आखिर भारतीयों की किस गलती के कारण बढ़ रहे हैं फैटी लिवर के मामले और क्या है समाधान?

भारत में फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी रोजमर्रा की दिनचर्या में छिपी एक आम गलती लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही है? शुरुआती दौर में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के पनपने वाली यह बीमारी आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : August 7, 2026 5:44 PM IST

हमारे शरीर को चलाने और स्वास्थ्य को सही व स्वस्थ बनाए रखने के लिए शरीर के सभी अंग एक साथ मिलकर काम करते हैं। लेकिन यह सच है कि हमारी खराब जीवनशैली और अनहेल्दी खानपान का असर कुछ अंगों पर ज्यादा पड़ता है जिनमें से लिवर भी एक है। भारत में भी लिवर से जुड़ी समस्याओं के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं और उसके पीछे सिर्फ शराब पीने के मामले नहीं बल्कि जो लोग शराब का सेवन नहीं करते हैं उन्हें भी खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खानपान के चलते लिवर से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं। तेजी से बढ़ते हुए लिवर से जुड़ी इन बीमारियों के कारण एक्सपर्ट्स जल्द से जल्द जांच कराने व अन्य जरूरी कदम उठाने की सलाह देते हैं। आरजी हॉस्पिटल्स, दिल्ली के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एंड लिवर ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट, डॉ. पीयूष विश्वकर्मा ने इस बारे में कई बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनके बारे में हम आज इस लेख में जरूर जानेंगे।

फैटी लिवर के बारे में समझें

आपने सुना ही होगा कि फैटी लिवर को आमतौर पर दो प्रकार के होते हैं, नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर और एल्कोहॉलिक फैटी लिवर। लेकिन अगर आप फैटी लिवर बीमारी के सबसे सटीक रूप से जानना चाहते हैं, तो उसे मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहा जाता है। आज भारत की कुल आबादी का लगभग 16% से 32% हिस्सा इस समस्या से पीड़ित है, जिसका आंकड़ा लगभग 12 करोड़ लोगों के बराबर है।

PubMed की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज मामलों का अध्ययन किया गया तो आंकड़े और भी चिंताजनक निकले। 26,000 से ज्यादा लोगों पर की गई 50 स्टडी के विश्लेषण से पता चला है कि

  • भारत में 38.6% वयस्कों को नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज है।
  • डायबिटीज या मोटापे से पीड़ित लोगों में यह दर (52.8%) और भी ज्यादा है।
  • यहां तक कि 35.4% बच्चों को फैटी लीवर की बीमारी है और मोटापे से ग्रस्त बच्चों में यह आँकड़ा बढ़कर 63.4% हो जाता है।

किन लोगों में फैटी लिवर डिजीज का ज्यादा खतरा

फैटी लीवर की बीमारी किसी को भी हो सकती है, चाहे वे कहीं भी रहते हों या कोई भी काम करते हों। स्टडी से पता चलता है कि भारत के IT सेक्टर में काम करने वाले लोगों को इसका ज्यादा खतरा है, क्योंकि उन्हें लंबे समय तक बैठकर काम करना पड़ता है और उनकी लाइफस्टाइल की आदतें भी अस्वस्थ होती हैं। AIIMS की मदद से की गई एक रिसर्च के अनुसार कर्नाटक और उत्तर भारत में हुई रिसर्च में भी शहरों और गांवों, दोनों जगहों पर इस बीमारी के ज्यादा मामले पाए गए। डायबिटीज, पेट के आसपास ज्यादा चर्बी और इंसुलिन रेजिस्टेंस इसके मुख्य जोखिम फैक्टर हैं।

फैटी लिवर डिजीज के कारण

फैटी लीवर की बीमारी के बढ़ने के मुख्य कारणों में टाइप 2 डायबिटीज, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और शारीरिक गतिविधि की कमी शामिल हैं। इसे एक तरह से मौके के रूप में भी लिया जा सकता है। यह एक मौका भी है, क्योंकि जिन लोगों की इनमें से किसी एक बीमारी के लिए जांच होती है, उनकी दूसरी बीमारियों के लिए भी जांच की जा सकती है। स्वास्थ्य लाइफस्टाइल में बदलाव, जैसे कि संतुलित डाइट खाना और नियमित रूप से एक्सरसाइज करना आदि उपाय एक ही समय में कई स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद कर सकते हैं।

समय रहते जरूरी कदम उठाना जरूरी

अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दशकों में फैटी लिवर बीमारी का बोझ लगातार बढ़ता जाएगा। जितना देर आप करते हैं इस स्थिति को नियंत्रित करने का अवसर तेजी से हाथ से निकल रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए बेहतर डेटा कलेक्शन, जांच के लिए एक समान मानक विकसित करना और ग्रामीण व संसाधन-सीमित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समुदाय-आधारित स्क्रीनिंग कार्यक्रम चलाना और स्वास्थ्य व्यवस्था की प्रमुख प्राथमिकताएं होनी चाहिए।

डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी उद्देश्य केवल केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक है, जिसमें यह बताया गया है कि भारतीयों में फैटी लिवर की समस्या क्यों बढ़ रही है और उसका क्या समाधान है। यह लेख किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।