
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Updated : March 24, 2023 6:59 PM IST
World TB Day 2023 : टीबी यानी ट्यूबरक्लोसिस (TB) आज टॉप 15 घातक बीमारियों में से एक है, जो सालाना 1.7 मिलियन लोगों को प्रभावित करती है। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो हर साल 10 मिलियन से अधिक टीबी नए मामले दर्ज किए जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह रोग COVID-19 के बाद दूसरा सबसे संक्रामक बीमारी है। आज वर्ल्ड टीबी डे के अवसर पर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2023 से 2027 तक टीबी को लेकर डब्ल्यूएचओ महानिदेशक (डीजी) फ्लैगशिप पहल के विस्तारित दायरे की घोषणा की है। यह टीबी जैसी घातक बीमारी को समाप्त करने की दिशा में प्रगति में तेजी लाने के लिए किया जा रहा है। डब्ल्यूएचओ की ओर से साल 2030 तक दुनिया को पूरी तरह से टीबी मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र महासभा भी इस साल सितंबर में तीन उच्च-स्तरीय बैठकें आयोजित करने की योजना बना रही है। इन बैठकों का फोकस यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, महामारी की तैयारी और प्रतिक्रिया और टीबी को समाप्त करने पर होगा।
इस साल विश्व टीबी दिवस की थीम #WeCanEndTB है। भारत का स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र इस विषय के साथ अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है क्योंकि देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को 2025 तक टीबी से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
डब्ल्यूएचओ ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2022 के अनुसार, भारत में हर साल टीबी के 30 लाख नए मामले सामने आते हैं। वहीं, 5 लाख से अधिक मरीजों की मौतों का अनुमान है। इन मामलों में रीढ़ की हड्डी में टीबी सबसे महत्वपूर्ण है, जो देशभर में सभी टीबी केस का लगभग 1- 2% है। रीढ़ की हड्डी में टीबी को बेहतर तरीके से समझने के लिए हमने स्पाइन सर्जन, इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विकास टंडन से बातचीत की है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-
रीढ़ की हड्डी में टीबी को ऑस्टियोआर्टिकुलर टीबी भी कहा जाता है। इस डिजीज में माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया हड्डियों और जोड़ों को प्रभावित करता है। यह मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है, जिसकी वजह से पोट्स डिजीज नामक स्थिति पैदा होती है। इसके अलावा यह डिजीज कूल्हे और घुटने के जोड़ों की लंबी हड्डियों को भी प्रभावित कर सकता है।
भारत में रीढ़ की हड्डी में टीबी के मामले तुलनात्मक रूप से अधिक हैं। इसका कारण देश की बड़ी आबादी, अस्वच्छता और स्वास्थ्य सेवा की कमी है। डॉक्टर का कहना है कि यह बीमारी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अधिक प्रभावित करती है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव होता है।
डॉक्टर का कहना है कि भारत में 2015 और 2021 के बीच टीबी के नए मामलों में लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन गिरावट की यह गति स्पष्ट रूप से 2025 तक टीबी को समाप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है। डॉक्टर का कहना है कि टीबी के मरीजों में गिरावट आई है, यह आप इंडियन स्पाइनल इंजरीज़ सेंटर के मरीजों की संख्या से अनुमान लगा सकते हैं, यहां 2021 में कुल टीबी के मामले 200 पुरुष और 175 महिलाएं थीं, जबकि 2022 में यह घटकर 152 पुरुषों पर आ गई, लेकिन महिलाओं में 236 मामले बढ़ गए।
वहीं, 2021 में स्पाइन टीबी के मामलों की कुल संख्या 80 (पुरुष) और 66 (महिला) थी। वहीं, 2022 में पुरुषों में 65 की गिरावट देखी, हालांकि, महिलाओं के मामले बढ़कर 94 हो गए। इसी तरह, 2021 में, पुरुषों में बोन टीबी के 10 और महिलाओं में 4 मामले सामने आए।
2022 में, बोन टीबी के कुल मामले घटकर 5 हो गए, लेकिन महिलाओं के मामले 4 रह गए। इन आंकड़ों से आप अनुमान लगा सकते हैं कि महिलाओं में टीबी होने का जोखिम अधिक है।
भारत में बोन और रीढ़ की हड्डी में टीबी का इलाज अन्य टीबी संक्रमणों के समान ही होता है। इसमें मरीजों को ठीक होने में लगभग छह से नौ महीने का समय लग सकता है। इलाज के दौरान मरीजों को एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। इसके अलावा कुछ मरीजों में टीबी से प्रभावित टिश्यूज को हटाने के लिए सर्जरी भी की जाती है।
बोन और रीढ़ की हड्डी में टीबी का इलाज के दौरान संक्रमित क्षेत्रों में एंटीबायोटिक्स दवाओं को पहुंचाने में कठिनाई होती है, जो डॉक्टर्स के लिए चुनौती भरा होता है। ऐसे में डॉक्टर्स को अक्सर प्रभावित हड्डियों और जोड़ों में टीबी के संक्रमण को बढ़ने से रोकने रेडियो थेरेपी की मदद लेनी पड़ती है। इसके साथ-साथ डॉक्टर लंबे समय तक एंटीबायोटिक लेने की सलाह देते हैं। इसके अलावा डॉक्टर्स रोगियों को सही डाइट और लाइफस्टाइल फॉलो करने की सलाह दे सकते हैं, ताकि बीमारी को गंभीरता को कम किया जा सके।
ध्यान रखें कि बोन और रीढ़ की हड्डी में टीबी के मामले भारत में काफी ज्यादा हैं। ऐसे में अगर आपको हड्डियों में किसी तरह की परेशानी महसूस हो रही है, तो इस स्थिति में अपनी समस्या को नजरअंदाज न करें। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ताकि आपका सही तरीके से इलाज हो सके।