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हमारे शरीर में गट का काम केवल पाचन शक्ति से जुड़ा हुआ है, बल्कि यह आपके ब्रेन से भी गहराई से जुड़ा हुआ अंग है। रिसर्च और स्टडीज बताती हैं कि, आंत में मौजूद बैक्टेरिया (गट माइक्रोबायोटा) हमारे मूड, इमोशन्स और मेंटल हेल्थ को प्रभावित करते (Effects of हैं। इस कनेक्शन को "गट-ब्रेन ऐक्सिस" (Gut-brain-axis) कहा जाता है। गट और ब्रेन के बीच यह तालमेल नसों, हार्मोन्स और इम्यून सिस्टम के जरिए काम करता है। इसीलिए, जब आंत की हेल्थ खराब होती है, तो मस्तिष्क में तनाव और चिंता का स्तर बढ़ सकता है। जिससे डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डॉ. शरद मल्होत्रा ( Dr. Sharad Malhotra,Senior Consultant & Director-Gastroenterology, Aakash Healthcare.) के अनुसार, हेल्दी गट मेंटल हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। गट को हेल्दी रखने के लिए डाइट की भूमिका महत्वपूर्ण है और आपकी डाइट को हेल्दी और गट फ्रेंडली बनाते हैं प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक फूड्स।
ये अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो गट को स्वस्थ बनाते हैं। ये आंत में बैक्टीरिया का संतुलन (Balancing gut bacteria level) सुधारकर मूड को बेहतर बनाने और तनाव घटाने में मदद करते हैं।
दही, किमची, केफिर, अचार (pickles) और कुछ सप्लीमेंट्स की मदद से शरीर के लिए जरूरी मात्रा में प्रोबायोटिक्स पाए जा सकते हैं।
ये फाइबर रिच तत्व हैं, जो प्रोबायोटिक बैक्टीरिया के लिए भोजन की तरह काम करते हैं। ये अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने का भी काम करते हैं जिससे गट हेल्थ बेहतर और मजबूत बनती है।
केले, लहसुन (Garlic), प्याज (Onion), साबुत अनाज और शतावरी (Shatavari) में ये प्रीबायोटिक्स पाए जाते हैं।
कुछ स्टडीज में ऐसा पाया गया है कि आंत के माइक्रोबायोटा का असंतुलन स्ट्रेस और डिप्रेशन बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, गट में माइक्रोबैक्टेरिया के संतुलन से सेरोटोनिन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन्स’ का भी उत्पादन बढ़ता है। यह आपके मूड को बूस्ट करने का काम करते हैं।
एक्सपर्ट के अनुसार, " अगर आपका गट हेल्दी है तो .यह न केवल आपके डाइजेस्टिव हेल्थ बल्कि आपकी मेंटल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद होगा। आप सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर अपने गट को हेल्द बनाएं और स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का रिस्ककाफी हद तक कम कर सकते हैं।"
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
केले, लहसुन (Garlic), प्याज, साबुत अनाज और शतावरी (Shatavari) में ये प्रीबायोटिक्स पाए जाते हैं।
प्रोबायोटिक गट में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने का भी काम करते हैं जिससे गट हेल्थ बेहतर और मजबूत बनती है।