
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : January 12, 2026 2:30 PM IST
Medically Verified By: Dr. Himika Chawla
premature graying of hair due to thyroid vitiligo: तनाव, खराब लाइफस्टाइल, खानपान में पोषण की कमी से बाल सफेद होने के बारे में तो आपने सुना ही होगा। लेकिन आपके बालों के कम उम्र में सफेद होने के पीछे थायराइड, विटिलिगो और एलोपेसिया जैसी बीमारी भी हो सकती है। थायराइड व विटिलिगो जैसी बीमारी शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा करती है, जिससे बाल कम उम्र में ही सफेद हो सकते हैं। आइए डॉ. हिमिका चावला से जानते हैं इन बीमारियों के कारण बाल सफेद क्यों हो जाते हैं और इससे बचाव के लिए हमें क्या करना चाहिए।
कम उम्र में सफेद बाल क्यों होते हैं ये जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि बालों का रंग आता कहां से है। डॉ. हिमिका चावला का कहना है कि मेलानिन (Melanin) नामक पिगमेंट से बालों का रंग काला होता है। यह पिगमेंट मेलानोसाइट्स (Melanocytes) कोशिकाओं का निर्माण करता है। उम्र, खानपान या किसी बीमारी के कारण जब हमारे शरीर में मेलानोसाइट्स कम हो जाती हैं या मेलानिन बनना बंद हो जाता है, तो बाल सफेद या ग्रे होने लगते हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि किसी पुरुष के बाल 25 साल से कम उम्र और महिलाओं के बाल 30 साल की उम्र से पहले सफेद हो रहे हैं, तो इसे Premature Graying कहा जाता है। Premature Graying of Hair सिर्फ खराब तेल, शैंपू या अन्य हेयर केयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने की वजह से नहीं होते हैं, बल्कि कई बार शरीर के अंदर चल रही बीमारी का संकेत भी हो सकता है। आमतौर पर थायराइड, विटिलिगो और एलोपेसिया जैसी बीमारियों के कारण कम उम्र में सफेद बालों की समस्या देखी जाती है। आइए जानते हैं बीमारियों और सफेद बालों की समस्या के बीच क्या कनेक्शन है, ये जानते हैं।
डॉ.हिमिका बताती हैं अक्सर लोगों को लगता है कि थायराइड और सफेद बालों के बीच कोई कनेक्शन नहीं होगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। थायराइड ग्रंथि हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोन संतुलन को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि सही से काम नहीं करती, तो इसका सीधा असर हमारे बालों की सेहत और उनके रंगों पर पड़ता है।
हमारे बालों का रंग मेलानिन (Melanin) नामक पिगमेंट के कारण होता है। थायराइड हार्मोन (T3 और T4) बालों के रोम (hair follicles) में मौजूद मेलेनिन के उत्पादन को प्रभावित करते हैं। जब शरीर में थायराइड हार्मोन कम (Hypothyroidism)या ज्यादा (Hyperthyroidism) हो जाते हैं, तो मेलेनिन बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे बाल समय से पहले सफेद होने लगते हैं।
जब किसी व्यक्ति को विटिलिगो जैसी बीमारी होती है तो उसके बाल कम उम्र में ही सफेद होने लगते हैं। विटिलिगो में शरीर से मेलानोसाइट्स पूरी तरह खत्म हो जाती हैं इसलिए वहां न मेलानिन बनता है। जिसके कारण बालों को रंग नहीं मिल पाता है। इसकी वजह से सिर के बाल, दाढ़ी और भौंहें भी सफेद होने लगते हैं। विटिलिगो के कारण बाल सफेद होने की समस्या को मेडिकल टर्म में Leukotrichia कहा जाता है। अक्सर विटिलिगो के दागों के साथ-साथ बालों का गुच्छा सफेद होना इसकी शुरुआती पहचान हो सकता है। विटिलिगो के कारण बाल सफेद होने की समस्या उम्र के साथ-साथ जेनेटिक्स के कारण भी हो सकती है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर छपी रिपोर्ट के अनुसार, एलोपेसिया का मतलब है बालों का असामान्य रूप से झड़ना। एलोपेसिया एरीटा (Alopecia Areata) एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का रक्षा तंत्र (Immune System) गलती से बालों की जड़ों (Hair Follicles) पर हमला कर देता है। ये हमला अक्सर उन बालों पर अधिक होता है जिनमें मेलानिन (पिगमेंट) अधिक होता है। यही कारण है कि एलोपेसिया में अक्सर काले बाल पहले झड़ते हैं, जबकि सफेद बालों को इम्यून सिस्टम छोड़ देता है।
एलोपेसिया के इलाज के बाद जब बाल दोबारा उगना शुरू होते हैं, तो वे अक्सर शुरुआत में पूरी तरह सफेद या रंगहीन होते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बालों की जड़ों में रंग बनाने वाली कोशिकाएं (Melanocytes) सुप्त अवस्था में होती हैं या धीरे काम करती हैं। इस स्थिति को मेडिकल टर्म में 'ल्यूकोट्रिचिया' या 'पोलियोसिस' भी कहा जाता है।
इन बीमारियों के कारण कम उम्र में बाल सफेद होने की समस्या होना आम बात है। इस स्थिति में डॉक्टर से बात करें और अपनी बीमारी के हिसाब से दवाओं का सेवन करना चाहिए।
किसी भी कारण चाहे वो बीमारी हो, खानपान या लाइफस्टाइल की वजह से अगर आपके बाल कम उम्र में सफेद हो रहे हैं, तो आपको कुछ मेडिकल टेस्ट जरूर करवाने चाहिए।
इन टेस्ट के जरिए कम उम्र में बालों के सफेद होने की पूरी जानकारी आपको मिल सकती है। इससे सफेद बालों का इलाज करना आपके लिए आसान हो सकता है। डॉ. हिमिका चावला का कहना है कि कम उम्र में बालों के सफेद होने की समस्या के मामले में हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही इलाज करवाना चाहिए। बिना डॉक्टरी सलाह या घरेलू नुस्खों से बालों को काला करने से बचना चाहिए।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।