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नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (एनएएफएलडी) की स्थिति में लीवर में एक्स्ट्रा फैट जमा हो जाता है, जो शराब पीने के कारण नहीं होता है। लीवर में कुछ फैट होना सामान्य है। हालांकि लीवर के कुल वजन वजन का 5 से 10 फीसदी फैट होता है, जिसे फैटी लीवर (स्टीटोसिस) कहा जाता है। फैटी लीवर से आमतौर पर लीवर डैमेज नहीं होता है। हालांकि फैट जमा होने के बाद लीवर थोड़ा कमजोर हो सकता है, जिससे इस अंग में सूजन या जलन हो सकती है। मुंबई स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट एंड हेड हेपेटोबिलरी एंड पैन्क्रीऐटिक सर्जरी एंड लीवर ट्रांसप्लांटटेशन डॉक्टर राकेश राय आपको एनएएफडीडी के जोखिम बता रहे हैं।
इसका जोखिम किसको होता है?
इस समस्या का जोखिम अधिक वजन, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या हाई ट्राइग्लिसराइड्स से पीड़ित लोगों को होता है। तेजी से वजन घटाना और खराब खाने की आदतों से भी एनएएफएलडी भी हो सकता है। हालांकि जिन्हें कोई जोखिम नहीं है उन्हें भी इसका खतरा हो सकता है। इसके कारण लीवर में सूजन आ सकती है, जिसे स्टीटोहेपेटाइटिस कहा जाता है। लीवर में सूजन के कारण आपको सिरोसिस की समस्या भी हो सकती है। समय बीतने के साथ आपको लीवर कैंसर का या लीवर फेलियर का खतरा भी हो सकता है।
एनएएफएलडी का एक और अधिक गंभीर रूप नॉन अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (एनएएसएच) है, यह लीवर में सूजन और डैमेज का कारण हो सकता है। 40 से 60 साल के लोग इससे अधिक पीड़ित होते हैं और पुरुषों तुलना में महिलाओं में अधिक आम है। अक्सर इसके कोई लक्षण नहीं होते हैं। इससे आगे चलकर सिरोसिस की समस्या हो सकती है, यह वो स्थिति है जिसमें लीवर डैमेज हो सकता है। सिरोसिस से पीड़ित कई रोगियों को लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत हो सकती है।
एनएएफएलडी के लक्षण
एनएएफएलडी के अक्सर कोई लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि थकान, कमजोरी, वजन कम होना, भूख में कमी, पेट दर्द, मतली, त्वचा में पीलापन, आंखों में पीलापन या पीलिया, खुजली, द्रव जमा होना, पैरों में सूजन या इडिमा और मानसिक भ्रम इसके लक्षण हो सकते हैं।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock