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Written By: Anshumala | Updated : August 31, 2020 7:33 PM IST
Image credits by: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन, लंबे समय से चल रहे थे बीमार, सेप्टिक शॉक के बाद हालत हो गई थी खराब।
Pranab Mukherjee death: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का दिल्ली में देहांत हो (Pranab Mukherjee death news) गया। प्रणब मुखर्जी का आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में पिछले 21 दिनों से इलाज चल रहा था। प्रणब मुखर्जी 84 साल के थे। वे देश के तेरहवें राष्ट्रपति थे। वे 10 अगस्त को इमरजेंसी सर्जरी के लिए हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उस दौरान उनका कोविड-19 का टेस्ट भी किया गया था, जो पॉजिटिव आया था। फिर मस्तिष्क में जमे खून के थक्के को हटाने के लिए उनकी ब्रेन सर्जरी की गई, उसके बाद से ही वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। उन्हें बाद में फेफड़ों में संक्रमण (Lung infection) हो गया, जिसके बाद से उनकी हालत और बिगड़ती चली गई और वो डीप कोमा में चले गए।
सोमवार सुबह उनकी तबीयत और अधिक बिगड़ गई। आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल ने उनके फेफड़ों में संक्रमण के कारण (Causes of Lung infection) सेप्टिक शॉक (Septic shock) होने की जानकारी दी थी। क्या होता है सेप्टिक शॉक, जिसके बाद प्रणब मुखर्जी की स्थिति इतनी खराब हो गई कि वे इस दुनिया से चल (Pranab Mukherjee death in hindi) बसे। जानते हैं, सेप्टिक शॉक के कारण और लक्षण...
सेप्टिक शॉक को सेप्सिस, सेप्टिकॉमी या प्वॉइजनिंग भी कहते हैं। सेप्टिक शॉक या सेप्सिस संक्रमण के कारण होता है। यह शरीर में गंभीर रूप से परिवर्तन का कारण बनता है। यह बहुत खतरनाक स्थिति है और संभावित रूप से जानलेवा भी साबित हो सकता है। सेप्सिस तब होता है, जब संक्रमण से लड़ने वाले केमिकल्स इंफ्लेमेटरी प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर करते हैं और वह ब्लडस्ट्रीम में रिलीज होते हैं।
1 सेप्सिस (sepsis) तब होता है जब संक्रमण रक्तप्रवाह (Bloodstream) तक पहुंचता है और शरीर में सूजन (Inflammation) का कारण बनता है।
2 गंभीर सेप्सिस (Severe sepsis) तब होता है, जब संक्रमण आपके अंगों जैसे हृदय, मस्तिष्क और किडनी के कार्य को प्रभावित करने लगे।
3 सेप्टिक शॉक (Septic shock) तब होता है, जब रक्तचाप काफी कम हो जाए। इससे रेस्पिरेटरी या हार्ट फेलियर, स्ट्रोक, अन्य अंगों का फेल होना यहां तक की मृत्यु का कारण भी बन सकता है।
यह माना जाता है कि सेप्सिस के परिणामस्वरूप होने वाली सूजन से छोटे रक्त के थक्के बनते हैं। यह ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को महत्वपूर्ण अंगों तक पहुंचने से रोकते हैं। सूजन (Inflammation) ज्यादातर बुजुर्गों या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) वाले लोगों में होती है। फिर भी, सेप्सिस और सेप्टिक शॉक किसी को भी हो सकता है।
101 डिग्री से भी अधिक बुखार होना।
हाइपोथर्मिया यानी शरीर का तापमान कम होना।
दिल की धड़कनों का तेज होना।
तेजी से सांस चलना या 1 मिनट में 20 से भी अधिक बार सांस लेना
गंभीर सेप्सिस होने पर अंगों जैसे किडनी, हार्ट, फेफड़े, मस्तिष्क आदि क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। गंभीर सेप्सिस के लक्षणों में शामिल हैं:
कम पेशाब करना
सिर चकराना
भ्रम, कंफ्यूजन की स्थिति
सांस लेने मे तकलीफ महसूस करना
बेचैनी महसूस करना
बैक्टीरियल, फंगल या वायरल संक्रमण के कारण सेप्सिस हो सकता है। ये सभी संक्रमण कहीं भी हो सकते हैं, फिर चाहे आप घर पर हों या हॉस्पिटल में अपना इलाज करा रहे हों। एब्डॉमिनल या डाइजेस्टिव सिस्टम में होने वाला इंफेक्शन, फेफड़े का संक्रमण जैसे निमोनिया (Pneumonia), यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, ब्लड इंफेक्शन, रिप्रोडक्टिव सिस्टम इंफेक्शन आदि के कारण सेप्टिक शॉक होने की संभावना बढ़ जाती है।
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की तबीयत और बिगड़ी, फेफड़ों के संक्रमण के कारण हुआ सेप्टिक शॉक
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