सीनियर सिटीजन पेशेंट के खतरनाक स्थिति है एक्‍यूट कोरोनरी सिंड्रोम, एक्‍सपर्ट से जानिए हृदय से जुड़ी इस बीमारी का उपचार

Acute Coronary Syndrome: बुजुर्गों को हाई ब्‍लड प्रेशर वाले कारकों के साथ एक्‍यूट कोरोनरी सिंड्रोम को रोकने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।

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Written By: Atul Modi | Published : February 10, 2021 4:51 PM IST

विभिन्‍न अध्‍ययनों के मुताबिक, दुनियाभर में तेजी से एक्‍यूट कोरोनरी सिंड्रोम (Acute Coronary Syndrome) विकसित करने वाली आबादी में सीनियर सिटीजन पेशेंट का हिस्‍सा तेजी से बढ़ रहा है। एसीएस के लिए दो सबसे आम जोखिम कारक हाई ब्‍लड प्रेशर (38%) और डायबिटीज (30%) है। इस स्थिति से बचने और इसे रोकने के तरीकों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समय की आवश्यकता है।

एक्‍यूट कोरोनरी सिंड्रोम अलग-अलग स्थितियों का एक समूह है, जिसका उपयोग लक्षणों के लिए किया जाता है जो दर्शाता है कि व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ रहा है या सीने में तेज दर्द हो रहा है। विशेष रूप से बुजुर्ग रोगियों के मामले में, मुख्य जोखिम कारकों को मैनेज करना महत्वपूर्ण है।

एक्‍यूट कोरोनरी सिंड्रोम क्‍या है?

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के एसोसिएट डायरेक्टर- कार्डियोलॉजी डॉ. चंद्रशेखर का कहना है कि "एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। इसमें दिल का दौरा और साथ ही अस्थिर एंजाइना शामिल हो सकते हैं। एथेरोस्क्लेरोसिस वाले लोगों में कठिनाईयां अधिक होती है। इसमें एक ऐसी स्थिति बनती है जिसमें प्‍लाक धमनियों की दीवारों पर बनती है। इस दौरान कुछ लक्षण हैं, जिन पर ध्यान देने की आवश्‍यकता होती है, जैसे- सीने में दबाव, आराम करते समय या हल्की गतिविधि के दौरान अचानक दिल के कार्यों का रुकना शामिल है। स्थितियों को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए समय-समय पर जांच और उपचार अनिवार्य है। बुजुर्गों की कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली को देखते हुए शुरुआत में निवारक उपाय करना चाहिए। Vitals नब्ज पर भी नजर रखनी चाहिए है। यह वर्तमान महामारी की स्थिति में अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।"

डॉ. चंद्रशेखर कहते हैं कि, "एक्‍यूट कोरोनरी सिंड्रोम का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम या इमेजिंग और ब्‍लड टेस्‍ट की मदद ली जाती है। एक्‍यूट कोरोनरी सिंड्रोम के मामले में किसी भी अन्य समस्‍याओं से बचने के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। दवा और सर्जरी अक्सर एसीएस वाले लोगों में उपचार के अंतिम उपाय होते हैं। हालांकि पहले जीवन शैली में परिवर्तन करने की आवश्‍यकता होती है।

एक्‍यूट कोरोनरी सिंड्रोम के उपचार के लिए बैलून एंजियोप्लास्टी, रीपरफ्यूजन थेरेपी, फाइब्रिनोलिटिक एजेंट या एंजियोप्लास्टी के माध्यम से किया जा सकता है। लक्षणों की शुरुआत के 12 घंटे के भीतर एक बड़े दिल के दौरे के साथ सभी रोगियों में एंजियोप्लास्टी पसंदीदा उपचार है। इस उपचार तकनीक में रोग के निदान के 120 मिनट के भीतर उपचार प्रदान किया जाना जरूरी होता है। यह हृदय से जुड़ी कई समस्‍याओं के लिए बेहतर होता है।

हृदय को स्वस्थ रखने के कुछ उपाय

  • हाइड्रोजनीकृत तेलों या वनस्पती घी में पाए जाने वाले ट्रांस फैट का सेवन कम करें। वे अच्छे एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और खराब एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं। अधिकांश रेस्तरां और होटलों में भोजन से जितना संभव हो उतना बाहर खाने से बचें, इसमें उच्च मात्रा में ट्रांस फैट होती है।
  • रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे ब्रेड, पास्ता या यहां तक कि सफेद चीनी से बचें। इसके बदले साबुत अनाज के आटे, हरी सब्जियां, अनाज और दलिया जैसे विकल्पों का चुनाव करें।
  • एक दिन में कम से कम 6 ग्राम सोडियम क्लोराइड युक्त सोडियम युक्त आहार का सेवन करें।
  • दिन में कम से कम 30 मिनट नियमित व्यायाम करें, क्योंकि इससे दिल को कई फायदे मिलते हैं।
  • धूम्रपान छोड़ें और सीमित मात्रा में शराब का सेवन करें।
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