National Cancer Awareness Day: शुरुआत में नहीं दिखते प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण, मगर इन 3 तरीकों से जानना है आसान
National Cancer Awareness Day 2022: इस लेख में प्रोस्टेट कैंसर पर कुछ अहम जानकारी दे रहे हैं डॉ. अनिल ठकवानी, हेड और सीनियर कंसल्टेंट, शारदा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा।
बिजी लाइफस्टाइल के कारण पिछले कुछ सालों से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ी हैं। ऐसी ही एक परेशानी है प्रोस्टेट कैंसर। आपको बता दें कि प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में एक छोटी सी, आकार में अखरोट जैसी ग्रंथि होती है। इस ग्रंथि का काम वीर्य उत्पादन है। इस प्रोस्टेट कैंसर को समय से उपचार के बाद ठीक किया जा सकता है। कोशिकाओं में अचानक से होने वाले परिवर्तन प्रोस्टेट कैंसर का कारण बनते हैं। इस अखरोट नुमा ग्रंथि में कोशिकाओं की विधि को प्रोस्टेटिक इंट्रापीथेलियल नियोप्लासिया के नाम से जाना जाता है।
डॉ. अनिल ठकवानी के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर का जल्दी पता लगने पर इसका इलाज समय पर किया जा सकता है! ऐसा होने पर कैंसर के रोगी के पास सबसे अधिक इलाज कराने के विकल्प होते हैं, जिसमें फोकल थेरेपी शामिल है और इसमें कम साइड इफेक्ट में कैंसर का इलाज संभव है।
शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखता
समस्या यह है कि शुरुआत की स्टेज में प्रोस्टेट कैंसर बिना किसी लक्षण के छिपा रहता है। लेकिन, एक बढ़ता हुआ ट्यूमर बिलकुल आखिर में लक्षण पैदा करेगा। प्रोस्टेट कैंसर इन्फेक्शन के रूप में नहीं समझा जा सकता है क्योंकि कई गैर-कैंसर स्थितियों में भी समान लक्षण पैदा हो सकते हैं, इसमें केवल एक डॉक्टर ही अंतर बता सकता है।
यहां पर कुछ प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों के संकेत दिए गए हैं जिन पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। प्रोस्टेट कैंसर को तीन श्रेणियों में बांटा है। इसमें यूरिनरी लक्षण, सेक्सुअल लक्षण और दर्द वाले लक्षण शामिल हैं।
1. यूरिन संबंधी लक्षण
बार-बार पेशाब करने की आवश्यकता, पेशाब करने में परेशानी होना जैसे पेशाब करना या रोकना मुश्किल होना। कमजोर या धीमी धारा, ड्रिब्लिंग, पेशाब में खून आना आदि इस श्रेणी में मौजूद लक्षण हैं।
2. सेक्सुअल लक्षण
इरेक्टाइल फंक्शन में बदलाव होना (इरेक्शन पाने या बनाए रखने में मुश्किल), कम स्खलन, सीमन में ब्लड आना।
3. दर्द के लक्षण
पेशाब करने में दर्द होना, सेक्स करते समय ज्यादा दर्द होना, आपकी कमर के निचले हिस्से, कूल्हों और जांघों में दर्द होना।
यदि आपको इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव होता हैं, तो अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। यह इस बात की ओर संकेत नही करता है कि आपको प्रोस्टेट कैंसर है लेकिन इन लक्षणों को समान्य नही समझना चाहिए। एक बार डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जितनी जल्दी प्रोस्टेट कैंसर का पता किया जाता है, उतना ही अधिक इलाज जल्दी और आसानी से होता है।
इसके अलावा अगर आपको प्रोस्टेट कैंसर के अलावा कोई अन्य स्थिति यूरिन, यौन या दर्द के लक्षण पैदा होने का कारण बन रही है तो आप जितनी जल्दी डॉक्टर के पास जायेंगे बीमारी उतनी जल्दी ठीक करके अपने जीवन को बिना किसी परेशानी के व्यतीत कर सकेंगे।
प्रोस्टेट कैंसर के कारण और रोकथाम
आयु
प्रोस्टेट कैंसर के होने में उम्र एक बहुत बड़ा मुख्य कारक है। क्योंकि 50 और उससे ज्यादा उम्र के 30 प्रतिशत पुरुषों को पहले से ही प्रोस्टेट कैंसर है। 70 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के 80 प्रतिशत लोगों को प्रोस्टेट कैंसर या प्रोस्टेट से संबंधित बीमारियां होती हैं। एवरेज प्रोस्टेट कैंसर के होने की उम्र 70 वर्ष है। आमतौर पर, जितनी ज्यादा उम्र होती जाती है प्रोस्टेट कैंसर के होने का खतरा उतना ही अधिक होता है।
डाइट
हमारा खाना ही हमारी बीमारियों की जड़ होता है। स्वस्थ भोजन खाने से इन बीमारियों को रोका जा सकता है। आपकी खाने की आदतों को अधिकांश बीमारियों से जोड़ा जा सकता है, प्रोस्टेट कैंसर भी ऐसी ही बीमारियों में से एक है। एक शोध में सामने आया है कि रेड मीट का ज्यादा सेवन करने से और सब्जियों का सेवन अपने भोजन में कम करने पर प्रोस्टेट कैंसर के बढ़ने का खतरा होता है। सब्जियों और लीन प्रोटीन से भरपूर भोजन का सेवन करना ही सबसे अच्छा उपाय है। उच्च विटामिन सी, जामुन, अंगूर, साबुत अनाज और पूरी मात्रा में लिक्विड पदार्थ के साथ हरी सब्जियां प्रोस्टेट कैंसर को रोकती हैं।
व्यायाम
व्यायाम हमारे शरीर के स्वास्थ के लिए बहुत लाभदायक है। यह हमारी इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है। एक शोध में सामने आया है कि जो पुरुष हर रोज व्यायाम करते हैं उनमें प्रोस्टेट कैंसर के होने का खतरा कम होता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो पुरुष व्यायाम को लेकर ज्यादा सक्रिय होते हैं उनमें प्रोस्टेट कैंसर के खतरे में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। किसी भी प्रकार के व्यायाम करने वाले लोगों में कोई भी बीमारी होने के खतरे में 13 प्रतिशत की कमी आई।
एक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि व्यायाम अफ्रीकी और अमेरिकी लोगों में प्रोस्टेट कैंसर के खतरे में मदद नहीं करता है। उम्र बढ़ने के बावजूद हर व्यक्ति को प्रत्येक सप्ताह 150 मिनट की मध्यम व्यायाम करने का लक्ष्य रखना चाहिए।
वजन
वजन भी प्रोस्टेट कैंसर में काफी महत्व रखता है। ज्यादा वजन बढ़ने पर प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि ज्यादा बॉडी मास इंडेक्स वाले लोगों में प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा अधिक होता है। लेकिन कम वजन होने पर भी प्रोस्टेट कैंसर आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन कम बॉडी मास इंडेक्स वाले लोगों को प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा कम होता है। ज्यादा वजन हमारे शरीर में बीमारी होने की संभावना को बढाता है। इसलिए स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए हर रोज व्यायाम और योग करना चाहिए और स्वस्थ भोजन खाना चाहिए।
सेक्सुअल एक्टिविटी
यौन संचारित रोगों और प्रोस्टेट कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं है। लेकिन कुछ अध्ययनों से पता चला है कि यौन गतिविधि की कमी प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है। जिससे प्रोस्टेट सर्जरी के बाद ठीक होने में भी ज्यादा समय लग सकता है।
इसलिए प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने के लिए एक वीक में 3-5 बार इजेकुलेशन करने का लक्ष्य निर्धारित करे। यह आपके शरीर में बीमारी होने के खतरे को 30 प्रतिशत तक कम कर सकता है! प्रोस्टेट कैंसर सीधे प्रजनन अंगों से जुड़ा होता है, इसलिए ऐसा करने से आप कैंसर का रिस्क कम कर सकते हैं।
धूम्रपान
धूम्रपान शरीर के स्वास्थ्य के लिए किसी भी प्रकार से अच्छा नहीं है। प्रोस्टेट कैंसर के साथ साथ कई प्रकार के कैंसर से इसका गहरा संबंध है। एक शोध में सामने आया है कि धूम्रपान और प्रोस्टेट कैंसर के बीच में कनेक्शन है। इस संबंध को साबित करने के लिए और अधिक अध्ययन करने की आवश्यकता है। यदि आप को प्रोस्टेट कैंसर के साथ साथ किसी भी अन्य कैंसर के होने का खतरा है तो धूम्रपान नहीं करना चाहिए।
कद
एक अध्ययन में पाया गया है कि आपका कद जितना लंबा होगा प्रोस्टेट कैंसर के बढ़ने का खतरा उतना ही अधिक बढ़ सकता है।
(Inputs By: Dr. Anil Thakwani, Head and Senior Consultant, Sharda Hospital, Greater Noida)