
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : December 28, 2024 6:48 PM IST
Air Pollution And Eye Health: आंखें शरीर के सबसे नाजुक और संवेदनशील अंगों में से एक है। आसपास के माहौल और वातावरण का भी आंखों की हेल्थ पर असर पड़ता है। ऐसे में जब प्रदूषण बढ़ता है और हवा की क्वालिटी में गिरावट आती है तो इससे आंखों की हेल्थ पर भी प्रभाव पड़ता है। शरीर के किसी भी अन्य अंग की तुलना में आंखे वायु प्रदूषण के प्रति अतिसंवेदनशील होता है। वहीं, कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोगों को प्रदूषण के कारण अलग-अलग तरह की समस्याएं होने की संभावना बढ़ सकती हैं। बता दें कि, हवा में घुले पीएम 2.5, NO2, SO2 जैसे सूक्ष्म कण आंखों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
कुछ समय पहले तक आईसाइंस में की गयीं अलग-अलग स्टडीज के अनुसार, औसत पीएम 2.5 कंसंट्रेशन में नेत्र रोग होने की संभावना 1 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। हर साल सर्दियों में उत्तर भारत में धुएं और कोहरे की मोटी परत देखी जाती है। इससे एयर क्वालिटी में भी खराब होती है और विजिबिलिटी भी घटती है। प्रदूषण के कारण जहां लोगों को ठीक-ठीक तरीके से देख पाने में समस्या आती है। वहीं, एयर पॉल्यूशन के चलते आंखों की कई बीमारियां भी बढ़ती हैं।
डॉ. पुनीत जौहरी ( मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बाल नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं स्ट्रैबिस्मोलॉजिस्ट, संकरा आई हॉस्पिटल, कानपुर) कहते हैं कि, वायु प्रदूषण की वजह से ड्राई आई सिंड्रोम (DES) के मामले बढ़ जाते हैं। उच्च प्रदूषण स्तर वाले शहरी क्षेत्रों में इसमें ज़बरदस्त वृद्धि देखी गई है, जिसके परिणामस्वरूप आंखें लाल पड़ जाती हैं और जलन होने लगती है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब आंखों को चिकना रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं बनते, जिससे आंखों में असुविधा, खुजली और जलन पैदा होती है। इसी तरह कंजंक्टिवाइटिस के केसेस भी प्रदूषण के चलते बढ़ जाते हैं। वहीं, प्रदूषण की वजह से कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों की आंखों में सूखापन बढ़ सकता है। प्रदूषण बढ़ने के साथ ही आंखों में अल्सर होने और गंभीर संक्रमण के रिस्क भी बढ़ जाते हैं।
सर्दियों के महीनों में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण, खासकर उत्तर भारत और नई दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में, आंखों के संबंध में कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। अगर कोई मरीज़ ड्राई आई (Dry eyes) से पीड़ित है, तो राहत पाने के लिए आई ड्रॉप का इस्तेमाल किया जा सकता है।
आंखों को गंदे हाथों से छूने से बचें क्योंकि ऐसा करने से हाथों की गंदगी आंखों तक पहुंच सकती है और आंखों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
यूवी ब्लॉकिंग सनग्लास (UV Blocking sunglasses) आंखों को प्रदूषण और धूप दोनों से बचाने में मदद कर सकता है। ऐसे वातावरण में जहां अत्यधिक प्रदूषण है वहां, रैप-अराउंड सनग्लासेस का उपयोग करना सुविधाजनक हो सकता है और यह लोगों को धूल तथा अन्य कणों से बचाने में मदद करता है। पर्यावरण में मौजूद इरिटेंट्सको दूर करने का एक अन्य तरीका हैएचईपीएफ़िल्टर वाले एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना एवं घर को साफ और नमीयुक्त बनाए रखना होगा।
वायु प्रदूषण के संपर्क में आने के कारण आंखों में होने वाली सूजन को कम करने के लिए आप गर्म पानी से सेंक भी कर सकते हैं। इससे दर्द और सूजन कम होती है।
इन सबके साथ दिन में 2-3 लीटर पानी जरूर पिएं। इससे हाइड्रेटेड रहने और शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद होती है। साथ ही आंखों में किसी भी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर को दिखाने में देर ना करें।