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Written By: Atul Modi | Published : August 31, 2023 7:53 PM IST
हाल के वर्षों में, ‘प्रोबायोटिक्स’ शब्द ने सेहत की दृष्टि से फायदेमंद होने के चलते काफी लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। बहुत से लोग प्रोबायोटिक्स को योगर्ट से जोड़ते हैं लेकिन यह समझना महत्वपूर्ण है कि ये फायदेमंद सूक्ष्मजीव आमतौर पर डेयरी उत्पादों से मिलने वाले लाभ से भी कहीं अधिक लाभकारी होते हैं। प्रोबायोटिक्स, मूल रूप से सूक्ष्मजीवों (माइक्रो ऑर्गेनिज्म) को कहते हैं, जिसमें मुख्य रूप से बैक्टीरिया और यीस्ट शामिल हैं, और पर्याप्त मात्रा में इसका सेवन करने पर अनेक प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी लाभ मिलते हैं। योगर्ट भी प्रोबायोटिक्स का जाना-पहचाना स्रोत है, इसी तरह अन्य कई खाद्य पदार्थ और सप्लीमेंट्स भी लाभकारी जीवों से भरपूर होते हैं और हरेक अपनी अनुपम पेशकश के साथ आता है। आइये डॉ दीपाली शर्मा, (क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, सी के बिरला हॉस्पिटल (आर), दिल्ली) से जानते हैं प्रोबायोटिक्स के फायदे क्या हैं?
प्रोबायोटिक्स का पाचन संबंधी स्वास्थ्य के साथ गहरा संबंध है। ये सूक्ष्मजीव आंतों में माइक्रोबायोम का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो कि कुशल तरीके से पाचन तथा पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए आवश्यक है। साथ ही, ये जटिलम किस्म के कार्बोहाइड्रेट्स को तोड़ने, कुछ खास तरह के विटामिनों को संश्लेषित करने तथा नुकसानदायक बैक्टीरिया की जरूरत से ज्यादा बढ़त को भी रोकते हैं।
प्रोबायोटिक्स का संबंध इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा तंत्र) की बेहतरीन कार्यप्रणाली से है। इम्यून सिस्टम का एक बड़ा हिस्सा आंतों से संबद्ध होता है, यानी आंत में संतुलित माइक्रोबायोम, जो कि प्रोबायोटिक्स की मदद से सुनिश्चित होता है, शरीर की सुरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाते हैं। अध्ययनों से यह सामने आया है कि प्रोबायोटिक्स शरीर को संक्रमणों के जोखिम और उनकी अवधि को भी घटाते हैं, खासतौर से श्वसन तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को इससे फायदा मिलता है।
हाल के समय में शोध के नतीजों से आंत तथा मस्तिष्क के बीच एक ज़ोरदार संपर्क/संबंध का खुलासा हुआ है जिसे ‘गट-ब्रेन एक्सिस’ कहा जाता है। प्रोबायोटिक्स दरअसल, न्यूरोट्रांसमीटर्स और अन्य बायोएक्टिव कंपाउंड उत्पन्न कर हमारे मूड तथा मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ खास किस्म के प्रोबायोटिक्स स्ट्रेन्स का सेवन करने पर चिंता तथा अवसाद में भी कमी देखी गई है।
योगर्ट को प्रोबायोटिक से भरपूर फूड माना जाता है, लेकिन अन्य कई स्रोतों पर भी हमें ध्यान देने की जरूरत है। उदाहरण के लिए, खमीरी पदार्थों (फरमेंटेड) जैसे कांची, सॉरक्रॉट, केफिर तथा मिसो में भी कई तरह के प्रोबायोटिक स्ट्रेन्स मौजूद होते हैं। इसके अलावा, प्रोबायोटिक सप्लीमेंट अन्य कई रूपों में भी उपलब्ध होते हैं और इस तरह अलग-अलग लोगों को अपनी विशिष्ट स्वास्थ्य जरूरतों के मुताबिक इससे लाभ मिलता है।
हमें यह याद रखना चाहिए कि सभी प्रोबायोटिक्स के गुण एक समान नहीं होते, उनका प्रभाव उनमें मौजूद स्ट्रेन्स के मुताबिक बदलता है। अलग-अलग स्ट्रेन्स के फायदे भी अलग-अलग होते हैं। मसलन, लैक्टोबैसिलस तथा बाइफिडोबैक्टीरियम स्ट्रेन्स का संबंध आमतौर से पाचन संबंधी सेहत से जुड़ा है, जबकि ईस्ट के कुछ स्ट्रेन्स इररीटेबल बाउल सिंड्रोम (संवेदी आंत संबंधी बीमारी) के लक्षणों को कुछ घटा सकते हैं।
प्रीबायोटिक्स ऐसे यौगिक हैं जो कुछ खास किस्म के खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं और प्रोबायोटिक्स की बढ़त में मदद करते हैं। प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स के बीच एक प्रकार का सहजीवी (सिंबायोटिक) संबंध है, जिसमें प्रीबायोटिक्स वास्तव में, प्रोबायोटिक को पनपने में मददगार होता है। यह हमारी खुराक में प्रीबायोटिक से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे कि लहसुन, प्याज और केले आदि के महत्व को रेखांकित करता है।
जहां एक ओर प्रोबायोटिक्स से कई तरह के फायदे मिलते हैं, वहीं हमें इनके प्रयोग को लेकर कुछ सावधानी भी बरतने की जरूरत होती है, खासतौर से उन लोगों को इस बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए जो कमजोर इम्यून सिस्टम या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे होते हैं। अपनी खुराक में किसी भी नए सप्लीमेंट को शामिल करने या पोषण संबंध बदलाव से पहले हेल्थकेयर प्रोफेशनल से सलाह जरूर लें।
संक्षेप में, प्रोबायोटिक्स की दुनिया योगर्ट के संसार से कहीं ज्यादा विस्तृत है। ये सूक्ष्मजीव एक प्रकार के योद्धा होते हैं जो हमारे पाचन संबंधी स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली और यहां तक कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी अहम होते हैं। आप अपनी खुराक में खमीरी खाद्य पदार्थों (फरमेंटेड) या सप्लीमेंट्स को शामिल कर खानपान में तरह-तरह के प्रोबायोटिक स्रोतों को शामिल कर सकते हैं जो अधिक सेहतमंद और संतुलित जीवन का भरोसा है। जैसे-जैसे इस क्षेत्र में शोध के नतीजे सामने आ रहे हैं, प्रोबायोटिक्स की ताकत को स्वीकार कर स्वास्थ्य की दृष्टि से उनके महत्व को स्वीकार करना होगा।