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Hepatitis and diabetes: हेपेटाइटिस और डायबिटीज दोनों ही ऐसी मेडिकल कंडीशन हैं जो ना केवल एक-दूसरे से जुड़ी भी हैं और ये बीमारियां दूसरी स्थिति को प्रभावित भी करती हैं। हेपेटाइटिस एक वायरल संक्रमण के कारण होने वाली लिवर की सूजन की समस्या है। वहीं, इसके उलट डायबिटीज या मधु़मेह एक ऐसी क्रोनिक परिस्थिति है जो शरीर में अपर्याप्त इंसुलिन उत्पादन या शरीर द्वारा इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल ना करने की वजह से होता है। इसमें रक्त में शुगर का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस भी कहा जाता है। वहीं, डायबिटीज में लिवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। लिवर डैमेज के अलावा हेपेटाइटिस जैसी गम्भीर बीमारी का रिस्क भी डायबिटीज के मरीजों में अधिक होता है।
डायबिटीज एक्सपर्ट डॉ. राहुल डे, डे हॉस्पिटल, लाल बंगला कानपुर ( Dr. Rahul Dey, M. B. B. S, MD ,Internal Medicine) के अनुसार, हेपेटाइटिस और मधुमेह कई तरह से एक-दूसरे से जुड़ी हुई स्थितियां है। सबसे पहले, कुछ ऐसे वायरल संक्रमण जो हेपेटाइटिस ( हेपेटाइटिस बी और सी वायरस) का कारण बनते हैं, वही संक्रमण डायबिटीज के विकास के बढ़ते जोखिम से जुड़े हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि इन वायरस के कारण लिवर में सूजन और होने वाले डैमेज के कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस भी हो सकता है। इससे शरीर के लिए ब्लड शुगर लेवल के स्तर को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना और भी कठिन हो जाता है। इसके अलावा, पहले से डायबिटीज से पीड़ित लोगों को हेपेटाइटिस होने पर परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।
डॉ. राहुल डे कहते हैं कि, लिवर ग्लूकोज मेटाबॉलिज़्म को नियंत्रित करता है, और हेपेटाइटिस इस प्रक्रिया को ख़राब कर सकता है। परिणामस्वरूप, मधुमेह और हेपेटाइटिस से पीड़ित लोगों को ब्लड शुगर लेवल स्थिर बनाए रखने में अधिक परेशानियां आ सकती हैं। इसके अलावा, हेपेटाइटिस के इलाज में उपयोग की जाने वाली कुछ दवाएं भी अप्रत्यक्ष रूप से डायबिटीज मैनेजमेंट को प्रभावित कर सकती हैं। जैसे, हेपेटाइटिस सी के लिए निर्धारित कुछ एंटीवायरल दवाएं इंसुलिन या डायबिटीज की दवाओं के साथ रिएक्शन कर सकती हैं। इससे, सभी दवाओं का असर कम हो सकता है। इसीलिए, बिना डॉक्टरी सलाह के हेपेटाइटिस और डायबिटीज की दवाएं एकसाथ नहीं खानी चाहिए।
अगर किसी को मधुमेह और हेपेटाइटिस दोनों समस्याएं है, तो उन्हें अपनी हेल्थ का ध्यान रखने और इन समस्याओं के मैनेजमेंट के लिए अतिरिक्त देखभाल करने की आवश्यकता है। ऐसी ही कुछ टिप्स हैं यें -