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एक्सपर्ट्स ने बताया आखिर क्यों फेफड़ों में भरने लगता है पानी? जानें इसके लक्षण कारण व इलाज

Water in Lungs: फेफड़ों में पानी भरना एक बेहद गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है, जिसके बारे में जानना बहत जरूरी है। इस लेख में आप इस बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां लेंगे।

एक्सपर्ट्स ने बताया आखिर क्यों फेफड़ों में भरने लगता है पानी? जानें इसके लक्षण कारण व इलाज
VerifiedMedically Reviewed By: Dr Ayush Pandey

Written by Mukesh Sharma |Published : February 7, 2026 6:38 PM IST

Fefdo me Pani Bharne ka Karan: यकीनन आपने फेफड़ों में पानी भरने की समस्या के बारे में कभी न कभी जरूर सुना होगा। यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसे मेडिकल साइंस की भाषा में पल्मोनरी एडिमा के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञ इस स्थिति के बारे में बताते हुए कहते हैं कि इस दौरान फेफड़ों के अंदर मौजूद हवा से भरी थैलियों में तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी, बेचैनी और अधिक थकान महसूस होने लगती है। वहीं अगर इस बीमारी का समय पर इलाज न किया जाए, तो मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है और जान के लिए एक बड़ा खतरा भी बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि इसके शुरुआती लक्षणों को हल्के में लेना बिल्कुल भी न लिया जाए और सही समय पर सही कदम उठाए जाए।

पहले कारणों को समझें

अध्ययनों के अनुसार फेफड़ों में पानी भरने की समस्या का मुख्य कारण दिल से जुड़ी गड़बड़ियां होती हैं। जब हृदय खून को सही ढंग से पंप नहीं कर पाता, तो फेफड़ों की रक्त नलिकाओं में दबाव बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए दबाव की वजह से तरल पदार्थ फेफड़ों में जमा होने लगता है। इसके अलावा किडनी की खराबी, निमोनिया, सांस से जुड़ा संक्रमण, गंभीर चोट या शरीर में जरूरत से ज्यादा फ्लूड चढ़ना भी इस समस्या को जन्म दे सकता है। इसलिए दिल और अन्य अंगों की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।

इसके आम लक्षण

लक्षणों की बात की जाए तो फेफड़ों में पानी भरने पर पीड़ित को सांस लेने में तकलीफ, सीने में भारीपन, लगातार खांसी होना, खांसी में झाग या कभी-कभी खून आना, घबराहट महसूस होना, थकान दिखना और लेटते ही सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिसे आपको इग्नोर नहीं करना है। वहीं गंभीर मामलों में होंठ और उंगलियों का नीला पड़ना भी फेफड़ों में पानी भरने का संकेत देता है।

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कैसे होती है जांच

फेफड़ों में पानी भरने का इलाज पीड़ित की स्थिती पर निर्भर करता है, जैसे अगर फेफड़ों के अंदर की तरफ पानी भरा है, तो पहले टेस्ट करके उसके कारण का पता लगाया जाता है, फिर उसके अनुसार इलाज किया जाता है। वहीं मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री की जांच भी सबसे जरूर कदम होता है। इसके बाद चेस्ट एक्स-रे, ब्लड टेस्ट, ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी और ऑक्सीजन लेवल की जांच की जाती है। इन टेस्ट्स से यह पता चलता है कि पानी क्यों भरा है और स्थिति कितनी गंभीर है। फिर अगर फेफड़ों के अंदर पानी 500 मी.ली से ज्यादा भरा हुआ है, तो ऐसे में एक छोटी सर्जिकल प्रोसीजर के माध्यम से फेफड़ों तक ट्यूब पहुंचाई जाती है और उसकी मदद से पानी निकाला जाता है। इस सर्जिकल प्रोसीजर को इंटरकोस्टल ड्रेनेज यानी आसीडी कहा जाता है।

इलाज और बचाव

फेफड़ों में पानी भरने का इलाज कारण पर विशेष रूप से निर्भर करता है। आमतौर पर मरीज को ऑक्सीजन दिया जाता है, फिर पानी निकालने की दवाएं और दिल की कार्यक्षमता सुधारने वाली दवाएं दी जाती हैं। अगर स्थिति गंभीर है तो मरीज के हालत को देखकर उसे आईसीयू में रखा जा सकता है। फेफड़ों में पानी भरना कोई मामूली समस्या नहीं है, इसलिए बचाव के दौर पर दिल और किडनी की बीमारी को कंट्रोल में रखना, नमक का कम सेवन, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन बेहद जरूरी हो जाता है।

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अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।