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Relationship Between Iodine and Thyroid Function: आज के समय में थायराइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। भारत में हर 10 में से लगभग 1 व्यक्ति किसी न किसी प्रकार की थायराइड बीमारी से प्रभावित है। आमतौर पर थायराइड जीवनशैली से जुड़ी बीमारी मानी जाती है, लेकिन थायराइड डिसऑर्डर का सबसे बड़ा कारण आयोडीन असंतुलन (Thyroid mein Iodine ki Bhumika) है। कुछ लोग आयोडीन की कमी से परेशान हैं, तो वहीं कुछ लोग ज्यादा आयोडीन लेने के कारण थायराइड हार्मोन के असंतुलन का शिकार हो जाते हैं।
दिल्ली के पीएसआरआई हॉस्पिटल की एंडोक्रिनोलॉजी में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. हिमका चावला (Dr. Himika Chawla, Senior Consultant in Endocrinology at PSRI Hospital) के अनुसार, थायराइड जैसी बीमारी से बचाव के लिए हम सभी का ये समझना बहुत जरूरी है कि ही कारण है कि यह समझना बेहद जरूरी है कि आयोडीन क्या है, ये थायराइड पर कैसे असर डालता है, ज्यादा या कम आयोडीन लेने से क्या नुकसान (Thyroid ke Mariz ko ek Din Main kitne Iodine Lena Chaiye) हो सकता है और थायराइड के मरीज को रोजाना कितना आयोडीन लेना चाहिए।
आयोडीन सीधे तौर पर थायराइड हार्मोन के निर्माण में इस्तेमाल होता है। आयोडीन थायराइड हार्मोन (T3 और T4) का निर्माण करते हैं। डॉ. हिमका चावला का कहना है कि बिना आयोडीन के शरीर थायराइड हार्मोन बना ही नहीं सकता है। आयोडीन की कमी होने पर थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती, जिससे हाइपोथायरॉयडिज्म, वजन बढ़ना, थकान, बाल झड़ना और ठंड ज्यादा लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
लंबे समय तक आयोडीन की कमी रहने पर घेंघा यानी गॉयटर की समस्या भी हो सकती है। T3 हार्मोन में 3 आयोडीन अणु होते हैं। वहीं, T4 हार्मोन में 4 आयोडीन अणु होते हैं। इस बात से स्पष्ट होता है कि शरीर में कम आयोडीन होने पर हम थायराइड हार्मोन का निर्माण होगा। इसके विपरीत ज्यादा आयोडीन होने पर शरीर ज्यादा थायराइड हार्मोन का प्रोडक्शन करेगा।

भारत जैसे देशों में आयोडीन के लिए आयोडाइज्ड नमक का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य व्यक्ति के लिए रोजाना सीमित मात्रा में आयोडीन युक्त नमक का सेवन पर्याप्त माना जाता है। संतुलित आहार लेने वालों को आमतौर पर अलग से आयोडीन सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती। लेकिन थायराइड जैसी बीमारी में मरीज के आधार पर आयोडीन की मात्रा निर्धारित की जाती है। अगर आप थायराइड के मरीज हैं तो अपनी स्थिति के आधार पर आयोडीन का सेवन कर सकते हैं।
| S, No | उम्र | प्रतिदिन आयोडीन (mcg) |
| 1 | वयस्क | 150 mcg |
| 2 | गर्भवती महिला | 220 -250 mcg |
| 3 | बच्चे | 90- 120 mcg |
डॉक्टर के अनुसार, कई लोग थायराइड की समस्या होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के आयोडीन सप्लीमेंट, कैप्सूल या हर्बल प्रोडक्ट्स लेना शुरू कर देते हैं। इस तरह की चीजों का सेवन थायराइड के मरीजों के लिए फायदेमंद नहीं बल्कि नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए थायराइड में आयोडीन की भूमिका संतुलन पर आधारित है। न तो इसकी कमी ठीक है और न ही अधिकता। अगर थायराइड से जुड़ी समस्या है, तो आयोडीन का सेवन बढ़ाने या घटाने से पहले जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

भारत में आज भी ज्यादातर लोगों को ऐसा लगता है कि आयोडीन सिर्फ नमक में पाया जाता है। लेकिन कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी हैं, जिनमें आयोडीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
आयोडीन थायराइड के लिए जितना जरूरी है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। इसलिए थायराइड के मरीजों को संतुलित मात्रा में आयोडीन का सेवन करना चाहिए। हमें ये समझना चाहिए आयोडीन की सही मात्रा ही स्वस्थ थायराइड हार्मोन का निर्माण करती है। जो लोग थायराइड को मैनेज करने के लिए किसी प्रकार की गोली या दवा ले रहे हैं, उनके लिए प्रतिदिन कितना आयोडीन का सेवन सही है, इस विषय पर जानने के लिए अपने डॉक्टर से बात जरूर करें।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।