
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 19, 2025 5:54 PM IST
Medically Verified By: Ms. Shilpa Mittal
High Cholesterol and heart health- बैड कोलेस्ट्रॉल और हाई कोलेस्ट्रॉल के बारे में आपने सुना ही होगा और शायद आपको इस बात की भी जानकारी होगी कि बैड कोलेस्ट्रॉल आपकी हेल्थ के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लेकिन, बहुत कम लोगों को ही इस बात का ख्याल आता है कि, उन्हें अपने शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल चेक कराना चाहिए। अक्सर यह कहा जाता है कि, हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल की समस्या केवल बुज़ुर्गों या मोटापे से जूझ रहे लोगों को ही होती है। लेकिन सच्चाई यह है कि एलडीएल (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल, जिसे आमतौर पर बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है, किसी भी उम्र और किसी भी व्यक्ति के लिए हृदय रोगों का खतरा बढ़ानेवाला सबसे बड़ा कारण बन सकता है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, शहरों में 25–30% लोग और गांवों में 15–20% लोग हाई कोलेस्ट्रॉल से प्रभावित हैं। दुनिया भर में भी तस्वीर डराने वाली है। आंकड़ों के मुताबिक
दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्वनी मेहता (Dr. Ashwani Mehta, Senior Consultant Cardiologist, Sir Gangaram Hospital, Delhi) बताते हैं, “एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह अक्सर बिना लक्षण के बढ़ता रहता है। धीरे-धीरे कोलेस्ट्रॉल धमनियों में जमा होता है और खून का प्रवाह कम करता है। कभी-कभी शुरुआती संकेत सीने में दर्द, सांस फूलना, थकान या चक्कर के रूप में सामने आते हैं, लेकिन कई मरीजों को तब तक पता ही नहीं चलता जब तक कि हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति न हो जाए।” भारत में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को हृदय रोग का एक बड़ा कारण है, क्योंकि लगभग 6 में से 10 लोगों में इसका स्तर नॉर्मल से ज्यादा ही पाया जाता है।
उन्होंने कहा कि, ‘’ चिंता की बात यह है कि बहुत से मरीजों को तब तक अपनी कंडीशन का पता नहीं चलता, जब तक कि उनके साथ हार्ट-अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर घटना न घट जाए। शुरुआती पहचान सबसे बड़ी सुरक्षा है। जिनके परिवार में समय से पहले हृदय संबंधित रोगों का इतिहास है या जो अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे धमनियों में जमा होता है, उन्हें संकीर्ण करता है। साथ ही यह महत्वपूर्ण अंगों में खून के प्रवाह (ब्लड फ्लो) कम कर देता है। अगर लक्षण दिखें, तो आपको छाती में दर्द, सांस की तकलीफ या व्यायाम के दौरान पैरों में ऐंठन महसूस हो सकती है, लेकिन तब तक हृदय और धमनियों को पहले ही नुकसान पहुंच चुका होता है। ”
“मैं जवान हूं”, “मैं पतला हूं” या “मुझे कुछ नहीं होगा” जैसी धारणाएं अब पुराने ज़माने की बातें हो गई हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित शोध बताते हैं कि सामान्य वजन और बॉडी मास इंडेक्स (BMI – शरीर द्रव्यमान सूचकांक) वाले लोग भी खराब लिपिड प्रोफ़ाइल विकसित कर सकते हैं। यानी पतला होना हमेशा सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है। एलडीएल (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल, जिसे खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है, मोटापे के बिना भी बढ़ सकता है। अत्यधिक रिफ़ाइंड कार्बोहाइड्रेट वाला आहार, जेनेटिक फैक्टर, इंसुलिन रेज़िस्टेंस (शरीर का इंसुलिन के प्रति कमज़ोर होना) और शरीर में सूजन—ये सब बिना लक्षण दिखाए ही धमनियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
एक परिवार का अनुभव इसे और स्पष्ट करता है। उन्होंने बताया, “हमारे 24 साल के बेटे का जब रूटीन चेक-अप हुआ तो पता चला कि उसका एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बहुत ज़्यादा है और धमनियों में ब्लॉकेज भी शुरू हो चुक है। डॉक्टर ने परिवार में इतिहास पूछा, हमने मना किया। लेकिन डॉक्टर की सलाह पर जब हमने—पति-पत्नी दोनों—टेस्ट कराया तो चौंकाने वाली बात सामने आई। हम दोनों का एलडीएल भी हाई था और हमारे बड़े बेटे (27 वर्ष) का स्तर भी ज़्यादा निकला। सबसे बड़ी हैरानी यह रही कि हममें से किसी को कोई लक्षण नहीं था।”
इस उदाहरण से साफ है कि खराब कोलेस्ट्रॉल अक्सर बिना लक्षण के बढ़ता है, और इसे पहचानने का एकमात्र भरोसेमंद तरीका एक साधारण ब्लड टेस्ट ही है।
डॉक्टर के अनुसार, लगभग हर किसी को कोलेस्ट्रॉल टेस्ट कराना चाहिए। कम से कम हर वयस्क को लिपिड प्रोफ़ाइल (कोलेस्ट्रॉल जांच) ज़रूर करानी चाहिए। इसकी शुरुआत 18 साल की उम्र से करना सबसे अच्छा है, ताकि शुरुआती स्तर पता लगाया जा सके। हर व्यक्ति का टार्गेट लेवल अलग होता है—जो उम्र, पारिवारिक इतिहास और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर करता है। नियमित स्वास्थ्य जांच और समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग से समस्या जल्दी पकड़ में आती है और सही समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है। इसका टेस्ट कितना आसान है? एक साधारण लिपिड पैनल टेस्ट में चार चीज़ें जांची जाती हैं: एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (खराब कोलेस्ट्रॉल), एचडीएल कोलेस्ट्रॉल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल), कुल कोलेस्ट्रॉल स्तर, ट्राइग्लिसराइड्स (रक्त में पाई जाने वाली एक और वसा)। इस टेस्ट के लिए अब पहले जैसी भूखे रहने की आवश्यकता नहीं है। यानी यह टेस्ट आसान भी है और समय पर हृदय रोग के खतरे को पहचानने का सबसे कारगर साधन भी।
शुरुआत टेस्ट से, लेकिन यात्रा यहीं खत्म नहीं होती है। असली काम तब शुरू होता है, जब डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं और थैरेपी को नियमित रूप से अपनाया जाए—भले ही आपका एलडीएल (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल लक्ष्य तक पहुंच चुका हो। अक्सर लोग शुरुआत में सही खान-पान अपनाते हैं, वॉकिंग करते हैं और डॉक्टर की दी हुई दवाएं लेते हैं। लेकिन धीरे-धीरे वे लापरवाह हो जाते हैं।
स्टडीज से पता चलता है हैं कि केवल 25–30% लोग ही लंबे समय तक जीवनशैली में बदलाव या दवाओं का नियमित पालन करते हैं। इसका कारण भी समझ में आता है—कोलेस्ट्रॉल चुपचाप बढ़ता है, और जब इसे काबू में कर लिया जाता है तो व्यक्ति को तुरंत कोई बदलाव महसूस नहीं होता। लेकिन असल सफलता यही है कि दिल का दौरा या स्ट्रोक जैसी घटनाएं हों ही न।
रोज़मर्रा की आदतों में छोटे और आसान बदलाव करें। अपने भोजन में दाल, सब्ज़ियाँ, फल और साबुत अनाज ज़्यादा शामिल करें। ट्रांस फैट और जंक फूड से दूरी बनाएँ। रोज़ाना थोड़ा-थोड़ा चलें और लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें। समय पर सोएं और तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या गहरी साँस लेने के अभ्यास को अपनाएं।
बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल में रखने और हेल्दी हार्ट के लिए डाइटिशियन और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट शिल्पा मित्तल (Shilpa Mittal, Dietician And Nutritionist) भी डाइट और लाइफस्टाइल से जुड़ीं कुछ टिप्स देती हैं जैसे-
फ्लैक्सीड्स (flax seeds) और चिया सीड्स खाने से भी शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर तेजी से कम होता है।
इसके लिए जीवनशैली में सुधार महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल उसी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं। दवाओं को समय पर लेना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि कई बार एलडीएल कोलेस्ट्रॉल सिर्फ आहार और व्यायाम से पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाता। अगर स्तर तय किए गए लक्ष्य तक नहीं पहुंचता, तो डॉक्टर दवा की मात्रा बढ़ा सकते हैं या फिर पीसीएसके9 इनहिबिटर (एक विशेष इंजेक्शन) और इंक्लिसिरन (नई पीढ़ी की दवा) जैसी उन्नत थैरेपी भी सुझा सकते हैं
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को समय पर पहचान कर आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। लिपिड टेस्ट कोई फैसला नहीं, बल्कि एक गाइड है, जो दिखाता है कि आपका वर्तमान स्तर क्या है और आपके हार्ट को हेल्दी रखने के लिए आपको आगे क्या कदम उठाने हैं।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
पौष्टिक डाइट, हेल्दी लाइफस्टाइल और समय पर दवाओं का सेवन करते हुए आप हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल को मैनेज कर सकते हैं।
सीने में दर्द, सांस फूलना, थकान या चक्कर आना बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।