घुटनों के दर्द से जूझ रही महिला ने दौड़ी 10 किमी मैराथन, Robotic Surgery ने बदली जिंदगी

60 वर्षीय पल्लवी घुटनों के गंभीर दर्द से परेशान थीं। रोबोटिक सर्जरी की मदद से उनको दर्द में आराम मिला और उन्होंने 10 किमी की मैराथन भी पूरी की।

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Written By: Anju Rawat | Published : April 30, 2026 7:06 PM IST

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Medically Verified By: Dr Abhishek Vaish

"मैं 2 से 3 मिनट भी नहीं चल पाती थी, घुटनों के दर्द की वजह से चलना मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं दोबारा चल पाउंगी और 10 किलोमीटर मैराथन पूरा कर पाना तो मेरे लिए असंभव ही था।" ऐसा कहना है 60 वर्षीय पल्लवी का, जो कई सालों से घुटनों के तेज दर्द से परेशान रहती थीं। दरअसल, पल्लवी दोनों घुटनों के ऑस्टियोऑर्थराइटिस से परेशान थीं। इसकी वजह से उन्हें घुटनों में हर वक्त दर्द रहता था, सूजन और जकड़न भी बनी रहती थी। लेकिन, आज पल्लवी आराम से चल पाती हैं और दौड़ भी लगा सकती हैं।

रोबोटिक सर्जरी ने बदल दी पल्लवी की जिंदगी

जब घुटनों का दर्द असहनीय होने लगा, तो पल्लवी ने इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल का रुख किया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें बाइलेटरल रोबोटिक टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) सर्जरी की सलाह दी। इस सर्जरी में डॉक्टर सबसे पहले आधुनिक 3D इमेजिंग तकनीक की मदद से घुटने का पूरा नक्शा तैयार करते हैं। इसके बाद, रोबोटिक आर्म सर्जन की सहायता करता है। इस सर्जरी के कई लाभ हैं, इसमें शामिल हैं-

  • घुटने की सही अलाइनमेंट
  • हड्डी को कम नुकसान होना
  • तेजी से रिकवरी से में मदद
  • दर्द कम होना

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इस सर्जरी को कौन करवा सकता है?

  • इस सर्जरी को दोनों घुटनों में गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस वाले मरीज करवा सकते हैं।
  • अगर घुटनों में लंबे समय से दर्द और जकड़न की समस्या है, तो भी इस सर्जरी का सहारा लिया जा सकता है।
  • अगर दवाइयों और फिजियोथेरेपी के बाद भी आराम न मिले तो रोबोटिक सर्जरी करवाई जा सकती है।
  • चलने-फिरने, सीढ़िया चढ़ने और उठने-बैठने में परेशानी होने पर इस सर्जरी को करवाया जा सकता है।

क्या कहते हैं डॉक्टर?

ऑर्थोपेडिक, जॉइंट रिप्लेसमेंट और स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक वैष बताते हैं, "जब पल्लवी अस्पताल आई थीं, तब उनके दोनों घुटनों की हालत काफी खराब थी। उन्हें घुटनों में तेज दर्द हो रहा था, जिसकी वजह से उनके घुटनों की मूवमेंट भी काफी कम हो गई। पल्लवी को सामान्य सर्जरी से भी राहत मिल सकती थी। लेकिन, उनकी स्थिति के लिए रोबोटिक टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी ज्यादा बेहतर थी।"

  • यह सिर्फ जॉइंट बदलने की प्रक्रिया नहीं है। बल्कि, इस सर्जरी की मदद से व्यक्ति को सामान्य तरीके से चलने में मदद मिलती है।
  • पल्लवी ने सर्जरी के कुछ ही दिन बाद से दोबारा चलना शुरू कर दिया था। कुछ महीनों बाद उन्होंने हल्की दौड़ शुरू की और फिर मैराथन में भी इतिहास रच दिया।
  • डॉ. वैष कहते हैं, आधुनिक तकनीक से भले ही घुटनों के दर्द को कम किया है। लेकिन मरीज की इच्छाशक्ति भी बहुत जरूरी होती है। पल्लवी का जज्बा एक बेहद प्रेरणादायक उदाहरण है।

मैराथन में लिया हिस्सा

घुटनों की सर्जरी और रिकवरी के बाद पल्लवी ने नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन में हिस्सा लिया। इसमें हजारों धावक शामिल थे, लेकिन पल्लवी की कहानी अलग थी। 60 वर्षीय पल्लवी ने 10 किलोमीटर की दौड़ आत्मविश्वास और मुस्कान के साथ पूरी की। उनकी यह उपलब्धि कई लोगों के लिए प्रेरणा है, क्योंकि महज 14 महीने पहले ही उनके घुटनों की सर्जरी हुई थी और उन्होंने धीरे-धीरे रिकवर कर लिया था।

रोबोटिक सर्जरी एक आधुनिक तकनीक है। रोबोटिक सर्जरी की मदद से कई रोगों का इलाज संभव है। लेकिन, मरीज की स्थिति को देखकर ही डॉक्टर सामान्य या रोबोटिक सर्जरी का चुनाव करते हैं। अगर आपको भी पैरों या घुटनों में दर्द है, तो आप डॉक्टर की सलाह पर सही सर्जरी विकल्प चुन सकते हैं। 

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