
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : May 15, 2026 8:38 AM IST
Medically Verified By: dr. amit gupta
Image Credit: chatgpt
भारत में डेंगू की चपेट में हर साल लाखों की संख्या में लोग आते हैं। गर्मी और बारिश के मौसम में जब मच्छरों की संख्या ज्यादा हो जाती है, तब डेंगू के मामले ज्यादा दर्ज किए जाते हैं। कई मामलों में डेंगू के मरीजों को अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ता है और कुछ मामलों में मौत भी हो जाती है। हालांकि हमारे देश में डेंगू को लेकर आज भी उतनी जागरुकता नहीं देखी जाती है, जितनी की होनी चाहिए। यही कारण है कि भारत में डेंगू की बढ़ते मामलों को देखते हुए इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 16 मई को नेशनल डेंगू डे मनाया जाता है। नेशनल डेंगू डे पर हमारे साथ खास बातचीत के दौरान फरीदाबाद स्थित फोर्टिस अस्पताल के डायरेक्टर पीड्रिट्रिशियन डॉ. अमित गुप्ता ने बचाया कि डेंगू से बचाव और इसकी सही जानकारी होना लोगों में बेहद जरूरी है। डॉक्टर बताते हैं कि डेंगू का सबसे बड़ा बचाव यही है कि मच्छर के काटने से हर संभव तरीके से बचा जाए। क्योंकि यही मच्छर इस बीमारी को फैलाते हैं।
डॉ. अमित गुप्ता का कहना है कि अक्सर लोग डेंगू के बुखार को नॉर्मल बुखार की तरह की मान लेते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। साधारण बुखार और डेंगू के बुखारे में बहुत बड़ा अंतर होता है। डेंगू के कुछ मामलों में यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और शरीर में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। यही वजह है कि डेंगू के लक्षणों और खतरे के संकेतों को समझना बहुत जरूरी है ताकि समय रहते इलाज किया जा सके।
डेंगू का बुखार (File image)
डॉक्टर का कहना है कि डेंगू का क्रिटिकल फेज अक्सर बुखार कम होने या उतरने के बाद शुरू होता है। कई लोग यह सोच लेते हैं कि बुखार खत्म हो गया तो बीमारी भी खत्म हो गई, लेकिन डेंगू में ऐसा हमेशा नहीं होता। कई बार बुखार उतरने के बाद शरीर में गंभीर कॉम्प्लीकेशंस बढ़ने लगते हैं। इसलिए इस समय मरीज की हालत पर खास नजर रखना जरूरी होता है। इसलिए डेंगू के मरीजों को बुखार उतारने के बाद भी सही देखभाल की जरूरत होती है। डॉ. अमित बताते हैं कि डेंगू के कुछ मामलों में मरीज का बुखार उतरने के बाद शारीरिक कमजोरी, शरीर में दर्द, भूख कम लगना और स्वाद में कड़वापन महसूस होता है। इस परिस्थिति में मरीज का ध्यान न रखा जाए तो सेहत ज्यादा बिगड़ सकती है।
डॉक्टर बताते हैं कि डेंगू के मरीज के बुखार उतरने के बाद कुछ लक्षणों पर गौर करना जरूरी है। डेंगू के मरीजों को अगर बुखार उतर गया है और उन्हें इसके बाद पेट में तेज दर्द होना, पेट फूलना, पेट में पानी भरने जैसी स्थिति और सांस से जुड़ी परेशानी जैसे लक्षणों पर गौर करना चाहिए। डेंगू का बुखार उतरने के बाद कुछ मरीजों के शरीर में कमजोरी और सुस्ती, चिड़चिड़ापन बढ़ना, शरीर में पानी की कमी के संकेत और पेशाब की मात्रा कम पर भी गौर करना चाहिए। ये लक्षण बताते हैं कि डेंगू के मरीजों को तुरंत डॉक्टरी सलाह की जरूरत है।
कुछ मरीजों में डेंगू के दौरान ब्लीडिंग का रिस्क भी बढ़ जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि प्लेटलेट्स कम होने की वजह से यह समस्या हो सकती है। डेंगू के मरीजों को होने वाली ब्लीडिंग के संकेतों में शामिल हैं:
डेंगू के मरीजों को ब्लीडिंग के संकेत नजर आते हैं, तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए और तुरंत इस विषय पर डॉक्टर से बात करके इलाज करवाना चाहिए।
डॉक्टर के अनुसार डेंगू में प्लेटलेट्स धीरे-धीरे नीचे जाने लगते हैं। यह अपने आप में एक रेड फ्लैग माना जाता है।
इसके अलावा कभी-कभी हीमोग्लोबिन बढ़ता हुआ भी दिखाई देता है। डॉक्टर कहते हैं कि सामान्य इन्फेक्शन में हीमोग्लोबिन कम होता है, लेकिन डेंगू में इसका बढ़ना शरीर के अंदर हो रहे बदलावों का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है।
डॉक्टर का कहना है कि अगर मरीज समय पर डॉक्टर के पास पहुंच जाए और सही इलाज व निगरानी मिलती रहे तो इलाज बेहतर हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि डेंगू को सिर्फ एक साधारण बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर बुखार उतरने के बाद मरीज की स्थिति पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। सही समय पर मेडिकल हेल्प लेना कई गंभीर परेशानियों से बचा सकता है।
Disclaimer: अगर आपके परिवार में किसी व्यक्ति को डेंगू बुखार हुआ है तो इस विषय पर डॉक्टर से बात जरूर करें। डेंगू या मच्छर से होने वाली किसी भी बीमारी में घरेलू नुस्खों पर पूरी तरह से भरोसा न करें।