टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा, डॉक्टर ने दी जानकारी

Diabetes and liver diseases: क्या आप जानते हैं कि अगर आपको टाइप 2 डायबिटीज है तो यह सीधे-सीधे फैटी लिवर पैदा कर सकता है? आइए डॉक्टर से जानते हैं कैसे।

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Written By: Vidya Sharma | Published : May 16, 2026 1:47 PM IST

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Medically Verified By: Dr Rishikesh Malokar

आजकल हर बड़ा-छोटा इंसान डायबिटीज से परेशान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज टाइप 2 अब सिर्फ शुगर लेवल तक ही सीमित नहीं रह गया है। बल्कि इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है, जिनमें लिवर भी शामिल है। ज़ायनोवा शाल्बी हॉस्पिटल, मुंबई के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट,और थैरेपीयूटिक जीआई एंडोस्कोपिस्ट डॉक्टर ऋषिकेश मालोकार के मुताबिक, डायबिटीज से जूझ रहे लोगों में फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसका कारण है गलत खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा और लंबे समय तक शुगर लेवल को कंट्रोल न रहना।

बता दें कि फैटी लिवर डिजीज ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। शुरुआत में यह समस्या सामान्य लग सकती है, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह गंभीर रूप ले सकती है। कई मामलों में यह लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और यहां तक कि लिवर कैंसर जैसी स्थितियां भी पैदा कर सकती हैं। आइए हम थोड़ा विस्तार से जानते हैं कि कैसे डायबिटीज टाइप 2 के मरीजों में लिवर को नुकसान होता है।

डायबिटीज और फैटी लिवर के बीच क्या है संबंध?

डॉक्टर के अनुसार डायबिटीज और फैटी लिवर के बीच गहरा संबंध है। टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इस स्थिति में ब्लड में मौजूद अतिरिक्त शुगर धीरे-धीरे फैट में बदलकर लिवर में जमा होने लगती है। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों में फैटी लिवर का खतरा अधिक देखा जाता है।

इसके अलावा पेट के आसपास जमा चर्बी, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और असंतुलित जीवन शैली भी इस बीमारी को बढ़ावा दे सकते हैं। जो लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, जंक फूड ज्यादा खाते हैं और नियमित व्यायाम नहीं करते, उनमें यह जोखिम और बढ़ जाता है।

फैटी लिवर से जुड़े लक्षण

फैटी लिवर की सबसे बड़ी समस्या यही है कि इसमें शुरुआती चरणों में दिखने वाले लक्षणों को समझना आसान नहीं होता है। कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उनका लिवर प्रभावित हो रहा है। लेकिन फिर भी आपको शरीर में ये संकेत देखने को मिल सकते हैं जैसे-

  • लगातार थकान रहना
  • पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन या दर्द
  • भूख कम लगना
  • कमजोरी महसूस होना 
  • अचानक वजन घटना 
  • आंखों और त्वचा का पीला पड़ना

ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। कई मामलों में यह बीमारी केवल मेडिकल जांच के दौरान ही सामने आती है।

फैटी लिवर को कैसे मैनेज करें?

डॉक्टर का कहना है कि समय पर जांच और सही लाइफस्टाइल अपनाकर फैटी लिवर को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी है आप वजन कम करें, नियमित व्यायाम करना शुरू करें, लो-फैट और हेल्दी डाइट लें, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं और साथ ही प्रोसेस्ड फूड से बचना बेहद जरूरी है।

कैसे करें बचाव?

ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखें- डायबिटीज मरीजों को समय-समय पर ब्लड शुगर जांच करवानी चाहिए। दवाइयों को कभी भी स्किप न करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें।

वजन कम करें- तनाव, ज्यादा खाना और एक्सरसाइज की कमी के कारण लोगों का वजन तेजी से बढ़ता है। जिससे लोगों में फैटी लिवर का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए वजन कम करें। 

संतुलित आहार लें- डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और दालों को शामिल करें।

रोजाना व्यायाम करें- रोज कम से कम 45 मिनट तक वॉकिंग, योग, स्विमिंग, साइकिलिंग या जिम जैसी गतिविधियां करें। इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है, फैट कम जमा होता है और लिवर ठीक रहता है।

नियमित जांच और फॉलो-अप जरूरी- डायबिटीज मरीजों को समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करवाना चाहिए, ताकि बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके और सही इलाज शुरू किया जा सके।

डिस्क्लेमर- लोग अक्सर डायबिटीज को शुगर से जोड़कर मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना और सही इलाज कराना जरूरी है। थोड़ी सी भी चूक फैटी लिवर की समस्या पैदा कर सकती है। इसलिए हेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल रखें और किसी भी तरह की परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

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