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भागदौड़ भरी जिंदगी और स्ट्रेस के माहौल में लोगों को नींद से जुड़ी समस्याएं बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। दिनभर थके हुए होने के बाद भी बहुत से लोगों को रात में नींद नहीं आती और वे काफी देर तक जागते रहते हैं। आमतौर पर शरीर के लिए 7-8 घंटें की नींद जरूरी मानी जाती है लेकिन, जब लोग इससे कम देर तक सोते हैं तो इससे आपकी हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। नींद की कमी के कारण थकान, सिरदर्द और माइग्रेन जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि नींद की कमी के कारण हार्ट अटैक (Heart attack due to insomnia) भी आ सकता है।
पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राजा धार (Dr. Raja Dhar, Director and Head of the Department of Pulmonology at CMRI Kolkata ) के अनुसार, दुनियाभर में रहने वाले सभी लोगों में से लगभग 10 प्रतिशत लोगों को किसी ना किसी प्रकार का स्लीपिंग डिसॉर्डर (sleep disorders worldwide) है। वहीं, केवल भारत में 20 करोड़ से अधिक लोगों को नींद से जुड़ी परेशानियां हैं। कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया कि भारत में 5 करोड़ लोगों को स्लीप एप्निया (sleep apnea) और अनिद्रा (Insomnia in Indian population) की शिकायत है। लेकिन, इनमें से ज्यादातर लोगों को अपनी बीमारी का ना तो पता है और ना ही उन्हें इससे होनेवाली हेल्थ प्रॉब्लम्स की जानकारी है।
डॉ. धार कहते हैं कि लोगों में नींद से जुड़ी समस्याओं के बारे में जानकारी ना होने के कारण यह उनके लिए बहुत नुकसानदायक साबित होती है। लम्बे समय तक इन समस्याओं को नजरअंदाज करने के कारण इन बीमारियों का रिस्क बढ़ सकता हैं-
भारत में नींद से जुड़ी समस्याएं ( Sleep-related problems in India on rise) बहुत ही तेज गति से बढ़ रही हैं जो एक चिंता की बात है। ऐसे में शुरूआत में ही स्क्रीनिंग कराने (making early screening), लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव करने ( lifestyle modifications) और दवाओं की मदद से इन समस्याओं से राहत पाने में मदद हो सकती है।
स्वास्थ्य के लिए अच्छी और गहरी नींद बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। इसीलिए, अगर आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जो जोर से खर्राटे लेता है (snores loudly) या दिनभर बहुत अधिक थकान महसूस करता है (experiences excessive fatigue during the day), रात में उसकी नींद बार-बार खुलती है या उसे गले में घुटन जैसा महसूस होता (experiences excessive fatigue during the day) है तो इन समस्याओं को नजरअंदाज ना करें। ये सभी समस्याएं अनिद्रा और अन्य स्लीपिंग डिसॉर्डर्स के लक्षण हैं। ऐसी स्थितियों में डॉक्टर की सहायता मिलने से मरीज की बहुत मदद हो सकती है। स्लीपिंग डिसॉर्डर्स के लक्षणों पर ध्यान देने और अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखने से आप नींद से जुड़ी परेशानियों से बच भी सकते हैं और स्वस्थ रह सकते हैं।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।