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Written By: Editorial Team | Published : October 30, 2017 12:51 PM IST
आपका इम्यून सिस्टम चौबीसों घंटे काम करता है ताकि बाहरी तत्व आपके स्वास्थ्य को खराब ना कर दें। इम्यून सिस्टम को बनाने वाले सेल्स, टिश्यू, और ऑर्गन खतरे को पहचानकर आपको रोगों से बचाते हैं। लेकिन कभी-कभी यह सिस्टम हेल्दी सेल्स पर भी हमला कर देता है। इस स्थिति को ऑटोइम्युनिटी कहा जाता है और इस समस्या के साथ रहना कठिन काम है। कुछ ऐसे कारक हैं जिनकी वजह से यह स्थिति पैदा हो सकती है। चलिए जानते हैं।
1) जेनेटिक फैक्टर
अगर आपके परिवार में कोई ऑटोइम्युनिटी से पीड़ित है, तो संभव है कि आप भी इससे पीड़ित हो सकते हैं। इसके एक तिहाई मामले जेनेटिक से जुड़े हैं। जेनेटिक मामले में ऑटोइम्यून स्थिति से इम्यूनोग्लोबुलिन, टी सेल रिसेप्टर्स और मेजर हिस्टोकॉम्पबेटिबिलिटी कॉम्प्लेक्स आदि जुड़े हैं। लेकिन जेनेटिक्स से जुड़े हर मामले में ऐसा होना संभव नहीं है। अन्य कारक जैसे एनवायरनमेंट, जेंडर, रेस और लाइफस्टाइल आदि भी इसके विकास में भूमिका निभाते हैं।
2) महिला होना
ऑटोइम्यून डिसऑर्डर मानव जनसंख्या के 8 फीसदी हिस्से को प्रभावित करती है। इसमें करीब 80 फीसदी महिलाएं हैं। इसका कारण यह है कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक संवेदनशील होती हैं। वर्तमान धारणा यह है कि फीमेल सेक्स हार्मोन इन्फेक्शन के लिए हाइपरइम्यून रेस्पोंस को बढ़ाते हैं जिससे इस मामले में महिलाओं की स्थिति ज्यादा खराब है।
3) वेस्टर्न डायट
इसमें जंक फूड्स शामिल हैं जिनमें सैचुरेटेड फैट, कैलोरी और शुगर की मात्रा अधिक होती है। मैदा, सफेद चावल, लाल मांस, अंडे और डेयरी प्रोडक्ट और नमक इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। इनके बजाय हेल्दी फूड्स जैसे फल-सब्जियां, मछली, गेहूं आदि खाएं। वेस्टर्न डायट से आपको मोटापा, कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का भी खतरा होता है। विज्ञान का अनुमान है कि ज्यादा जंक फूड खाने से ऑटोइम्यून डिजीज का खतरा हो सकता है।
4) साफ-सफाई
कुछ पॉपुलर हाइजीन प्रोडक्ट्स जैसे सेनिटाइजर और एंटीसेप्टिक सोप 99 फीसदी जर्म प्रोटेक्शन का वादा करते हैं। लोग इनके आदि हो गए हैं। जब आप खुद को एंटीसेप्टिक और वैक्सीन के जरिये रोगों से अलग रखते हैं, तो इम्यून सिस्टम इन्हें एक अलग तरीके से रेस्पोंस देता है जिससे यह हेल्दी सेल्स को मारने में मदद करता है। इस ओवररिएक्शन से ऑटोइम्यून डिसऑर्डर का खतरा होता है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां संक्रामक बीमारियां बड़े पैमाने पर होती हैं, वहां ऑटोइम्यून डिसऑर्डर बहुत ही दुर्लभ है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock
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