकनीक के रूप में देखा जा रहा है, न कि हॉस्पिटल की जगह लेने वाली व्यवस्था के रूप में।
डॉक्टर का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और हाई-स्पीड नेटवर्क के मेल से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आने वाला है। 20,000 किलोमीटर दूर से सफल हार्ट सर्जरी यह संकेत देती है कि भविष्य में मरीज और विशेषज्ञ डॉक्टर के बीच की ज्योग्राफिक दूरी पहले जितनी बड़ी बाधा नहीं रह जाएगी। यह उपलब्धि सिर्फ एक टेक्नीक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि इस बात की झलक भी है कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाएं कैसी दिख सकती हैं।