प्रोबायोटिक का सेवन करने वाले बच्चों को एंटीबायोटिक की जरूरत कम पड़ती है, जानें क्यों

शोध में पाया कि जो बच्चे प्रोबायोटिक्स का सेवन करते थे उनमें एंटीबायोटिक इलाज की संभावना 29 प्रतिशत कम थी।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : September 15, 2018 6:24 PM IST

हाल ही में हुये एक शोध में यह पाया गया ही कि बच्चों को अगर प्रोबायोटिक्स दिया जाये तो उनको एंटीबायोटिक इलाज की आवश्यकता कम होती है। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि जो बच्चे प्रोबायोटिक्स का सेवन करते थे उनमें एंटीबायोटिक इलाज की संभावना 29 प्रतिशत कम थी। यह अध्ययन 12 एक ही तरह के शोध पर आधारित था। इस शोध को जब और गहनता के साथ देखा गया तो प्रोबायोटिक्स लेने वाले बच्चों में एंटीबायोटिक इलाज की 53 प्रतिशत संभावना कम पायी गयी।

प्रोबायोटिक क्या है 

प्रोबायोटिक आंत में पाये जाने वाले अच्छे बैक्टीरिया होते हैं। हामारे पाचनतंत्र को बेहतर रखने के लिए इनकी जरूरत होती है। ये बैक्टीरिया डायट को पचाने के साथ-साथ पोषक तत्वों को सोखने का काम करते हैं। प्रोबायोटिक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। अगर हमारे शरीर के आंत में कोई भी इंफेक्शन होता है तो वह बीमारी लेकर आता है। आंत का बेहतर रहना प्रोबायोटिक का सही से काम करने पर निर्भर है।

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प्रोबायोटिक के फायदे

प्रोबायोटिक का सबसे अहम फायदा तो यही है कि यह पाचनतंत्र को बेहतर रखता है। प्रोबायोटिक सेक्सुअल इंफेक्शन को भी ठीक करने में मददगार होते हैं। शरीर में अगर अच्छे बैक्टीरिया रहते हैं तो शरीर किसी एलर्जी का शिकार नहीं होता है। कुछ शोधों में यह कहा गया है कि प्रोबायोटिक का स्तर बेहतर रहने से कोलन कैंसर व स्तन कैंसर की संभावना कम हो जाती है।

प्रोबायोटिक के स्रोत 

प्रोबायोटिक का सबसे बेहतर स्रोत दही को माना जाता है। डेयरी उत्पाद जैसे दही, छाछ और खमीर में पर्याप्त मात्रा में प्रोबायोटिक पाये जाते हैं। सोया भी प्रोबायोटिक का अच्छा स्रोत माना जाता है। आजकल बाजार में भी कई तरह के प्रोबायोटिक उत्पाद मिलने लगे हैं। अगर आप भी कोई एंटीबायोटिक्स दवा का कोर्स कर चुके हों तो इनका सेवन जरूर करना चाहिए।

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