
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : December 20, 2025 4:13 PM IST
Medically Verified By: Dr. Bharat Gopal
Health Impact of Air pollution: दिल्ली समेत कई राज्यों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर अब हर देशवासी चिंता में है और खासतौर जो लोग इन प्रदूषित शहरों में रहते हैं उनके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ इसका मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता जा रहा है। मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम में रेस्पिरेटरी और स्लीप मेडिसिन विभाग में सीनियर डायरेक्टर डॉ. भरत गोपाल बताते हैं कि एक डॉक्टर के तौर पर मैं रोज देखता हू कि प्रदूषण किस तरह हमारे शरीर पर लगातार प्रभाव डाल रहा है। अब यह सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि धीरे-धीरे हमारे शरीर का हिस्सा बन चुकी है और इसने हमारे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। अगर आपको अभी तक भी सिर्फ यही लगता है कि प्रदूषण के कारण आपके फेफड़े खराब हो रहे हैं, तो आपको अभी और जानकारी की जरूरत है क्योंकि प्रदूषण का हमारे स्वास्थ्य पर असर उससे कहीं ज्यादा गहरा है।
आपको शायद पता भी नहीं होगा लेकिन प्रदूषण का असर हमारी हार्ट हेल्थ पर भी पड़ रहा है। क्योंकि प्रदूषण मे मौजूद ये बारीक हानिकारक कण सांस की मदद से हमारे फेफड़ों तक जाते हैं और फेफड़ों से खून में मिल जाते हैं। खून की मदद से ये हार्ट तक पहुंच जाते हैं और ऐसी स्थिति में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन खराब होने जैसे कुछ लक्षण देखे जा सकते हैं।
(और पढ़ें - हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाने वाली गलतियां)
जिस प्रकार प्रदूषण के बारीक कण आपके हार्ट तक पहुंच जाते हैं, उसी प्रकार खून के माध्यम से ही आपके ब्रेन तक भी पहुंच जाते हैं। ब्रेन पर इनका असर हार्ट से भी ज्यादा गहरा हो सकता है। क्योंकि ये केमिकल युक्त हानिकारक कण आपके ब्रेन में जाकर याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही इनसे, अल्जाइमर और पार्किंसन डिजीज आदि होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
(और पढ़ें - ब्रेन को नुकसान पहुंचाने वाली 5 आदतें)
बहुत ही लोगों को इस बात की जानकारी है कि प्रदूषण का असर हमारे गुर्दों तक भी पहुंच जाता है। लेकिन शायद आप भूल रहे हैं, कि किडनी एक तरह की फिल्टरिंग मशीन है, जो हमारे शरीर को साफ करने का काम करती है। प्रदूषण में रहने वाले लोगों के शरीर में जो विषाक्त पदार्थ जाते हैं, वे किडनी के द्वारा ही फिल्टर किए जाते हैं जिससे किडनी भी उनके संपर्क में आती रहती है। इससे क्रोनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।
सबसे चिंताजनक असर प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ता है। जहरीले तत्व हार्मोन को बिगाड़ते हैं, जिससे पुरुषों और महिलाओं दोनों की फर्टिलिटी प्रभावित होती है और गर्भपात का खतरा बढ़ता है। गर्भवती महिलाओं में ये कण प्लेसेंटा के जरिये बच्चे तक पहुँच सकते हैं, जिससे कम वजन में जन्म, समय से पहले डिलीवरी और बच्चे में दमा व दिमागी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
हमारी आंखों और स्किन भी लगातार प्रदूषण के संपर्क में आती हैं, तो उन पर भी प्रदूषण का असर होना जाहिर है। प्रदूषण में रहने वाले लोगों को आंखों में जलन, एलर्जी व इन्फेक्शन होने लगता है। साथ ही स्किन से जुड़ी समस्याएं भी होने लगती हैं जैसे स्किन एलर्जी, लालिमा, सूजन, जलन या फिर किसी हिस्से में इन्फेक्शन होना। आंखों व स्किन को वायु प्रदूषण के संपर्क में सबसे ज्यादा आने वाले अंगों में से एक माना गया है।
अब आखिर में अगर फेफड़ों की बात करें तो वायु प्रदूषण के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले अंगों में सबसे पहले फेफड़े ही आते हैं। वायु प्रदूषण में मौजूद विषाक्त कण, जहरीली गैसें और केमिकल युक्त कण सांस के जरिए हमारे शरीर के अंदर जाते हैं। इनमें से ज्यादातर फेफड़ों में जार फंस जाते हैं, जिसके कारण अस्थमा, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ता है। हमारे फेफड़े, जो शरीर के फिल्टर हैं, इस बोझ को झेल नहीं पाते।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।