Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
Post covid complications in hindi : कोरोना संक्रमितों के लिए इस वायरस से ठीक होकर घर लौटना किसी चुनौती से कम नहीं लेकिन अब कोरोना से ठीक होने वाले लोगों को नई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जो और भी ज्यादा घातक है। एक्सपर्ट का कहना है कि निजी अस्पतालों में ऐसे रोगियों की संख्या में वृद्धि हो रही है, जो कोविड -19 से उबरने के बाद लंग्स फाइब्रोसिस और गंभीर रूप से निमोनिया का शिकार हो रहे हैं, साथ ही उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट के लिए अस्पताल में तत्काल भर्ती होने की नौबत आन पड़ी है।
रोहतक स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट मेडिकल साइंसेज में फेफड़े और श्वसन रोग विशेषज्ञ साथ ही कोविड -19 रोगियों की देखभाल के लिए राज्य नोडल अधिकारी डॉ. ध्रुव चौधरी का कहना है कि चूंकि कोविड -19 की दूसरी लहर की भयावहता अधिक है, इसलिए बड़े पैमाने पर ऐसे मामले हर जगह बढ़े हैं।
उन्होंने कहा कि ये स्थिति ज्यादातर उन रोगियों में देखी जा रही है, जिनका टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद इलाज के लिए आईसीयू में भर्ती कराया गया था। ऐसे रोगियों को ठीक होने में भी ज्यादा दिनों की आवश्यकता होती है। लेकिन बिस्तरों की कमी और अन्य रोगियों को दाखिल करने के कारण कई लोगों को पूर्ण रूप से ठीक हुए बिना ही अस्पताल छोड़ना पड़ता है और घर जाने के लिए कहा जाता है। यही कारण है कोरोना से ठीक होने वाले 10 से 15% रोगियों के फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखने की आवश्यकता आ जाती है।
जिला प्रशासन ने ऐसे मामलों का इलाज करने वाले अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन कोटा भी बढ़ा दिया है।
गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर यश गर्ग का कहना है कि कोरोना से ठीक होने के बाद देखभाल और उपचार बहुत ही जरूरी है और अब फेफड़ों व निमोनिया की शिकायत करने वाले लोगों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। इसलिए प्रशासन ऑक्सीजन का कोटा लगभग 30% बढ़ा दिया है, ताकि अस्पताल ऐसे रोगियों का इलाज पूरी तरह से कर सकें और आपातकालीन स्थिति के लिए अतिरिक्त ऑक्सीजन स्टोर कर सकें।
बता दें कि प्रशासन, जिले के कम से कम 82 अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहा है।
वहीं आरवी अस्पताल के निदेशक डॉ. विक्रम सिंह ने भी बताया कि कहा कि अस्पतालों पर गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भर्ती करने के मौजूदा बोझ के कारण कई लोगों को घरों में ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम पर रहने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने बताया कि अगर आवश्यक हो, तो उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है। सिंह ने ये भी कहा कि कम से कम 30-40% रोगियों में लंग्स फाइब्रोसिस जैसी समस्या हो रही है और उन्हें घरों में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने को कहा गया है।