
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : October 8, 2025 8:45 PM IST
Robotic Assisted Physiotherapy For Cerebral Palsy: सेरेब्रल पाल्सी एक ऐसी बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क की चोट के कारण बच्चे के शरीर की चाल-ढाल और संतुलन प्रभावित होते हैं। डॉ. आत्मप्रीत सिंह, सीनियर डायरेक्टर एंड हैड न्यूरोलॉजी, शारदाकेयर, हेल्थ सिटी ग्रेटर नोएडा के अनुसार पारंपरिक फिजियोथेरेपी में लंबे समय तक मेहनत और दोहराव वाले अभ्यास होते हैं, जो बच्चों के लिए थकाऊ हो सकते हैं। लेकिन रोबोटिक फिजियोथेरेपी में एआई, वर्चुअल रियलिटी और खास मशीनों का इस्तेमाल होता है, जो व्यायाम को आसान, मजेदार और प्रभावी बनाते हैं। इससे बच्चों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और उनका नियंत्रण बेहतर होता है। यह तकनीक इलाज को नया और बेहतर रूप दे रही है, जिससे बच्चों का जीवन आसान और खुशहाल बन सकता है। तो आइए विस्तार से जानते हैं, रोबोटिक-सहायता प्राप्त फिजियोथेरेपी के लाभों के बारे में।
पारंपरिक थेरेपी में सही मूवमेंट को सीमित बार ही दोहराया जा सकता है, लेकिन रोबोटिक गेट ट्रेनर और एक्सोस्केलेटन में हजारों बार सटीक मूवमेंट दोहरा सकते हैं। यह हाई-डोज मोटर प्रैक्टिस नए न्यूरल पैथवे बनाने में मदद करता है, जिससे बच्चे धीरे-धीरे सही तरीके से चलने और खड़े होने की आदत विकसित करते हैं। यह न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ाता है कहने का मतलब है मस्तिष्क खुद को दोबारा प्रशिक्षित करता है।
आधुनिक रोबोटिक सिस्टम में स्मार्ट सेंसर लगे होते हैं, जो मरीज के प्रयास का आकलन करते हैं और उतनी ही सहायता देते हैं, जितनी उसे जरूरत होती है। इससे मरीज की अपनी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जो उसकी स्थिरता को बढ़ाने में मदद करती हैं। उदाहरण के लिए, क्राउच गेट जैसी विशेष चाल की समस्याओं को बेहतर तरीके से सुधारा जा सकता है, जो पारंपरिक निष्क्रिय मूवमेंट से संभव नहीं हो पाता।
रोबोटिक-सहायता प्राप्त फिजियोथेरेपी में लगातार गति, बल और गति सीमा जैसे डेटा को रिकॉर्ड किया जाता है। इससे डॉक्टर और थैरेपिस्ट मरीज की प्रगति का सटीक विश्लेषण कर सकते हैं और थेरेपी प्लान को तुरंत बदल सकते हैं। माता-पिता को भी अपने बच्चे की प्रगति सही ढंग से देखने को मिलती, जिससे उनका मनोबल बढ़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि थेरेपी का असली फायदा तब होता है, जब बच्चे प्रयोगशाला या क्लिनिक के बाहर भी स्वतंत्र रूप से चलने-फिरने में सक्षम हो जाते हैं। एक्सोस्केलेटन के साथ चलने की सही तकनीक और मुद्रा सिखाने से वे धीरे-धीरे चलने की सहायता पर कम निर्भर होने लगते हैं। इससे वे स्कूल, घर और खेल के मैदान में अधिक स्वतंत्रता से भाग ले पाते हैं, जो उनके सामाजिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।
सेरेब्रल पाल्सी के मरीजों के लिए रोजाना एक जैसे व्यायाम करना बहुत बोरिंग और थकाने वाला होता है। लेकिन जब इस थेरेपी को गेम जैसा बना दिया जाता है, तो बच्चे इसे बहुत मजे से करते हैं। रोबोटिक सिस्टम में वर्चुअल रियलिटी और इंटरैक्टिव गेम्स का इस्तेमाल होता है। इससे बच्चे लंबे समय तक अभ्यास करते हैं, जल्दी सीखते हैं और उन्हें अपनी प्रगति पर गर्व होता है। इससे थेरेपी मजेदार और प्रभावी बन जाती है।
एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके रोबोट से मिले लगातार और सही डेटा को समझता है। इसके आधार पर यह हर बच्चे के लिए खास और बदलने वाली थेरेपी योजना बनाता है। ये योजना वास्तविक समय में बच्चे की जरूरत और ताकत के अनुसार बदलती रहती है। इससे थेरेपी ज्यादा असरदार होती है और बच्चे की रिकवरी तेज़ होती है। एआई इस बात का ध्यान रखता है कि थेरेपी बच्चे की बदलती हालत के हिसाब से सही तरीके से हो, ताकि मस्तिष्क में नई कनेक्शन बनें और बच्चे जल्दी ठीक हो सकें।
साइबरडाइन एचएएल एक खास मशीन है, जो मस्तिष्क से मांसपेशियों तक भेजे गए छोटे विद्युत संकेतों को समझती है। ये संकेत बताते हैं कि व्यक्ति कहां हिलना चाहता है। एचएएल इन संकेतों की मदद से शरीर को सही तरीके से हिलाने में मदद करता है। इससे मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच कनेक्शन फिर से मजबूत होता है। यह तरीका बच्चों को तेजी से चलने और खुद काम करने में मदद करता है। खासकर सेरेब्रल पाल्सी वाले बच्चों के लिए यह तकनीक बहुत फायदेमंद साबित होती है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।