
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : December 28, 2025 11:48 AM IST
Medically Verified By: Dr. Sunil Rana
Ratan Tata Death Reason: रतन टाटा भारत के मशहूर उद्योगपति पति तो थे ही, साथ ही वह बच्चों से लेकर बड़ों तक के प्रेरणा स्त्रोत भी थे। भले ही रतन टाटा का बुधवार 9 अक्टूबर, 2024 की देर रात मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। लेकिन उनकी याद आज भी सभी के दिल में बनी हुई है। जब वह गए तब उनकी उम्र 86 वर्ष थी, लेकिन अगर वह जीवित होते को हमारे साथ 87वां जन्मदिन मना रहे होते।
खैर, जाने वाले को कौन रोक सकता है लेकिन सभी यह जानना चाहते हैं कि आखिर उनकी मृत्यु किस कारण हुई? मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वह उम्र के साथ होने वाली बीमारियों का सामना कर रहे थे। लेकिन एक बीमारी है जो उन्हें अधिक परेशान करती थी। यह बीमारी थी लो ब्लड प्रेशर यानी कि हाइपोटेंशन। क्या लो बीपी सच में जानलेवा हो सकता है? इस विषय पर हमने एशियन हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के हेड डॉ. सुनील राणा से बात की। उन्होंने क्या बताया, आइए जानते हैं।
डॉक्टर ने बताया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और अंगों की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इस कारण कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बढ़ती उम्र में आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, किडनी की बीमारी, ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं जैसे डिमेंशिया देखी जाती हैं। डॉ. कहते हैं कि ‘उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मरम्मत क्षमता घटती है, जिससे क्रॉनिक बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।’
हार्ट अटैक, स्ट्रोक, अनियंत्रित डायबिटीज, किडनी फेल्योर और गंभीर संक्रमण (सेप्सिस) ऐसी बीमारियां हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती हैं। खासकर हार्ट और ब्रेन से जुड़ी बीमारियांबुजुर्गों में मृत्यु का बड़ा कारण मानी जाती हैं। डॉ. सुनील राणा के अनुसार, ‘बुजुर्गों में हार्ट और स्ट्रोक से जुड़ी बीमारियां सबसे अधिक जानलेवा होती हैं।’
लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) को अक्सर गंभीरता से नहीं लिया जाता, लेकिन यह भी एक महत्वपूर्ण हेल्थ कंडीशन हो सकती है। लो बीपी के कारण चक्कर आना, कमजोरी, धुंधला दिखना और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बुजुर्गों में यह गिरने और फ्रैक्चर का कारण भी बन सकता है। डॉ. बताते हैं, ’लगातार लो बीपी रहने पर दिमाग और दिल तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता, जो खतरनाक हो सकता है।’
हां, अगर ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा गिर जाए और लंबे समय तक नियंत्रित न हो, तो यह जानलेवा हो सकता है। अत्यधिक लो बीपी की स्थिति में शॉक, अंगों को नुकसान और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर का खतरा रहता है, जो मृत्यु का कारण बन सकता है। डॉ. कहते हैं कि ‘सीवियर हाइपोटेंशन एक मेडिकल इमरजेंसी है और इसमें तुरंत इलाज जरूरी होता है।’
डॉ. के अनुसार, ‘समय पर जांच और सही जीवन शैली से लो बीपी के खतरों को काफी हद तक रोका जा सकता है।’ उम्र के साथ बीमारियों का खतरा बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन सही जानकारी, नियमित जांच और सतर्कता से इन बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। लो बीपी को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि समय पर ध्यान न देने पर यह गंभीर रूप ले सकता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
लो बीपी (Low BP) तब खतरनाक होता है जब यह 90/60 mmHg से लगातार नीचे चला जाए और साथ में चक्कर आना, बेहोशी, धुंधला दिखना, सांस फूलना, बहुत ज़्यादा थकान या सीने में दर्द जैसे लक्षण हों।
हाँ, बहुत ज़्यादा लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) जानलेवा हो सकता है, खासकर अगर यह अचानक हो या लंबे समय तक रहे।
रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 और मृत्यु 9 अक्टूबर 2024 को हई थी।