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इन दिनों दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत पूरे देश में एक बार फिर मौसम बदल रहा है। बदलते मौसम का असर सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ता है क्योंकि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों की तुलना में कमजोर होती है। बदलते मौसम के कारण बच्चों को खांसी-जुकाम, बुखार, सांस लेने में परेशानी और पसली चलने (Rib Retractions) जैसी समस्या होने लगती है। सर्दी, खांसी और बुखार की समस्या तो ठीक है, लेकिन बच्चों की पसली चलना एक गंभीर लक्षण है जो यह बताता है कि उसे पर्याप्त ऑक्सीजन (pasli chalne par kya karen) नहीं मिल पा रही है और उसका शरीर सांस लेने के लिए अतिरिक्त मेहनत कर रहा है। बच्चों को पसलियां चलने की समस्या अक्सर निमोनिया, दमा (Asthma), ब्रोंकाइटिस, एलर्जी, वायरल इंफेक्शन के कारण होती है।
दिल्ली के जनरल फिजिशियन और एमबीबीएस डॉ. सुरिंदर कुमार के अनुसार, पसली चलना (Rib Retractions) का मतलब है कि बच्चा जब सांस ले रहा हो तो उसकी पसलियों के बीच या छाती के नीचे की त्वचा अंदर की ओर धंसने लगे। ऐसा तब होता है जब फेफड़ों तक पर्याप्त हवा नहीं पहुंच पाती और शरीर को सांस लेने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
छोटे बच्चों को अक्सर बदलते मौसम में पसली चलने की समस्या होती है। दरअसल, बदलते मौसम में वातावरण का तापमान और आर्द्रता (Humidity) तेजी से बदलती है। इससे बच्चों का शरीर संतुलन नहीं बना पाता और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही, बदलते मौसम में हवा में बैक्टीरिया और वायरस भी तेजी से फैलते हैं। इससे बच्चों को सर्दी, खांसी और निमोनिया की परेशानी हो सकती है।
बदलते मौसम में अगर बच्चे को सर्दी, खांसी और जुकाम की परेशानी हो रही है, पेरेंट्स को समय पर पहचानना बहुत जरूरी है कि बच्चे की पसली चल रही है या नहीं। आप नीचे बताए गए लक्षणों के आधार पर बच्चों में पसली चल रही है या नहीं, इसका पता लगा सकते हैं।
बदलते मौसम में अगर आपके बच्चों को पसली चलने की सामान्य समस्या हो रही है, तो आप नीचे बताए गए उपायों को अपना सकते हैं।
1. भाप (Steam Inhalation)
बच्चों को हल्की-हल्की भाप देने की कोशिश करें। ऐसा करने से बलगम ढीला होता है और सांस लेना आसान हो जाता है। छोटे बच्चों को डायरेक्ट भाप न दें, बल्कि बाथरूम में गर्म पानी चलाकर वहां बैठाएं।
2. बच्चे को सीधा करके सुलाएं
बच्चा सीधा (Semi-reclining) लेटे तो फेफड़ों पर दबाव कम होता है और सांस लेना आसान होता है। इससे पसलियों के चलने की परेशानी कम हो जाती है।
3. ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल
कमरे की हवा बहुत सूखी हो तो ह्यूमिडिफायर लगाकर नमी बनाए रखें। इससे खांसी और सांस की समस्या में राहत मिलती है।
4. गुनगुना पानी पिलाना
ज्यादा खांसने के कारण अगर बच्चे का गला सूखा पड़ गया है, तो उसे सादे या ठंडे पानी की बजाय गुनगुना पानी पिलाएं। गुनगुना पानी पीने से गले का कफ पिघलता है और उसे बाहर निकालने में आसानी होती है।
पसलियां चलने पर इन उपायों को अपनाने के बाद भी अगर आपको किसी प्रकार की राहत नहीं मिल रही है, तो बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाए और इलाज करवाएं।