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Diabetes in youngsters- दिनभर भागदौड़ करने और कई-कई घंटों तक लगातार बैठे रहकर काम करने वाली लाइफस्टाइल में जहां लोगों में स्ट्रेस बढ़ रहा है वहीं कई तरह की लाइफस्टाइल डिजिजेज का भी खतरा बढ़ रहा है। विशेषकर कार्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों और युवाओं में अस्त-व्यस्त दिनचर्या, अनियमित जीवनशैली और तनाव के बढ़ते स्तर के कारण प्री-डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और फैटी लिवर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
काम के दबाव में आज के युवा अक्सर खाना छोड़ देते हैं, फास्ट फूड पर निर्भर रहते हैं और लगातार तनाव में रहते हैं। लंबे समय तक बैठे रहना, काम के बढ़ते घंटे, नींद की कमी और अनियमित नींद का समय मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है। प्रोसेस्ड फूड, शक्करयुक्त पेय, बार-बार कैफीन का सेवन, धूम्रपान और शराब की लत से मेटाबॉलिक और लाइफस्टाइल डिसऑर्डर का खतरा और बढ़ जाता है। इन अस्वस्थ आदतों की वजह से प्री-डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई बीपी, हृदय रोग और फैटी लिवर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
अपोलो डायग्नोस्टिक्स मुंबई की रीजनल टेक्निकल चीफ डॉ. उपासना गर्ग ने बताया कि कई बार लोग लक्षण दिखने से पहले महीनों या सालों तक इन बीमारियों से जूझते रहते हैं। डायबिटीज में शुरुआती थकान, ज्यादा प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे हृदय रोग का कारण बनता है। इससे सिरदर्द, चक्कर आना और आंखों से जुड़ी समस्याएं होती है, वहीं फैटी लिवर से पेट में भारीपन और असहजता महसूस होती है। यदि समय पर इलाज न हो तो यह स्थिति टाइप-2 डायबिटीज, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और लीवर की गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।
डॉ. उपासना ने आगे बताया कि 50% युवा कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स को इन बीमारियों का खतरा है। खासकर 25 से 45 वर्ष के युवाओं को हर साल कम से कम एक बार हेल्थ चेकअप जरूर कराना चाहिए। प्री-डायबिटीज के लिए फास्टिंग शुगर और HbA1c टेस्ट, कोलेस्ट्रॉल के लिए लिपिड प्रोफाइल, ब्लड प्रेशर चेक, हृदय के लिए ईसीजी और इकोकार्डियोग्राम, HsCRP और फैटी लिवर के लिए लीवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी जाती है। ये सरल जांचें समय पर निदान और इलाज में मददगार होती हैं। साथ ही संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, तनाव को नियंत्रित रखना और धूम्रपान व शराब से दूर रहना बेहद जरूरी है। बैठकर काम करने वालों को बीच-बीच में उठकर स्ट्रेचिंग, हल्की वॉक और एक्सरसाइज करनी चाहिए। पर्याप्त नींद और सही खानपान से भी काफी फायदा होता है।
झायनोवा शाल्बी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. निमित नागड़ा ने बताया कि लगभग 40% युवा कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स को हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर बढ़ना और फैटी लिवर जैसी बीमारियों का खतरा है। हर महीने करीब 10 में से 4 लोग थकान, बार-बार सिरदर्द, चक्कर और बिना वजह वजन बढ़ने की शिकायत करते हैं। इसका मुख्य कारण लगातार तनाव, काम का बढ़ता दबाव, डेडलाइन और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत है। अस्वस्थ खानपान, देर रात तक काम करना और शारीरिक गतिविधि की कमी इस खतरे को और बढ़ाती है।
डॉ. महेश डी एम (Dr. Mahesh D M, Consultant – Endocrinology, Aster CMI Hospital, Bangalore) के अनुसार डायबिटीज से बचने और इंसुलिन मैनेजमेंट के लिए शरीर का वजन कम करने से मदद हो सकती है। अगर आप शरीर का वजन 5-10 प्रतिशत भी कम कर लेते हैं तो इससे भी इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज के अन्य लक्षणों को मैनेज करने में मदद हो सकती है।
इसके अलावा डॉक्टर्स डायबिटीज से बचने के लिए इस तरह की लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें और डाइट से जुड़े नियम फॉलो करने की सलाह देते हैं-
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज, तनाव को कंट्रोल करने और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर डायबिटीज का रिस्क कम किया जा सकता है।
हाई ब्लड शुगर लेवल, थकान, बार-बार सिरदर्द, चक्कर और बिना वजह वजन बढ़ने या कम होने जैसी समस्याएं डायबिटीज का लक्षण हो सकती हैं।