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Menopause की समस्या से निपटने के लिए रहें तैयार, हो सकती हैं हड्डियां कमजोर

करीब 4 फीसदी महिलाओं को मेनोपॉज 29 से 34 साल की उम्र में हो जाता है। वहीं जीवनशैली में बदलाव के कारण 35 से 39 साल के बीच की महिलाओं का आंकड़ा 8 फीसदी है।

Written by Anshumala |Published : May 24, 2018 1:06 PM IST

जब कोई लड़की किशोरावस्था की ओर कदम बढ़ाती है, तो वह खुद में बॉयोलोजिकल, हार्मोनल और मनोवैज्ञानिक बदलाव महसूस करती है। पीरियड्स और शारीरिक बदलाव होना हर महिला के जीवन में महत्वपूर्ण है। इसी तरह से महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज भी अहम है। इससे महिला को पीरियड्स के दौरान होने वाले मूड में बदलाव और सिर व पेट दर्द जैसे लक्षणों से छुटकारा मिलता है, लेकिन इसी के साथ हड्डियों से संबंधित परेशानियां भी बढ़ने लगती हैं।

कम उम्र में मेनोपॉज

आमतौर पर महिलाओं को मेनोपॉज 45 से 55 की उम्र में होता है, लेकिन हाल ही में 'द इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकनोमिक चेंज' के सर्वे से पता चला है कि करीब 4 फीसदी महिलाओं को मेनोपॉज 29 से 34 साल की उम्र में हो जाता है। वही जीवनशैली में बदलाव के चलते 35 से 39 साल के बीच की महिलाओं का आंकड़ा 8 फीसदी है।

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मेनोपॉज और एस्ट्रोजन लेवल

मेनोपॉज और हड्डी के बीच के संबंध को विस्तार से बताते हुए वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. जतिन तलवार कहते हैं, "एस्ट्रोजन हार्मोन पुरुषों और महिलाओं दोनों में पाया जाता है। यह हड्डियों को बनाने वाले ऑस्टियोब्लास्ट कोशिकाओं की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मेनोपॉज के दौरान महिलाओं का एस्ट्रोजन स्तर गिर जाता है, जिससे ऑस्टियोब्लास्ट कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। इससे पुरुषों की तुलना में महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती है। कम एस्ट्रोजन से शरीर में कैल्शियम सोखने की क्षमता कम हो जाती है। परिणामस्वरूप हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। इससे महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोअर्थराइटिस जैसी हड्डियों से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।"

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क्या है जल्द मेनोपॉज होने की वजह

आमतौर पर जल्द मेनोपॉज होने का कारण धूम्रपान, पहले से मौजूद थायरॉयड, कीमोथेरेपी और गंभीर पेल्विक सर्जरी हो सकती है। इस बारे में पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीएसआरआई) हॉस्पिटल के चीफ नी एंड हिप रिप्लेसमेंट और अथ्रोस्कोपी (Arthroscopy) डॉ. गौरव पी. भारद्वाज का कहना है, "ज्यादातर समय घर या ऑफिस में बैठे रहने, एक्सरसाइज या फिजिकल काम न करने, वजन बढ़ने और कैल्शियम की कमी, ऑस्टियोअर्थराइटिस के रिस्क को बढ़ा देती है। जोड़ों के आसपास दर्द, अकड़न और सूजन और कभी-कभी जोड़ों का गर्म होना, मेनोपॉज के दौरान जोड़ों के दर्द के खास लक्षण हैं। यह लक्षण सुबह के समय ज्यादा गंभीर होते हैं और फिर धीरे-धीरे कम हो जाते है।"

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ऑस्टियोअर्थराइटिस का इलाज

विभिन्न अनुसंधानों से पता चला है कि ऑस्टियोअर्थराइटिस पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होता है। मेनोपॉज के बाद हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेने के बावजूद इसका रिस्क ज्यादा बढ़ जाता है। हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी में प्राकृतिक रूप से खत्म होते एस्ट्रोजन की कमी को दवाइयों के जरिए पूरा किया जाता है। डॉ. तलवार कहते हैं, "गंभीर अर्थराइटिस में रोगी के लिए चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में क्षतिग्रस्त जोड़ों को बदलना ही बेहतर विकल्प रहता है।"

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इलाज से बेहतर है रोकथाम

महिलाओं और पुरुषों दोनों में उम्र के साथ हार्मोन में बदलाव होता है। महिलाओं में जहां मेनोपॉज होता है, तो पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन कम होने लगता है। महिलाओं में हड्डियों की क्षति का स्तर औसतन 2-3 फीसदी प्रति वर्ष होता है, जबकि पुरुषों में हार्मोन फेज के बाद हड्डियों की क्षति का स्तर सिर्फ 0.4 फीसदी होता है। जोड़ों की बीमारियों से बचने के लिए डॉ. भारद्वाज कहते हैं, "हालांकि इस नुकसान को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन एंटी-ऑस्टियोपोरेटिक ट्रीटमेंट रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद से इसके स्तर को कम किया जा सकता है। साथ ही नियमित एक्सरसाइज, वजन कम करना, प्रोटीन व कैल्शियम युक्त आहार लेना, कैफीन से परहेज और चाय एवं सोडे वाले ड्रिंक कम लेने से जोड़ों को सेहतमंद रखा जा सकता है।"

स्रोत:IANS Hindi.

चित्रस्रोत- Shutterstock Images.

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