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ब्रेन ट्यूमर डे 2018: क्या मोबाइल फोन बगल में रखकर सोने से ब्रेन ट्यूमर और कैंसर हो सकता है?

क्या आपने भी सुन रखी हैं ब्रेन ट्यूमर से जुड़ी ये बातें ?

टेक्नोलॉजी की दुनिया में आज हर चीज़ के बारे में जानना इतना आसान है कि आपको बस कम्प्यूटर ऑन करके एक क्लिक और टच करने भर की देर है। इंटरनेट पर दुनियाभर की जानकारियां उपलब्ध हैं। इसी तरह कैंसर के बारे में जानकारियां उपलब्ध हैं, लेकिन सवाल यह है कि यह जानकारी कितनी प्रामाणिक है। यही कारण है कि, कई कैंसर के कारणों, ख़तरों, लक्षण और ब्रेन ट्यूमर (brain tumour) के उपचार से जुड़े विभिन्न मिथक प्रचलित हैं। आपको ब्रेन ट्यूमर से जुड़े प्रमुख तथ्यों के बारे में जानकारी देने के लिए, डॉ. सुनील फर्टाडो, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोसर्जरी (साइटकेयर हॉस्पिटल) ने ब्रेन कैंसर के बारे में कुछ सामान्य मिथक और उनके पीछे की सच्चाई!

मिथक 1: डॉक्टरों का अनुमान है कि मेरे दिमाग में एक ट्यूमर है। इसका मतलब है कि मुझे ब्रेन कैंसर है।

सच : ब्रेन ट्यूमर का हर मामला कैंसर नहीं होता। कुछ ट्यूमर सौम्य होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे अन्य अंगों तक फैल नहीं सकते हैं या आसपास के कोशिकाओं या ऊतकों को नुकसान नहीं पहुंचाते। जबकि अन्य ट्यूमर की वजह से कैंसर हो सकता है।

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मिथक 2: हाई रेडिएशन वाले वातावरण में काम करने वाले लोगों को ब्रेन कैंसर हो सकता है।

सच:  प्रति 100,000 लोगों में से 2-3 लोगों को ब्रेन कैंसर होता जाता है, जो कि इसे भारत में सामान्य कैंसर के प्रकार में शामिल नहीं होने देता। रेडिएशन और मस्तिष्क के कैंसर के बारे में कोई शोध या सबूत नहीं है, लेकिन विकिरण के लंबे एक्सपोजर का पूरे स्वास्थ्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है और इसलिए, इसका हल्के ढंग से इलाज नहीं किया जाना चाहिए।

मिथक 3: सभी ब्रेन ट्यूमर एक जैसे होते हैं।

सच: जी नहीं, सभी ब्रेन ट्यूमर समान नहीं होते। अभी तक कुल 120 प्रकार के ब्रेन ट्यूमर्स का पता चला है। यही नहीं, ब्रेन ट्यूमर का अंतर उनके आकार, उनके स्थान, उनकी शुरुआत और गम्भीरता के आधार पर होता है।

मिथक 4: सभी ब्रेन ट्यूमर दिमाग की कोशिकाओं के असामान्य कार्य के कारण होता है।

सच:  ट्यूमर 2 प्रकार के होते हैं- एक जो दिमाग में उत्पन्न और विकसित होते हैं, जिन्हें प्रायमरी ट्यूमर कहा जाता है, और दूसरे जिन्हें मेटास्टैटिक ट्यूमर(metastatic tumours) भी कहा जाता है, शरीर के कुछ हिस्सों जैसे फेफड़े, स्तन, गुर्दा, पेट और आंत को प्रभावित करते हैं और धीरे-धीरे मस्तिष्क में फैल जाते हैं। सेकेंडरी ट्यूमर के मामले प्रायमरी ट्यूमर से ज़्यादा दिखाई पड़ते हैं। ज्यादातर ट्यूमर तंत्रिका कोशिकाओं से उत्पन्न नहीं होते हैं, लेकिन कोशिकाओं से उनका समर्थन करते हैं।

मिथक 5: ब्रेन ट्यूमर के सभी मरीज़ों को एक जैसी समस्याएं और लक्षण दिखाई पड़ते हैं।

सच: ब्रेन ट्यूमर के लक्षण बीमारी की गम्भीरता के स्तर पर आधारित होते हैं। ज़्यादा गम्भीर मामलों में ब्रेन कैंसर के संकेत जल्दी दिखायी देते हैं दिमाग की कार्य प्रणाली को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करते हैं।

मिथक 6:बार-बार सिरदर्द होना और धुंधली नज़र ब्रेन कैंसर का संकेत हैं।

सच: जहां बार-बार होनेवाला सिरदर्द निश्चित रूप से ब्रेन कैंसर के लक्षणों में से एक है, वहीं केवल डॉक्टरी जांच की मदद से ही किसी भी न्यूरोलॉजिकल स्थिति की पुष्टि की जा सकती है। डॉक्टर एक सीटी स्कैन (CT scan) को सलाह दे सकते हैं जिसके बाद विभिन्न प्रकार के एमआरआई (MRI) स्कैन को इसका पता लगाया जा सकता है।

मिथक 7: कम उम्र के लोगों को ब्रेन ट्यूमर नहीं होता।

सच: ब्रेन ट्यूमर या कैंसर के जोखिम को निर्धारित करनेवाले कारकों में उम्र शामिल नहीं है क्योंकि ट्यूमर होने के मामले नवजात शिशुओं में भी देखे गए हैं। हालांकि, बच्चों और वयस्कों में अलग-अलग प्रकार के ट्यूमर होते हैं, जिनकी शुरुआत मस्तिष्क की विभिन्न कोशिकाओं और हिस्सों से में हो सकती है, इसलिए पैथोलॉजी और वास्तव में यह अलग-अलग दिख सकते हैं।

मिथक 8: सभी ब्रेन ट्यूमर समान होते हैं और इनके इलाज के लिए ब्रेन सर्जरी करानी पड़ती है।

सच : ब्रेन कैंसर के लिए कई उपचार प्रक्रियाएं हैं जो कैंसर के प्रकार/ गम्भीरता, मरीज़ की उम्र और सामान्य स्वास्थ्य के आधार पर निर्धारित होती हैं। ग्रेड I और ग्रेड II के ट्यूमर के लिए सर्जरी और नियमित एमआरआई कराना काफी हो सकता है। ग्रेड III और IV के मामलों में, घातक ट्यूमर के लिए विकिरण चिकित्सा या रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी की जा सकती है।

मिथक 9: क्या मोबाइल फोन बगल में रखकर सोने से ब्रेन  ट्यूमर और कैंसर हो सकता है।

सच : सेलफोन से रेडियो-फ्रीकवेंसी ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जो हमारे ऊतकों या टिश्यूज़ द्वारा अवशोषित होता है लेकिन यह हमारे डीएनए को नुकसान नहीं पहुंचाता। उनका एकमात्र प्रभाव शरीर के तापमान में मामूली वृद्धि के रुप में देखा जा सकता है। अब तक, मोबाइल फोन के इस्तेमाल से ब्रेन ट्यूमर होने की कोई भी बात सांख्यिकीय रूप से साबित नहीं की गयी है। मस्तिष्क के कैंसर के लिए एकमात्र सिद्ध जोखिम कारक एक उत्परिवर्तन या म्यूटेशन (mutation) है, जो जन्म के समय या व्यक्ति के जीवनकाल में कभी भी विकसित हो सकता है।

मिथक 10: एक बार इलाज के बाद, ब्रेन ट्यूमर दोबारा नहीं होता।

सच : कैंसर दोबारा हो सकता है, इसलिए कैंसर को दोबारा होने से रोकने के लिए ट्रीटमेंट के बाद का फॉलोअप बहुत महत्वपूर्ण है। इसके खतरों के बारे में जानकारी बटोरें, उपचार प्रक्रियाओं के दीर्घकालिक साइड इफेक्ट्स और सामान्य लक्षणों पर नज़र बनाए रखें।

Read this in English.

अनुवादक: Sadhana Tiwari

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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