प्रीमैच्योर डिलीवरी के बाद मां और बच्चे का ध्यान कैसे रखें? डॉक्टर ने शेयर किए Tips
प्रीमैच्योर डिलीवरी के बाद मां और बच्चे का ध्यान कैसे रखें? डॉक्टर ने शेयर किए Tips
Pre Mature Delivery Care Guide: प्रीमैच्योर डिलीवरी के बाद मां और शिशु दोनों को सही देखभाल की जरूरत होती है। ताकि रिकवरी जल्दी हो सके और शिशु भी स्वस्थ बन सके।
Written By:
Ashu Kumar Das
| Published : February 12, 2026 12:38 PM IST
premature delivery ke baad maa or baby ki care tips: प्रीमैच्योर डिलीवरी यानी समय से पहले जन्म तब माना जाता है जब शिशु 37 सप्ताह से पहले पैदा हो जाए। ऐसे बच्चों को मेडिकल भाषा में “प्रीटरम बेबी” कहा जाता है। दिल्ली के एलांटिल हेल्थ केयर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता का कहना है कि भारत में हर साल बड़ी संख्या में बच्चे समय से पहले जन्म लेते हैं, और सही देखभाल न मिलने पर उनमें संक्रमण, सांस की समस्या, वजन कम होना, शारीरिक व मानसिक विकास में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
डॉ. मनन गुप्ता बताते हैं कि प्रीमैच्योर डिलीवरी के बाद सिर्फ शिशु ही नहीं बल्कि मां को भी ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। इसलिए यह जरूरी है कि परिवार को पता हो कि प्रीमैच्योर डिलीवरी के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
कमरे का तापमान है जरूरी- स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रीमैच्योर शिशु का ध्यान रखने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है तापमान। प्रीमैच्योर बच्चों के शरीर में फैट कम होता है, जिससे वे जल्दी ठंड पकड़ लेते हैं। इसलिए ऐसे बच्चों को ऐसे कमरे में रखना चाहिए जो सामान्य से 2 से 4 डिग्री तक ज्यादा गर्म हो। आसान भाषा में समझें तो प्रीमैच्योर बच्चे के कमरे का तापमान 24 -26 डिग्री के बीच होना चाहिए।
ब्रेस्टफीडिंग- यूं तो हर बच्चे के लिए मां का दूध यानी कि ब्रेस्ट मिल्क अमृत के सामन होता है। लेकिन प्रीमैच्योर बच्चों के लिए ये और भी ज्यादा जरूरी होता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट बताती है कि ब्रेस्ट मिल्क में एंटीबॉडी और पोषक तत्व होते हैं, जो शिशु को संक्रमण से बचाते हैं। जन्म के एक घंटे के भीतर एक बार ब्रेस्ट फीडिंग बच्चे को जरूर करवानी चाहिए।
संक्रमण से बचाव जरूरी- समय से पहले जन्म लेने के कारण प्रीमैच्योर बच्चों को इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है। ऐसे में उनमें मौसमी संक्रमण और वायरल इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा होता है। डॉ. मनन कहते हैं प्रीमैच्योर बच्चों के पेरेंट्स को उन्हें गोद में उठाने, फीड कराने से पहले हाथों को साबुन और पानी से अच्छे तरीके से धोना चाहिए। 1 से डेढ़ साल तक की उम्र तक प्रीमैच्योर बच्चों को भीड़भाड़ से बचाने की कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा घर में किसी सदस्य को खांसी और जुकाम की समस्या है, तो उन्हें भी प्रीमैच्योर बच्चे से दूर रहना चाहिए।
सांस की निगरानी- कई प्रीमैच्योर बच्चों को सांस लेने में समस्या हो सकती है। प्रीमैच्योर बच्चों के पेरेंट्स को तेज सांस लेना, छाती का अंदर धसना, होंठ या नाखून नीले पड़ने जैसी लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए। बच्चे को इस तरह की परेशानी होती है, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास इलाज के लिए ले जाना चाहिए।
प्रीमैच्योर डिलीवरी के बाद मां का ध्यान कैसे रखें?
शारीरिक रिकवरी- समय से पहले डिलीवरी के बाद मां का शरीर अधिक कमजोर हो सकता है। ऐसे में मां के लिए आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। डॉ. मनन गुप्ता कहते हैं कि प्रीमैच्योर डिलीवरी के बाद परिवार वालों को मां को अधिक आराम देना चाहिए। डॉक्टर ने मां को जिन दवाओं को जिस समय पर देने की सलाह दी है, उन्हें लेने पर फोकस करना चाहिए। यदि सी-सेक्शन हुआ है तो टांकों की सफाई और देखभाल जरूरी है।
शारीरिक नहीं मानसिक आराम भी है जरूरी- स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रीमैच्योर डिलीवरी कई बार मां के लिए इमोशनल रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। शिशु के स्वास्थ्य को लेकर मां के दिमाग में ज्यादा चिंता, डर, अपराधबोध जैसे ख्याल आ सकते हैं। ऐसे में मां डिप्रेशन में जा सकती है। ऐसे में परिवार का सहयोग बहुत जरूरी है। नई मां से परिवार वाले खुलकर बात करें। नई मां आपसे ज्यादा बात करने में इच्छुक नहीं है, तो काउंसलर से मिलने की कोशिश करें।
पौष्टिक आहार जरूर दें- भारत जैसे देश में आज भी नई मां को हरीरा, दलिया और खिचड़ी के भरोसे 45 दिन तक रखा जाता है। लेकिन प्रीमैच्योर डिलीवरी करने वाली महिलाओं के लिए दाल, पनीर, दूध, हरी सब्जियां, सूखे मेवे, मौसमी फल खाना ज्यादा जरूरी है। इस तरह के खाने में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, जिंक, कैल्शियम होता है। यह नई मां के शरीर की रिकवरी को तेज करती हैं।
फॉलो-अप विजिट जरूरी- प्रीमैच्योर डिलीवरी वाली मां और शिशु दोनों को नियमित डॉक्टर विजिट की जरूरत होती है। स्त्री रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रीमैच्योर डिलीवरी वाली मां को डिलीवरी के 4 सप्ताह बाद डॉक्टर से चेकअप जरूर करवाना चाहिए।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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