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Written By: Anshumala | Published : May 10, 2021 10:40 PM IST
हृदय रोगों का इलाज नहीं होने से कोरोना मरीजों में मौत का खतरा 5 गुना होता है अधिक।
Heart Disease and Corona in Hindi: यदि आप कोरोना से संक्रमित हैं और आपको हार्ट डिजीज भी है, तो कोविड के इलाज के दौरान अपने दिल का ख्याल रखना ना भूल जाएं, ऐसा करना आपके लिए घातक साबित हो सकता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि दिल की बीमारी का इलाज नहीं होने से कोरोना के मरीजों में मौत की संभावना लगभग 5 गुना अधिक बढ़ जाती है। यह एक बेहद ही चौंकाने वाला शोध है और इसमें कही गई बातों को हृदय रोगों से ग्रस्त कोविड मरीजों (Heart disease and coronavirus) को ध्यान में जरूर रखना चाहिए।
शोध के दौरान कोरोना मरीजों को पहले चरण के इजेक्शन अंश के साथ दिखाया गया है । इसके तहत, बाएं वेंट्रिकुलर इजेक्शन अंश का एक माप जब तक कि अधिकतम वेंट्रिकुलर संकुचन का समय 25 प्रतिशत से कम हो, तो मरीज की मौत की आशंका पांच गुना अधिक बढ़ जाती है। शोधकर्ताओं ने अपने इस शोध में पाया कि समान जोखिम वाले कारकों के समान अनुपात वाले, जिन्हें कोरोना नहीं हुआ था, उनमें प्रथम-चरण अस्वीकृति अंश के निम्न मान थे। यह पता चलता है कि दिल को नुकसान पुरानी पूर्व-मौजूदा स्थितियों के कारण हो सकता है। इसे कोविड संक्रमण का परिणाम नहीं माना जा सकता है। ये दावा शोधकतार्ओं ने किया है।
लंदन में सेंट थॉमस अस्पताल में कार्डियोवस्कुलर क्लिनिकल फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर फिल चिवेंस्की ने कहा, परंपरागत रूप से हृदय का कार्य इजेक्शन अंश द्वारा मापा जाता है या हृदय के प्रत्येक संकुचन के साथ बाएं वेंट्रिकल पंप से कितना रक्त निकलता है। उन्होंने कहा, प्रथम चरण का इजेक्शन अंश, दिल के कार्य का एक नया माप है, जो पारंपरिक इजेक्शन अंश उपायों की तुलना में दिल के शुरुआती, अनिर्धारित क्षति के प्रति अधिक संवेदनशील लगता है। इस रिसर्च के नतीजे पत्रिका हाइपरटेंशन में प्रकाशित हुए हैं।
कार्डियोवस्कुलर रिस्क फैक्टर और बीमारी को कोविड जोखिम कारकों (Heart disease treatment in corona patients) के रूप में मान्यता दी गई है, जो कि सार्स-कोव -2 महामारी के शुरुआती दिनों में रोगी के परिणामों पर उच्च नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। शोधकतार्ओं ने परिकल्पना की है कि हृदय की विफलता की पूवार्नुभूति अस्पताल में भर्ती मरीजों में कोविड के अधिक गंभीर मामलों से जुड़ी होगी। इस मामले में रिसर्च करने वाली टीम ने चीन के वुहान में 129 हॉस्पिटलाइज्ड कोविड रोगियों और दक्षिण लंदन में 251 हॉस्पिटलाइज्ड कोविड रोगियों के लिए फरवरी और मई 2020 के बीच मृत्यु दर का विश्लेषण किया है।
प्रोफेसर फिल चिवेंस्की का कहना है कि निष्कर्ष बताते हैं कि अगर हम पहले चरण के इजेक्शन अंश इमेजिंग का उपयोग करके पता लगाए गए हृदय को होने वाली बहुत पुरानी क्षति को रोक सकते हैं, तो लोगों को कोविड जैसे श्वसन संक्रमण से बचने की अधिक संभावना होगी। इसके अलावा स्वस्थ जीवनशैली विकल्प, बेहतर उपचार, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल के उपचार भी महत्वपूर्ण हैं।
स्रोत: (IANS Hindi)