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World Purple Day 2021: 'पर्पल डे' क्या है, क्यों इस दिन मिर्गी रोग के प्रति फैलाई जाती है जागरूकता, जानें सबकुछ यहां

World Purple Day 2021: 9 वर्षीय कैनेडियन कैसिडी मेगन ने मिर्गी से जुड़े अपने संघर्षों से प्रेरित होकर वर्ष 2008 में 'पर्पल डे' मनाने को लेकर आइडिया डेवलप किया, ताकि मिर्गी से संबंधित मिथकों को दूर किया जाए और इस बीमारी से पीड़ित लोगों को यह बताया जाए कि वे दुनिया में अकेले नहीं हैं।

World Purple Day 2021: 'पर्पल डे' क्या है, क्यों इस दिन मिर्गी रोग के प्रति फैलाई जाती है जागरूकता, जानें सबकुछ यहां
26 मार्च को प्रत्येक वर्ष इस बीमारी के प्रति लोगों को अवेयर करने के लिए ''पर्पल डे'' के तौर पर मनाया जाता है। © Shutterstock

Written by Anshumala |Updated : March 26, 2021 1:08 PM IST

World Purple Day 2021 in Hindi: आज है ''वर्ल्ड पर्पल डे''। दुनिया भर में इस दिवस को मनाने के पीछे एक ही मकसद है, मिर्गी (Epilepsy) के प्रति लोगों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता फैलाना, इसलिए आज के दिन यानी 26 मार्च को प्रत्येक वर्ष इस बीमारी के प्रति लोगों को अवेयर करने के लिए ''पर्पल डे'' (Purple Day) के तौर पर मनाया जाता है। इसे Epilepsy Awareness Day भी कहते हैं। दुनिया भर के देशों में लोगों को मिर्गी के प्रति जागरूक करने के समर्थन में बैंगनी रंग के कपड़े पहनने और मेजबान कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

कैसे हुई 'पर्पल डे' की शुरुआत (World Purple Day 2021 in Hindi)

9 वर्षीय कैनेडियन कैसिडी मेगन ने मिर्गी (Epilepsy) से जुड़े अपने संघर्षों से प्रेरित होकर वर्ष 2008 में ''पर्पल डे'' मनाने को लेकर आइडिया डेवलप किया, ताकि मिर्गी से जुड़े मिथकों को दूर किया जाए और इस बीमारी से पीड़ित लोगों को यह बताया जाए कि वे दुनिया में अकेले नहीं हैं। कैसिडी ने इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया। 26 मार्च 2008 को पहली बार बैगनी दिवस यानी पर्पल डे  (Purple Day) आयोजित किया गया। इस दिन लोगों को बैगनी रंग का कपड़ा पहनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कैसिडी के विचार को आगे बढ़ाने के लिए 2008 में नोवा स्कोटिया के एपिलेप्सी एसोसिएशन ने प्रस्ताव रखा, जिसे आज एपिलेप्सी कैंपेन के लिए ''पर्पल डे'' के नाम से जाना जाता है।

भारत में बच्चों में बढ़ रही है मिर्गी की समस्या, कारण जानकर सही उपचार से ठीक हो सकती है समस्या

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भारत में आज भी एक गंभीर रोग है मिर्गी

भारत में आज भी मिर्गी को एक गंभीर रोग (Epilepsy Disease) की तरह देखा जाता है। आज भी गांव-देहात में रहने वाले लोग मिर्गी का इलाज करवाने के लिए झाड़-फूंक और ओझा, जादू टोना की मदद लेते हैं। इस कारण से यह रोग संपूर्ण रूप से ठीक नहीं होता है। इसका इलाज संभव है पर इस रोग के प्रति लोगों को जागरूक होना होगा। क्या है यह बीमारी इसके बारे में जानने की जरूरत है। भारत में मिर्गी से पीड़ित लगभग तीन चैथाई लोगों को उस अनुपात में उपचार नहीं मिल पाता है, जिसकी उन्हें जरूरत होती है।

मिर्गी के लक्षण (Symptoms of Epilepsy in Hindi) 

- शरीर का अकड़ना।

- आंखों के आगे अंधेरा छा जाना।

- बेहोशी।

- मुंह से झाग आना।

- होंठ या जीभ काट लेना।

- आंखों की पुतलियों का ऊपर की तरफ खिंच जाना।

- अचानक से जमीन पर गिर जाना।

- दांत भिंचना।

[caption id="attachment_657542" align="alignnone" width="655"]purple day and epilepsy awarness treatment मिर्गी के लक्षण और उपचार। © Shutterstock[/caption]

मिर्गी के कारण (Causes of Epilepsy in Hindi) 

- सिर पर चोट लगना।

- जन्म के समय मस्तिष्क में पर्याप्त रूप से ऑक्सिजन सप्लाई न होना।

- ब्रेन ट्यूमर होने पर।

- दिमागी बुखार और इन्सेफेलाइटिस से भी मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ने से मिर्गी की समस्या हो सकती है।

- ब्रेन स्ट्रोक होने पर ब्लड वेसल्स को क्षति पहुंचने से भी यह रोग होता है।

- अल्जाइमर।

- जेनेटिक।

कब आ सकता है मिर्गी का दौरा

- हार्मोंस में बदलाव होने पर।

- ज्यादा शराब का सेवन करने से।

- दवा न खाने से।

- ब्लड प्रेशर कम होने के कारण।

- तनाव में रहने के कारण।

- पर्याप्त नींद न लेने पर।

- ब्लड शुगर कम होने पर।

- अचानक तेज रोशनी में आने पर।

मिर्गी का इलाज है संभव (Treatment Epilepsy in Hindi)  

मिर्गी का इलाज (Epilepsy treatment) दवा से संभव है। हालांकि, दवाओं से मिर्गी के अटैक को अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। उपचार के अन्य विकल्प भी हैं, जो निर्धारित दवाओं के काम न करने पर आजमाए जा सकते हैं। अटैक आने पर रोगी को जूता न सुघाएं। मुंह में चम्मच न लगाएं। कपड़ों को ढीला कर दें। खुली हवा में छोड़ दें। हाथ-पैरों की मालिश न करें। अकड़े हुए अंगों को जबरदस्ती सीधा करने की कोशिश न करें।

जब आए पहली बार अटैक

पहली बार अटैक पड़ने पर डॉक्टर के पास पीड़ित को जरूर लेकर जाएं। मिर्गी की जांच करवाएं। ब्लड टेस्ट, एमआरआई, ईईजी से इस बीमारी का पता चल सकता है। ब्लड टेस्ट में कैल्शियम और सोडियम की कमी होने पर मिर्गी का दौरा पड़ सकता है। एमआरआई से दिमाग में उत्पन्न हुई समस्याओं का पता लगाया जाता है। ईईजी से जेनेटिक मिर्गी के बारे में पता चल सकता है।

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क्या घरेलू उपचार से मिर्गी का कारगर इलाज हो सकता है?

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