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गर्भावस्था और हेपेटाइटिस: अपने शिशु को हेपेटाइटिस की समस्याओं से कैसे बचाएं?

गर्भावस्था और हेपेटाइटिस: अपने शिशु को हेपेटाइटिस की समस्याओं से कैसे बचाएं?

अधिकांश डॉक्टर सलाह देते हैं कि बच्चों को 18 महीने की उम्र के बाद हेपेटाइटिस का परीक्षण कराया जाना चाहिए क्योंकि नवजात शिशु अपनी मां से हेपेटाइटिस वायरस के संपर्क में आ सकता है।

Written by Atul Modi |Published : December 1, 2023 5:20 PM IST

हेपेटाइटिस लिवर से संबंधित एक बीमारी है और यह हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई नामक वायरस के कारण होता है। यदि आप गर्भवती हैं और आपक हेपेटाइटिस बाधित हो, तो आपके पेट में पल रहा बच्चा भी उससे संक्रमित हो सकता है। हालाँकि, कुछ अपवाद छोड़ दिया जाए तो, गर्भवती महिला या उसके होने वाले बच्चे को हेपेटाइटिस संक्रमण की संभावना कम होती है। लेकिन फिर भी हेपेटाइटिस की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हेपेटाइटिस B बच्चों को कैसे प्रभावित करता है?

हेपेटाइटिस B यह यकृत संक्रमण की एक गंभीर समस्या है, क्योंकि अधिकांश लोगों में समस्या होने तक कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए इस स्थिति को "मूक महामारी" के नाम से जाना जाता है।

इस प्रकार, एक संक्रमित व्यक्ति अपने संपर्क में आनेवाले सभी लोगों को अपने चपेट में ले सकता है।

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गर्भावस्था के दौरान हेपेटाइटिस B गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इसका संक्रमण मां से बच्चे में फैलने की संभावना अधिक होती है। हेपेटाइटिस B विशेष रूप से प्रसव के दौरान बच्चे में फैलने की संभावना होती है।

अध्ययनों से यह पता चला है, कि हेपेटाइटिस बी से पीड़ित 10 में से 9 महिलाएं अपने बच्चों को यह समस्या संक्रमित करती हैं।

हेपेटाइटिस बी विषाणू के संक्रमण से शिशुओं में दीर्घकालिक और गंभीर समस्याएं पैदा होने की 90% संभावना होती है। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए तो लिव्हर संबंधी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

हेपेटाइटिस B परीक्षण

हर गर्भवती महिला को प्रसव से पहले हेपेटाइटिस B रक्त परीक्षण करवा लेना चाहिए। यदि हेपेटाइटिस बी का निदान हो जाता है, तो डॉक्टर माँ से बच्चे में होनेवाले संक्रमण को रोकने के लिए हेपेटाइटिस के इंजेक्शन शुरू करते है।

हेपेटाइटिस B का वायरस अत्यधिक संक्रामक है, इसलिए यह संक्रमित व्यक्ति के वीर्य, रक्त या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क से दूसरों में फैल सकता है। इसलिए, पिता और परिवार के अन्य सदस्यों का भी हेपेटाइटिस B के लिए परीक्षण और टीकाकरण कर लेना जरूरी है।

नवजात शिशु को हेपेटाइटिस B की समस्या से कैसे बचाएं?

  • जन्म के 12 घंटों के भीतर, आपके बच्चे को हेपेटाइटिस बी वैक्सीन की पहली खुराक और HBIG (हेपेटाइटिस बी इम्यून ग्लोब्युलिन) का एक शॉट मिलना चाहिए। HBIG शॉट जन्म के तुरंत बाद आपके बच्चे की वायरस से लड़ने की क्षमता को बढ़ा देता है।
  • जिन शिशुओं की माताए गर्भावस्था के दरम्यान हेपेटाइटिस बी संक्रमण से प्रभावित हो चुकी है, उन्ह शिशुओंको यह टीका मिलना जरूरी चाहिए। जब वैक्सीन और एचबीआईजी खुराक को मिला दिया जाता है, तो नवजात शिशु में वायरस के संचारित होने की संभावना कम होती है।
  • संक्रमण को रोकने के लिए, आपके बच्चे को हेपेटाइटिस बी के सभी टीके अवश्य मिलने चाहिए। आपके बच्चे के वजन और टीके के प्रकार के आधार पर, कुछ महीनों के अंतराल पर तीन से चार खुराकें दी जाती हैं।
  • आपके बच्चे को पहला टीका जन्म के समय, दूसरा टीका एक या दो महीने में और आखिरी टीका छह महीने में लगेगा। अपने डॉक्टर से पता लगाए, के शिशु को शॉट्स के लिए अब कब वापस लाना चाहिए।
  • शिशु के सभी टीके लग जाने के बाद, उसे जांच के लिए बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाएं। रक्त परीक्षण से पता चलेगा कि आपका बच्चा हेपेटाइटिस बी से सुरक्षित है या नहीं।
  • आमतौर पर, टीका पूरा होने के दो महीने बाद रक्त परीक्षण किया जाता है। यह ध्यान रखे, रक्त परीक्षण करते वक्त शिशु नौ महीने का होना चाहिए।

टीकाकरण के बाद स्तनपान

  • स्तनपान से आपका बच्चा वायरस के संपर्क में नहीं आता है। यदि आपके बच्चे को जन्म के 12 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस बी वैक्सीन या एचबीआईजी का पहला शॉट मिला है, तो स्तनपान पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
  • यदि आपके स्तनों में खुले घाव हैं या निपल्स पर क्रेक आए हुए हैं, तो अपने डॉक्टर से पूछें कि क्या आपको स्तनपान कराना चाहिए या नही।

खुद का रखे ख्याल

आपको अपने लिव्हर के वर्तमान स्थिति का निरीक्षण करना और उपचार की आवश्यकता निर्धारित करने के लिए आगे के परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है। जबकि एंटीवायरल दवाएं हेपेटाइटिस बी के इलाज में मदद कर सकती हैं, गर्भावस्था के दौरान कोई भी OTC दवाईयॉ और विटामिन पूरक सप्लीमेंट लेने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श कर ले, क्योंकि कुछ दवाएं भ्रूण को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं।

हेपेटाइटिस C शिशु को कैसे प्रभावित करता है?

  • आप रक्त या संक्रमित सुइयों के संपर्क में आने या दूषित भोजन खाने से इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। अधिकांश लोगों को यह सुइयों या अन्य इंजेक्शन लगाने वाले उपकरणों को साझा करने से मिलता है।
  • हेपेटाइटिस सी से पीड़ित लगभग 20 में से 1 मां के नवजात शिशुओं में यह वायरस पहुंच जाएगा। यह गर्भाशय में, प्रसव के दौरान या जन्म के बाद हो सकता है।
  • यह बीमारी आमतौर पर प्रसव से पहले बच्चे को प्रभावित नहीं करती है। हेपेटाइटिस सी स्तन के दूध के माध्यम से शिशुओं में नहीं फैलता है, लेकिन यदि आपके निपल्स फट गए हैं या खून बह रहा है, तो अपने डॉक्टर से परामर्श लें क्योंकि संक्रमण रक्त के माध्यम से फैलता है।

हेपेटाइटिस C परीक्षण और उपचार

अधिकांश डॉक्टर सलाह देते हैं कि बच्चों को 18 महीने की उम्र के बाद हेपेटाइटिस का परीक्षण कराया जाना चाहिए क्योंकि नवजात शिशु अपनी मां से हेपेटाइटिस वायरस के संपर्क में आ सकता है।

क्या करना चाहिए?

  • गर्भावस्था के दौरान, डॉक्टर नियमित रूप से हेपेटाइटिस की जाँच नहीं करते हैं। लेकिन अगर आपको कोई संदेह है तो उसे डॉक्टर से दूर कर लें। उदाहरण के लिए, हेपेटाइटिस की दवाओं का उपयोग करना या हेपेटाइटिस से संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाना।
  • हेपेटाइटिस का कोई लक्षण नहीं होता है, इसलिए चाहे आप खुद को कितना भी फिट समझें, जांच करवाएं। हेपेटाइटिस पांच में से चार लोगों को प्रभावित करता है, फिर भी चार में कोई लक्षण नहीं होते हैं।
  • जब आप गर्भवती हों तो डॉक्टर आपके हेपेटाइटिस का इलाज नहीं कर सकते क्योंकि दवाएं जन्म दोष पैदा कर सकती हैं।

गर्भावस्था के दौरान हेपेटाइटिस से निपटने का सबसे आसान तरीका इसे पूरी तरह से रोकना है। हालाँकि सभी प्रकार के हेपेटाइटिस को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन हेपेटाइटिस A और B के लिए सुरक्षित और प्रभावी टीके उपलब्ध हैं। हेपेटाइटिस C के लिए एक प्रभावी उपचार भी है, जो गर्भावस्था की योजना बनाने से पहले माँ और बच्चे दोनों को इस संक्रमण से बचा सकता है। कुछ मामलों में, उपचार के कई विकल्प उपलब्ध हैं, और उचित निगरानी और सावधानियों के साथ, आप स्वयं संक्रमण को रोक सकते हैं। यह आपके डॉक्टर को आपके या आपके होने वाले बच्चे के लिए किसी भी संभावित स्वास्थ्य जोखिम की निगरानी करने में मदद कर सकता है।

(Inputs: Dr Hrishikesh Pai, Consultant Gynaecologist & Infertility specialist Lilavati Hospital, Mumbai)