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सिर और गर्दन के कैंसर का इलाज अब होगा रोबोटिक! बरकरार रहेगी चेहरे की सुंदरता और होंगे सभी काम

कैंसर की रुग्णता दर और मृत्यु दर में भारत फिलहाल दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है, जो कहीं न कहीं एक चिंता का विषय बना हुआ है।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 1, 2022 3:44 PM IST

सिर और गर्दन के कैंसर मामलों की बढ़ती संख्या और तंबाकू से होने वाले मुंह के कैंसर के कारण बहुत से लोगों के चेहरे पर कट आ जाते हैं। भले ही इन कैंसर के मामलों की संख्या बढ़ रही है लेकिन अभी भी लोगों के बीच जागरूकता की कमी है। इस प्रकार के कैंसर के मामलों में शुरुआती डायग्नोसिस के साथ—साथ आधुनिक उपचार पद्धति से मरीज की जीवन गुणवत्ता सुधर जाती है। कैंसर की रुग्णता दर और मृत्यु दर में भारत फिलहाल दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है, जो कहीं न कहीं एक चिंता का विषय बना हुआ है।

हाल ही में नई दिल्ली स्थित शालीमार बाग के मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल ने कैंसर के कारण होने वाली सर्जरी से चेहरे पर लगने वाले कट्स को कम करने के लिए रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की है।

रोबोट सर्जरी से मिलते हैं बेहतर परिणाम

नए—नए आविष्कार होने से रोबोटिक प्रक्रियाएं दागरहित हो गई हैं और मुंह, सिर और गर्दन के कैंसरके इलाज के लिए विश्व में अपनी तरह की पहली इलाज पद्धति है। पहले इलाज की परंपरागत पद्धतियां सिर्फ कैंसर की वृद्धि और रोग को जड़ से खत्म करने पर केंद्रित थी जिसमें चेहरे का सौंदर्य बिगड़ने और दाग—धब्बों के बारें में ख्याल नहीं रखा जाता था। लेकिन आधुनिक उपचार पद्धतियों के कारण न्यूनतम शल्य—क्रिया के जरिये एडवांस स्टेज के कैंसर का भी बेहतर परिणाम मिलने लगा है।

सिर और गर्दन के कैंसर मामलों में सर्जरी

हाल के वर्षों में मैक्स हॉस्पिटल ने सिर और गर्दन के कैंसर से पीड़ित ऐसे कई मरीजों का रोबोट की सहायता से न्यूनतम शल्यक्रिया के जरिये इलाज किया है। ऐसे मरीजों के चेहरे का सौंदर्य और शारीरिक सक्रियता बरकरार रही। रोबोटिक सर्जरी ऐसे मरीजों के लिए बड़ा वरदान साबित हुई है और इसमें शायद ही चेहरा विकृत होता है या बोलने या खाने में कोई दिक्कत होती है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

सिर और गर्दन के कैंसर में लंबा अनुभव रखने वाले और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के वरिष्ठ निदेशक और प्रमुख डॉ. सुरेंद्र कुमार डबास ने कहा कि कैंसर के ऐसे मामलों की सही समय पर पहचान हो जाने से इलाज संभव है लेकिन दुर्भाग्यवश पश्चिमी दुनिया के मुकाबले भारत में जीवित बचने की दर बहुत कम है। इसी तरह सिर और गर्दन के कैंसर के मामले भी ठीक हो सकते हैं। विशेष केंद्रों और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की उपलब्धता के कारण ओरल कैंसर की इलाज पद्धति में क्रांति आई है। दागरहित सर्जरी और माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्शन होने के कारण रोबोटिक सर्जरी मरीज का सौंदर्य बनाए रखता है, उसे बोलने, खाने आदि में भी सक्षम बनाए रखता है।

लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी

किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है लेकिन इस सच्चाई को जानने के बाद भी ज्यादा से ज्यादा युवा बदलते लाइफस्टाइल के कारण इन आदतों की जकड़ में आ जाते हैं। तंबाकू के इस्तेमाल से चूंकि जानलेवा बीमारियां होती हैं इसलिए तंबाकू के किसी रूप में सेवन नहीं करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है। धूम्रपान या तंबाकू सेवन त्याग देने से ओरल कैंसर से बहुत हद तक बचाव हो सकता है।