
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
What is Rabies: रेबीज एक घातक वायरस जनित रोग है, जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों के काटने या खरोंचने से मनुष्यों में फैलता है। यह बीमारी विशेष रूप से कुत्तों, बिल्ली, बंदर और चमगादड़ों जैसे जानवरों के जरिए फैलती है। डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, चिराग एंक्लेव, दिल्ली कहते हैं, रेबीज वायरस (Rabies Virus) शरीर में प्रवेश करने के बाद तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है और यदि समय पर उपचार न मिले, तो यह लगभग हमेशा जानलेवा सिद्ध होता है। भारत में रेबीज एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। जिससे बचाव के लिए आपको सतर्क रहना होगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में हर साल रेबीज से लगभग 59,000 लोगों की मौत होती है, जिनमें से लगभग 36 प्रतिशत मौतें केवल भारत में होती हैं। यह आंकड़ा चिंताजनक है और दर्शाता है कि भारत में रेबीज नियंत्रण की आवश्यकता कितनी अधिक है।
(और पढ़ें - कुत्ते के काटने पर कितनी देर बाद लगावाएं टीका)
भारत में रेबीज के मामले पूरे देश में पाए जाते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में इसके मामले अधिक देखने को मिलते हैं। इन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या ज्यादा है और जनसंख्या घनत्व भी अधिक है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और लोगों में रेबीज के लक्षणों व प्राथमिक उपचार की जानकारी का अभाव भी एक बड़ी समस्या है। समय पर इलाज न मिल पाने के कारण यह जानलेवा साबित होती है।
(और पढ़ें - कुत्ते के काटने पर क्या करें)
रेबीज वायरस आमतौर पर संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस मनुष्य के शरीर में मुख्य रूप से जानवर के काटने, खरोंचने या संक्रमित लार के खुले घाव, आंख, नाक या मुंह के संपर्क में आने से प्रवेश करता है। कुत्तों से रेबीज का संक्रमण सबसे अधिक होता है, लेकिन चमगादड़, बिल्लियां, लोमड़ियां और बंदर भी इस बीमारी को फैला सकते हैं। इसलिए ऐसे जानवरों से सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है।
रेबीज के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जो आमतौर पर संक्रमण के 1 से 3 महीनों बाद दिखते हैं। यह वायरस पहले तंत्रिकाओं में फैलता है और फिर मस्तिष्क तक पहुंचता है।
- बुखार
- सिरदर्द
- थकान
- काटे गए स्थान पर जलन, दर्द या झुनझुनी
- पानी से डर (Hydrophobia)
- तेज उत्तेजना और आक्रामकता
- भ्रम या मतिभ्रम
- मांसपेशियों में ऐंठन
- बोलने और निगलने में कठिनाई
जैसे-जैसे वायरस मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है, व्यक्ति कोमा में चला जाता है और अंततः मृत्यु हो जाती है।
रेबीज का एकमात्र इलाज है, रोकथाम और समय पर टीकाकरण। एक बार लक्षण शुरू हो जाने पर इसका कोई प्रभावी इलाज नहीं होता। इसलिए सावधानी ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।
किसी भी जानवर के काटने के बात तुरंत घाव को बहते पानी और साबुन से 10-15 मिनट तक धोएं। यह वायरस को कम करने में सबसे जरूरी कदम है। फिर घाव पर एंटीसेप्टिक लगाएं, जैसे — आयोडीन या अल्कोहल। अब आप किसी निकटतम अस्पताल जाएं और डॉक्टर से संपर्क करें। पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) टीकाकरण को तुरंत शुरू करें।
पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (Post-Exposure Prophylaxis) यानी जानवर के काटने के बाद 5 डोज का टीका दिया जाता है — पहले दिन, तीसरे, सातवें, 14वें और 28वें दिन। यदि काटने वाला जानवर पालतू और टीकाकृत है, तो डॉक्टर इसके अनुसार टीके की जरूरत तय करते हैं।
अगर आप पालतू कुत्तों और बिल्लियों को हर साल रेबीज का टीका लगवाना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे न केवल जानवर सुरक्षित रहते हैं, बल्कि उनके संपर्क में आने वाले इंसानों को भी संक्रमण का खतरा नहीं होता। यदि पालतू जानवरों को समय पर वैक्सीनेशन दिया जाए, तो रेबीज वायरस के प्रसार की संभावना बहुत कम हो जाती है। यह निवारक उपाय इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है और समाज में जागरूकता फैलाना भी जरूरी है।
आवारा जानवरों पर रोक आज का मुख्य विषय बना हुआ है। नगरपालिका और स्थानीय निकायों को आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने और उन्हें टीका लगाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने चाहिए। स्टरलाइजेशन और टीकाकरण (ABC – Animal Birth Control) प्रोग्राम्स को व्यापक स्तर पर लागू करना होगा।
रेबीज से बचाव के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रेबीज के प्रति जागरूकता फैलाना आवश्यक है। स्कूलों, पंचायतों और सामुदायिक केंद्रों में रेबीज से संबंधित जानकारी दी जानी चाहिए — जैसे कि काटे जाने के बाद क्या करें, किससे संपर्क करें और कहां टीका मिलता है।
रेबीज एक ऐसी बीमारी है, जो पूरी तरह से रोकथाम योग्य है, लेकिन भारत में इसकी भयावहता इसलिए बनी हुई है क्योंकि लोगों को समय पर जानकारी, प्राथमिक उपचार और टीकाकरण उपलब्ध नहीं हो पाता। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में इसका प्रकोप ज्यादा देखा जाता है, जहां आवारा कुत्तों की संख्या अधिक है और स्वास्थ्य सेवाएं सीमित हैं। यदि किसी को किसी जानवर ने काटा या खरोंचा है, तो डरें नहीं बल्कि तुरंत घाव को धोएं, एंटीसेप्टिक लगाएं और अस्पताल जाकर टीका लगवाएं। अपने पालतू जानवरों को रेबीज से बचाव का टीका नियमित रूप से दिलवाएं।
नोट- याद रखें, रेबीज से बचाव संभव है, लेकिन इलाज नहीं। समय पर सावधानी और जागरूकता ही आपकी और आपके परिवार की जान बचा सकती है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
रेबीज एक जानलेवा वायरल इन्फेक्शन है, जो लाइसावायरस से संक्रमित जानवर द्वारा काटने से होता है। यह आमतौर पर रीढ़ व मस्तिष्क जैसे अंगों को प्रभावित करता है।