6 महीने में कैंसर को ठीक करने वाली दवा Dostarlimab कितनी कारगर, जानें स्टडी के परिणाम देते हैं क्या संकेत

एक स्टडी में पाया गया है कि, रेक्टल कैंसर के इलाज के लिए डॉस्टरलिमेब (dostarlimab) मददगार साबित हुई है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : June 14, 2022 6:01 AM IST

Dostarlimab For Cancer Treatment: कैंसर जैसी गम्भीर बीमारी के इलाज की दिशा में एक नयी दवा के कारगर होने के दावे सप्ताह भर से किए जा रहे हैं। बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर 'डॉस्टरलिमेब'  (dostarlimab) नामक दवा को कैंसर के इलाज के लिए एक उम्मीद की किरण के तौर पर देखा जा रहा है। एक स्टडी में पाया गया है कि, रेक्टल कैंसर के इलाज के लिए डॉस्टरलिमेब ( dostarlimab) मददगार साबित हुई है। स्टडी का दावा किया गया है कि ऐसा पहली बार हुआ है। स्टडी के दौरान देखा गया कि, इम्यूनोथेरेपी के बाद  रेक्टल कैंसर के 12 मरीजों में बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखायी दिए। जबकि, इन 6 महीनों तक मरीजों में रेडिएशन (radiation), सर्जरी (surgery) या कीमोथेरेपी (chemotherapy) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी नहीं किया गया। (Dostarlimab For Cancer Treatment In Hindi)

6 महीने में कैंसर के इलाज के दावे

दि न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (The New England Journal of Medicine ) में प्रकाशित इस स्टडी के निष्कर्षों के आधार पर अब डॉस्टरलिमेब को कैंसर के इलाज के लिए कारगर मानी जा रही है। ग्लैक्सोस्मिथलाइन (GlaxoSmithKline) द्वारा निर्मित यह दवा नयी नहीं है बल्कि यह बाजार में काफी पहले मौजूद है। मिली जानकारी के अनुसार अमेरिकी और यूरोपियन बाजारों में इसे सालभर पहले यानि अप्रैल 2021 में ही मंजूरी मिल गयी थी। और इस दवा का इस्तेमाल एंड्रमेट्रिल कैंसर (endometrial cancer) और कुछ पुराने ट्यूमर्स (solid tumours) के इलाज के लिए किया जा रहा था। हालांकि, जहां स्टडी के परिणाम आशाजनक हैं लेकिन वहीं, एक्सपर्ट्स के अनुसार, अभी इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है कि यह दवा कैंसर को पूरी तरह ठीक कर देगी।

डॉस्टरलिमेब को कैंसर का स्थायी इलाज क्यों नहीं मान रहे एक्सपर्ट्स

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस दवा को कैंसर के इलाज के लिए इस दवा के 100% कारगर ना होने के कारण इस प्रकार हैं-

  • स्टडी के दौरान रेक्टल कैंसर (rectal cancers) के ऐसे मरीजो को चुना गया था जिनमें एमएमआर (MMR-deficient rectal cancers) की कमी थी, जिसके मरीजों की संख्या बहुत कम है। रेक्टल कैंसर के कुल मामलों में से केवल 10% मामले ही एमएमआर डेफिसिट हैं। मरीजों की कम संख्या के कारण इस दवा को सभी लोगों के लिए प्रभावी नहीं माना जा सकता है।
  • स्टडी के दौरान प्रतिभागियों को लगभग 9 इंजेक्शन दिए गए जिनका खर्च लगभग 50 लाख से अधिक है। इतना खर्चीला इलाज सभी के लिए उपलब्ध नहीं कराया जा सकता और इसीलिए, इसके प्रभावों को समझ पाने में लम्बे समय तक डेटा जमा करना पड़ सकता है।
  • इसके साथ ही इस बात पर भी संदेह किया जा रहा है कि एक क्लिनिकल ट्रायल के आधार पर यह भी नहीं समझा जा सकता कि इस दवा से कैंसर के इलाजमें कितना समय लग सकता है।
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