Prediabetes: इन लोगों को डायबिटीज होने का सबसे ज्यादा खतरा, एक्सपर्ट ने बताया कैसे करें बचाव

Prediabetes treatment: जिन लोगों में डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है, उस बीमारी को प्री डायबिटीज या बॉर्डरलाइन डायबिटीज कहा जाता है। अनुभवी डॉक्टर से जानें क्या है प्रीडायबिटीज और इसके खतरे को कैसे कम किया जा सकता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : March 2, 2023 4:12 PM IST

डायबिटीज के मामले हमारे देश में तेजी से बढ़ रहे हैं। दरअसल, यह बीमारी हमारी लाइफस्टाइल से जुड़ी है और आजकल खराब हो रही लाइफस्टाइल के कारण स्वस्थ लोगों के बीच भी इसके मामले तेजी से बढ़ते हुए दिख रहे हैं। लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनमें अन्य की तुलना में डायबिटीज होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। मेडिकल भाषा में इन लोगों को प्रीडायबिटिक या बॉर्डरलाइन डायबिटीज कहा जाता है। इन लोगों को अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है और न करने पर उन्हें डायबिटीज हो सकता है। प्रीडायबिटिक को समय-समय पर डॉक्टर की सलाह की जरूरत होती है। वैशाली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में एंडोक्राइनोलॉजी व डायबिटीज की स्पेशलिस्ट और कंसल्टेंट ऐश्वर्या कृष्णमूर्ति ने प्रीडायबिटिक यानी बॉर्डरलाइन डायबिटीज के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। डॉक्टर ऐश्वर्या के अनुसार प्रीडायबिटीज या बॉर्डरलाइन डायबिटीज मेलिटस का मतलब है कि आपके ब्लड में शुगर लेवल बढ़ गया है लेकिन इतना भी नहीं बढ़ा है कि डायबिटीज विकसित हो सके।

डायबिटीज होने का ज्यादा खतरा

डॉक्टर ऐश्वर्या के अनुसार इस प्रीडायबिटीज एक गंभीर स्थिति है, जो संकेत देती है कि आपको भविष्य में डायबिटीज होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। प्रीडायबिटीज बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि कई बार इससे किसी प्रकार के लक्षण नहीं हो पाते हैं और ग्रसित व्यक्ति को तब तक पता नहीं चल पाता जब तक वह किसी अन्य कारण से टेस्ट नहीं करवा लेता। आईसीएमआर की एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 10 प्रतिशत लोगों को प्री-डायबिटीज की समस्या है।

इन लोगों को ज्यादा खतरा

डॉक्टर ऐश्वर्या कृष्णमूर्ति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रीडायबिटीज को सिर्फ इसलिए खतरनाक नहीं माना जाता है क्योंकि इससे डायबिटीज विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, बल्कि प्रीडायबिटिक लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याएं होने का खतरा भी बढ़ जाता है। डॉक्टर ऐश्वर्या के अनुसार जिन लोगों के शरीर का वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ गया है या फिर जो लोग पूरी तरह से मोटापे के शिकार हैं, उन्हें प्री-डायबिटीज की समस्या जल्दी हो सकती है। इसके अलावा जिन लोगों के शरीर में पहले किसी को डायबिटीज है या फिर जिन लोगों का लाइफस्टाइल खराब है, उन्हें भी प्रीडायबिटीज होने के खतरा ज्यादा रहता है।

प्रीडायबिटीज की रोकथाम संभव

डॉक्टर ऐश्वर्या ने आगे बताया कि सबसे अच्छी बात यह है कि प्रीडायिटीज की रोकथाम करना संभव है और डायबिटीज विकसित होने से भी इसकी रोकथाम की जा सकती है। दवाओं को कुछ सामान्य सावधानियों का पालन करके प्रीडायबिटीज की रोकथाम की जा सकती है। ये सावधानियां इस प्रकार हैं -

  • शरीर का वजन कम करें - आपके शरीर के कुल वजन का 5 से 7 प्रतिशत वजन कम करना प्री डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। उदाहरण के लिए यदि आपका वजन 70 किलो है, तो 3 से 5 किलो के बीच वजन कम करना प्रीडायबिटीज की रोकथाम करने में काफी अहम भूमिका निभा सकता है।
  • रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी - अपने डेली रूटीन में एक्सरसाइज जरूर शामिल करें। हर हफ्ते में कम से कम 5 दिन रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करने से प्रीडायबिटीज होने का खतरा कम हो सकता है। साथ ही लिफ्ट की जगह पर सीढ़ियां लेना, थोड़ा बहुत चलने के लिए गाड़ी या बाइक का इस्तेमाल न करना आदि भी आपके फिजिकल एक्टिविटी प्लान में मदद करेगा।
  • डाइट की हैबिट में सुधार - प्रीायबिटीज की रोकथाम करने के लिए अपनी डाइट में भी कुछ सुधार किया जा सकता है जैसे हेल्दी खाना लें, बाहर का खाना या तले हुए फूड्स की जगह पर ड्राई फ्रूट्स जैसे स्नैक्स लें। डाइट में हाई फाइबर व अन्य न्यूट्रिएंट्स वाले फूड्स को शामिल करें।
  • शराब व सिगरेट बंद करें - जितना हो सके शराब के सेवन को कम कर दें और धूम्रपान का सेवन करना भी छोड़ दें। इन आदतों को छोड़ने के लिए आप डॉक्टर या किसी एक्सपर्ट से भी संपर्क कर सकते हैं।
  • समय पर लें दवाएं - प्रीडायबिटीज से ग्रस्त लोगों के लिए डॉक्टर कुछ दवाएं भी दे सकते हैं, जिन्हें समय पर लेना बहुत जरूरी है। ये दवाएं प्रीडायबिटीज पर कंट्रोल पाने के साथ-साथ आपको डायबिटीज कंट्रोल करने में भी मदद करेंगी।

डॉक्टर ऐश्वर्या कृष्णमूर्ति के अनुसार प्रीडायबिटीज को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए, सही इलाज और सावधानियों की मदद से इसकी पूरी तरह से रोकथाम और जड़ से इलाज किया जा सकता है।

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