अस्थमा पंप लेने वाले बच्चे खेलते वक्त रखें इन 4 बातों का ध्यान! जानें कौन सा इनहेलर पास रखने से कम होगा खतरा

इस मौसम में प्रदूषण, शुष्क हवा और व्यायाम की कमी के कारण भी खतरा अधिक बढ़ जाता है, वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा का खतरा भी अधिक हो जाता है और अस्थमा से पीड़ित बच्चों के लिए तो और भी समस्याएं बढ़ जाती हैं।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : January 30, 2023 3:16 PM IST

सर्दी के मौसम में कई प्रकार की श्वसन से संबंधित समस्याएं पैदा हो जाती हैं और इस मौसम में अस्थमा, निमोनिया और वायरल संक्रमण जैसी समस्याओं का खतरा बहुत हद तक बढ़ जाता है। खासकर अगर आपका बच्चा अस्थमा से पीड़ित है तो उसके लिए यह मौसम अधिक खतरनाक होता है, क्योंकि वायरल संक्रमण अस्थमा के हमले को और तेज कर देता है। मुंबई के हाजी अली स्थित SRCC चिल्ड्रन हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी विभाग की सीनियर कंसलटेंट डॉ. इंदु खोसला का कहना है कि इस मौसम में प्रदूषण, शुष्क हवा और व्यायाम की कमी के कारण भी खतरा अधिक बढ़ जाता है, वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा का खतरा भी अधिक हो जाता है और अस्थमा से पीड़ित बच्चों के लिए तो और भी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसलिए बच्चों को लेकर इस मौसम में बहुत ही सतर्क रहने की आवश्यकता है, खासकर अस्थमा जैसे रोगों के लक्षणों पर ध्यान देना और उसके लिए बच्चों में सुरक्षा कवच तैयार करना बहुत जरूरी है।

बच्चों के लिए इलाज

डॉ. इंदु बताती हैं कि इनहेलेशन थेरेपी अस्थमा के उपचार व रोकथाम हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें दवाएं सीधे सांस के द्वारा फेफड़ों में जाती हैं, और उसका असर तीव्र गति से होता है। इस थेरेपी में साइड इफेक्ट की संभावना बहुत कम हो जाती है। यह देखा गया है की श्वसन संबंधित समस्याओं के लिए सूंघने वाली दवाएं अत्यधिक कारगर सिद्ध होती है। इन्हेलर दो प्रकार के होते हैं, रिलीवर और कंट्रोलर जो अस्थमा होने पर राहत देने का कार्य करते हैं, इनके द्वारा अस्थमा रोगियों के लिए खांसी और सांस फूलने जैसे लक्षण को कम करने में मदद मिलती है।

अस्थमा से ग्रसित बच्चों के लिए सुझाव:

1-जिन बच्चों को अस्थमा है उन्हें कुछ महत्वपूर्ण बातों का खास ध्यान रखना चाहिए-

1- रिलीवर इनहेलर को हमेशा अपने साथ ही रखें जिससे इसके लक्षण विकसित होने पर ही इसे तुरंत लिया जा सके।

2- खेल खेलने से पहले ठीक से वार्म-अप करना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, इससे शरीर को बाद में दिक्कत नहीं होती।

3-धीरे-धीरे सांस लंबी और गहरी लें जिससे फेफड़ों में भरपूर मात्रा में सांस भर सके और उन में गर्मी बनी रहे ।

4-व्यायाम या खेल जैसी गतिविधि से पहले इनहेलर को हमेशा अपने पास रखें और डॉक्टर के सलाह के अनुसार ही किसी भी प्रकार की समस्या होने पर इसे तुरंत लें। इन इनहेलर्स को स्पेसर्स के साथ लेने की सही तकनीक में महारत हासिल होना बहुत जरूरी है।

गलत तरीके से इस्तेमाल हानिकारक

बहुत से बच्चे अपनी दवाओं का उपयोग नहीं कर रहे हैं या गलत तरीके से अपने इनहेलर का उपयोग कर रहे हैं, जो इस रोग के नियंत्रण को बनाए रखने के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। केवल ओरल थेरेपी पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है इसलिए शुरुआत से ही सही प्रबंधन के साथ सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। इसलिए बच्चों में जागरूकता अत्यंत आवश्यक है, जिससे उनके इलाज में मदद मिल सकती है।

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