छोटी-छोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स में दवा खाना हो सकता है खतरनाक, हो जाती है ये बीमारी फिर कोई दवा नहीं करती असर

Adik dava khane ke nuksan: बार-बार दवाइयां खाने से आपके स्वास्थ्य पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है। खासकर, बिना डॉक्टरी सलाह के खुद ही केमिस्ट की दुकान से दवाएं खरीदकर खाना आपकी हेल्थ के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 18, 2024 8:21 PM IST

Side effects of popping medicines in excess:  सर्दी-जुकाम जैसी छोटी-मोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स हों या वायरल बुखार, हर तरह की समस्या में इलाज के लिए हम किसी तरह की टैबलेट, कैप्सूल का सिरप का सेवन करते हैं। वहीं, सिर में दर्द, दांत में दर्द (Toothache) या किसी भी अन्य प्रकार के दर्द से राहत पाने के लिए भी लोग खुद ही किसी ना किसी कम्पनी का पेनकिलर (painkillers) खा लेते हैं। दवा खाने से जहां तेजी से दर्द और तकलीफ से आराम मिलता है वहीं, बेहतर महसूस करते ही लोग अपने काम पर लग जाते हैं। लेकिन, इस तरह बार-बार दवाइयां खाने से आपके स्वास्थ्य पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है। खासकर, बिना डॉक्टरी सलाह के खुद ही केमिस्ट की दुकान से दवाएं (consuming medicines without doctor's prescriptions) खरीदकर खाना आपकी हेल्थ के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

बार-बार दवा खाने से हो सकती है ये बीमारी (Taking medicines frequently can cause this health problem)

बीते कुछ वर्षों में लोगों ने वायरल बुखार और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं से आराम पाने के लिए घरेलू उपायोंया नेचुरल दवाओं की बजाय एंटीबायोटिक्स दवाएं, पेनकिलर्स और ओवर द काउंटर आसानी से मिल जाने वाली दवाइयां खाना अधिक कर दिया है। ये दवाएं तेजी से आराम दिलाती हैं इसीलिए, लोग इनका सेवन कई बार करते हैं और कुछ को इन दवाओं की लत भी लग जाती है। बार-बार दवाएं खाने से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ (Risk of antibiotic resistance) जाता है।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस क्या है?  (What is Antibiotic Resistance?)

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपके शरीर में बैक्टेरिया पर एंटीबायोटिक दवाएं (antibiotic medicines) भी बेअसर हो जाती हैं। इसका मतलब है कि आप किसी समस्या से आराम पाने के लिए जो भी दवा खाएंगे उससे आपको आराम नहीं मिलेगा।

एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि भविष्य में ऐसा भी हो सकता है कि एंटीबायोटिक्स की मदद से किसी भी बीमारी का इलाज मुश्किल हो जाएगा क्योंकि, धीरे-धीरे सभी लोगों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति बन जाएगी।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ने के कारण

बार-बार दवाइयां खाने से धीरे-धीरे शरीर में उस दवा के कण जमा होने लगते हैं। शरीर में मौजूद बैक्टेरिया धीरे-धीरे खुद को इन दवाओं का आदि बना लेते हैं और धीरे-धीरे दवा के खिलाफ उनकी प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ जाती है। नतीजतन दवाएं बेअसर होने लगती हैं और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति बन जाती है। इस स्थिति के कारण बैक्टेरिया शरीर को अंदर से बहुत अधिक नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

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