
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : February 9, 2021 10:13 PM IST
Premenstrual Syndrome : महिलाओं के जीवन के हर महीने के 5-7 दिन पीरियड्स में गुज़रते हैं। यह वह समय है जब शरीर में हार्मोंन्स का स्तर बहुत ही नाटकीय तरीके से बदलता है। महिलाएं कई प्रकार की तकलीफें झेलते हुए ये दिन बिताती हैं। पीरियड्स यानि माहवारी से जुड़ी एक ऐसी ही समस्या है पीएमएस (PMS) जिसके बारे में अब लोग खुलकर बातें करने लगे हैं।
प्री मेंस्ट्रुएशन सिंड्रोम (PreMenstrual Syndrome) दुनियाभर में लाखों महिलाओं को महसूस होने वाली एक समस्या है। वैसे तो यह कोई नयी समस्या नहीं है लेकिन अब लोगों ने इसे गम्भीरता से लेना शुरू किया है। पीएमएस की समस्या पीरियड्स शुरू होने से 8-10 दिनों पहले से ही महसूस होने लगती है। पीएमएस का महिलाओं की मानसिक और शारीरिक सेहत पर असर साफ दिखायी देता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार हर लड़की या महिला को पीएमएस के दौरान अलग-अलग प्रकार के लक्षण दिखायी देते हैं।
हर माह पीएमएस के संकेत मेंस्ट्रुअल साइकल के उन्हीं दिनों में होते हैं। पीएमएस का असली कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। ऐसा माना जाता है कि ये हार्मोनल असंतुलन की वजह से होता है, परंतु इस संतुलन का सही कारण कोई नहीं जानता। आमतौर पर बच्चे का जन्म, गर्भपात जैसी स्थितियों में महिलाओ के शरीर में हार्मोन्स के स्तर में बहुत अधिक अंतर आ जाते हैं। हार्मोन्स के इस असंतुलन को पीएमएस की एक वजह माना जाता है। इसके अलावा,ये भी सकती हैं पीएमएस की वजहें-
आमतौर पर PMS के लक्षण बहुत गम्भीर या नुकसानदायक नहीं होते। जर्नल अमेरिकन फैमिली फिजिशियन (journal American Family Physician) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 80 प्रतिशत महिलाओं को पीएमएस के ऐसे लक्षण महसूस होते हैं, जिससे उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कोई बड़ी अड़तन नहीं आती। लेकिन, 32 प्रतिशत महिलाओं को मध्यम से गम्भीर लक्षण महसूस होते हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, सभी महिलाओं को अलग-अलग परेशानियां महसूस होती हैं। वहीं, कई महिलाओं को हर महीने लक्षण भी अलग-अलग महसूस होते हैं। ये समस्याएं हो सकती हैं पीएमएस के लक्षण-
जब महिलाओं को मूड स्विंग या आत्महत्या के विचार बार-बार आते हैं तो ऐसी स्थिति में उन्हें अपने डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए। पीएमएस के साथ डायरिया, एनिमिया, क्रोनिक फटिग सिंड्रोम और एंड्रोमेट्रिसॉसिस जैसी समस्याओं का खतरा भी उत्पन्न हो जाता है। इसीलिए, डॉक्टर से सलाह-विमर्श कर इसका समय पर इलाज कराएं। इसके साथ ही आप अपने स्तर पर ये उपाय अपना सकती हैं। (PMS Treatment and Home Remedies)
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