Big Bull राकेश झुनझुनवाला का निधन! एक्सपर्ट्स ने बताया कैसे लाइफस्टाइल बना रहा आपको घर बैठे-बैठे बीमार

राकेश झुनझुनवाला का 62 साल की उम्र में किडनी की समस्या से निधन हो गया है। उन्होंने सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर अपनी आखिली सांस ली।

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Written By: Jitendra Gupta | Updated : August 14, 2022 7:15 PM IST

शेयर मार्केट के बिगबुल कहे जाने वाले राकेश झुनझुनवाला का 62 साल की उम्र में किडनी की समस्या से निधन हो गया है। उन्होंने सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर अपनी आखिली सांस ली। राकेश को तबीयत बिगड़ने पर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बता दें कि उन्हें इससे पहले भी अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन 2-3 सप्ताह पहले ही उन्हें छुट्टी दी गई थी। ब्रीच कैंडी अस्पताल ने भी झुनझुनवाला के निधन की पुष्टि कर दी है। झुनझुनवाला के निधन के बाद से लोगों में हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो न करने को लेकर बहस छिड़ गई है। इस पर हमारे एक्सपर्ट आपको कुछ जरूरी जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें जानकर आप ज्यादा उम्र में भी बीमारियों से दूर रह सकते हैं।

50 फीसदी तक फेल हो चुकी थी किडनी

मुंबई सेंट्रल स्थित वॉकहार्ट अस्पताल के बेरिएट्रिक सर्जन, कंसलटेंट डॉ रामन गोयल का कहना है कि 62 वर्ष की उम्र में कॉर्पोरेट दिग्गज की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु व्यक्तिगत स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने पर ध्यान केंद्रित करती है। हालांकि फिलहाल झुनझुनवाला के स्वास्थ्य से जुड़ी कोई खबर सामने नहीं आई है लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि उनकी किडनी 50% तक फेल हो चुकी थीं, जो की डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोमसे संबंधित हैं।

डायबिटीज रोगियों को ये खतरे

हालांकि दवाएं और जीवनशैली में बदलाव डायबिटीज के उपचार का मुख्य आधार है, फिर भी 50% से अधिक डायबिटीज रोगी में ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित रहता है, जिससे किडनी फेल होना, दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक और समय से पहले मौत जैसी जटिलताएं हो जाती हैं।

ब्लड शुगर कंट्रोल करना जरूरी

उन्होंने कहा कि अनियंत्रित ब्लड शुगर, शुरू में मेटाबॉलिक सर्जरी न केवल शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है, बल्कि 90% रोगियों में इन जटिलताओं को कम करने का भी काम करती है। वहीं ये सर्जरी लगभग 50% डायबिटीज रोगियों से संबंधित मौतों को कम भी करती है।

युवाओं को ज्यादा खतरा

मुंबई स्थित सिम्बायोसिस अस्पताल के कैथलैब और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ अंकुर फटरपेकर कहते हैं कि वर्क फ्रॉम होम और गतिहीन जीवनशैली के कारण कोविड ने लोगों को अधिक असहज बनाने का काम किया है। जब बात शराब के सेवन को लेकर होती है तो यूरोपीय देशों में "संयम" दिखाई देता है लेकिन भारतीयों में ऐसा कम है, क्योंकि यहां पर लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं। युवाओं में दिल के दौरे के मामलों में ये कारक प्रमुख पाया गया है।

ह्रदय रोगों की प्रमुख वजह

उन्होंने कहा कि लक्षणों की जानकारी मिलने में जितना अधिक समय लगेगा, परिणाम उतने ही बुरे होंगे। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य जानकारी का आभाव और हृदय रोग के जोखिम कारकोंको न पहचान पाना भी मौतों की प्रमुख वजह है।

ये कारक भी जिम्मेदार

डॉ. अंकुर का कहना है कि भारत में युवा, तनाव, मॉडर्न जीवन से जुड़ा तनाव, जीवनशैली से जुड़ा तनाव सहित कई तनाव से गुजर रहे हैं, जो कि धूम्रपान, शराब पीने और अनहेल्दी खाने की आदतों और नींद के पैटर्न में योगदान देते हैं। शोध के अनुसार, लंबे समय तक तनाव में रहने से ब्लड कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और हाई ब्लड शुगर के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है, जो हृदय रोग के एक सामान्य जोखिम कारक हैं।

इन 2 चीजों से खतरा होगा कम

डॉ. अंकुर के मुताबिक, हेल्दी जीवन शैली निस्संदेह हृदय रोग और दूसरी क्रोनिक बीमारियों जैसे कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाइपरग्लाइसेमिया की रोकथाम में मदद करती है। व्यायाम और हेल्दी डाइट दोनों ही गंभीर बीमारियों को रोकने में फायदेमंद होते हैं। हालांकि, जरूरत इस बात की है लोग ह्रदय रोगों को लेकर जागरूक रहे हैं, विशेष रूप से युवा, जिन्हें ज्यादा खतरा है।

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