
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : February 3, 2021 5:56 PM IST
वैसे तो सोरियाटिक गठिया 30 से 50 साल की उम्र के लोगों को होता है लेकिन कई बार बच्चे भी इसका शिकार हो जाते हैं।
सोरियाटिक गठिया (Psoriatic arthritis), गठिया का ही एक रूप है जो आमतौर पर उन लोगों को अपना शिकार बनाता है जिन्हें पहले से ही सोरायसिस रोग होता है। अगर आपको नहीं पता सोरायसिस क्या होता है तो बता दें कि ये एक ऐसी स्थिति होती है जब किसी व्यक्ति की स्किन पर लाल और सिल्वर रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं। और ऐसा सिर्फ एडल्ट या व्यस्कों के साथ ही नहीं बल्कि बच्चों के साथ भी हो सकता है। कई बच्चे ऐसे होते हैं जिनकी उम्र लगभग 10 साल होती है लेकिन वो सोरियाटिक गठिया (Psoriatic Arthritis in Children) का शिकार बन जाते हैं। वैसे तो सोरियाटिक गठिया 30 से 50 साल की उम्र के लोगों को होता है लेकिन कई बार बच्चे भी इसका शिकार हो जाते हैं। बच्चों में, सोरियाटिक गठिया जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (juvenile idiopathic arthritis) का ही एक रूप माना जाता है। बच्चों में सोरियाटिक गठिया के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर इसका इलाज किया जा सकता है।
अभी तक इस बात का पता नहीं चला है कि आखिर बच्चों को सोरियाटिक गठिया (Psoriatic Arthritis) रोग क्यों होता है। लेकिन बच्चे की फैमिली हिस्ट्री, उसका माहौल और लाइफस्टाइल बच्चों में सोरियाटिक गठिया का एक कारण हो सकता है। साथ ही यदि किसी बच्चे की फैमिली में किसी को अर्थराइटिस या सोरायसिस में से एक भी रोग हो तब भी बच्चे को सोरियाटिक गठिया हो सकता है।
ज्यादातर लोगों को पहले सोरायसिस होता है और फिर वह सोरियाटिक गठिया का रूप ले लेता है। डॉक्टर्स कहते हैं कि कई बार स्किन पर पैच दिखने से पहले ही जोड़ों में दर्द की समस्या शुरू हो जाती है। जोड़ों में दर्द, जकड़न और सूजन सोरियाटिक गठिया (Psoriatic Arthritis) के मुख्य लक्षणों में आते हैं। से लक्षण आपकी उंगलियों, रीढ़ और शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकते हैं। बच्चों में सोरियाटिक गठिया के शुरुआती लक्षण इस प्रकार हैं-
डॉक्टर पहले तो स्थिति का जायजा लेते हैं, जरूरी टेस्ट करवा सकते हैं और बच्चे व उसकी फैमिली की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछ सकते हैं। इसके बाद दवा देकर इलाज की शुरुआती है। त्वचा के लक्षणों को नियंत्रित करने और शरीर के दर्द को कम करने के लिए थेरेपी भी दी जा सकती है। अगर फिर भी स्थिति काबू में न आए तो डॉक्टर इंजेक्शन लगाने को भी कह सकते हैं।
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