प्रदूषण बना रहा है मौसमी एलर्जी को बद से बदतर, डॉक्टर से जानें कैसे करें अपनी सुरक्षा

Pollution Mai Khud Ki Care Kaise Kare: हममें से कई लोगों को बदलते मौसम में एलर्जी होती होगी, लेकिन पॉल्यूशन उन्हें और भी ज्यादा बढ़ाने का काम कर रहा है। कैसे? आइए बताते हैं और डॉक्टर से जानते हैं कि अपनी सुरक्षा कैसे करें।

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Written By: Vidya Sharma | Published : November 24, 2025 9:07 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Manav Manchanda

Pollution Allergies Se Khud Ko Kaise Bachaye: दिल्ली-एनसीआर और देश के कई बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण अब सिर्फ सांस की तकलीफ या आंखों में जलन की समस्या तक ही सीमित नहीं रहा है। यह मौसमी एलर्जी को कई गुना बढ़ाने वाला ‘एडजुवेंट’ बन चुका है। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में मौजूद प्रदूषक कण न सिर्फ एलर्जी के ट्रिगर को अधिक आक्रामक बनाते हैं, बल्कि शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को भी ओवरएक्टिव कर देते हैं, जिससे छींक, खांसी, खुजली और सांस फूलने जैसे लक्षण पहले से ज्यादा गंभीर हो जाते हैं।

शोध बताते हैं कि PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण पौधों के पराग कण (Pollen) के साथ मिलकर उन्हें और अधिक खतरनाक बना देते हैं। ये कण पराग कण की सतह को तोड़कर ऐसे छोटे-छोटे हिस्से बना देते हैं, जो फेफड़ों और रक्त प्रवाह तक आसानी से पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि जिन लोगों को हल्की एलर्जी होती थी, उन्हें अब अचानक गंभीर रिएक्शन या अस्थमा जैसे लक्षण दिखने लगे हैं। आइए एशियन हॉस्पिटल के रेस्पीरेटरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर और हेड डॉक्टर मानव मनचंदाना से जानते हैं कि हम अपनी पॉल्यूशन वाली एलर्जी से अपनी सुरक्षा कैसे कर सकते हैं।

डॉक्टरों की चेतावनी

डॉक्टर बताते हैं कि 'प्रदूषण एक एलर्जी बूस्टर की तरह काम करता है। हवा में मौजूद टॉक्सिक गैसें और पार्टिकुलेट मैटर इम्यून सिस्टम को ओवर स्टिम्युलेट कर देते हैं। इस वजह से वही परागकण 5–10 गुना ज्यादा रिएक्शन पैदा करते हैं जो सामान्य दिनों में उतनी समस्या नहीं करते।'

सिर्फ इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों का मानना है कि डीजल एग्जॉस्ट पार्टिकल्स (DEP) एलर्जेन को 'स्टिकी' बना देते हैं, जिससे वे नाक, आंख और फेफड़ों में अधिक देर तक चिपके रहते हैं। डॉक्टर आगे कहते हैं कि 'प्रदूषण एलर्जेन के साथ मिलकर एक तरह का इंफ्लेमेटरी कॉकटेल बना देता है। इससे मरीजों में सीने में कसाव, सांस फूलना और लगातार खांसी जैसे लक्षण ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।'

बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे अधिक असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे, बुजुर्ग और पहले से दमा-एलर्जी वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। बच्चों की सांस नलियां पतली होने के कारणप्रदूषण जल्द असर करता है, जबकि बुजुर्गों में इम्यून सिस्टम कमजोर होने से एलर्जी गंभीर रूप ले सकती है।

लक्षण जिन्हें हल्के में न लें

  • लगातार छींक आना
  • आंखों में पानी और खुजली
  • नाक बंद या पानी बहना
  • सीने में जकड़न
  • सांस लेने में कठिनाई
  • रात में खांसी बढ़ जाना

डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण के दौरान एलर्जी और अस्थमादोनों तेजी से बिगड़ सकते हैं, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही जांच और उपचार जरूरी है।

कैसे करें बचाव?

विशेषज्ञ इन उपायों की सलाह देते हैं- 

  • बाहर निकलते समय N95 मास्क का उपयोग
  • घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल
  • सुबह-शाम खुले में व्यायाम से बचें
  • खिड़कियां कम खोलें, खासकर प्रदूषण चरम पर हो
  • स्टीम लें और नाक की सफाई (नेति/सेलाइन स्प्रे) करें
  • एलर्जी की दवा डॉक्टर की सलाह से समय पर लें

अंत में डॉ. कहते हैं, ‘प्रदूषण और परागकण, दोनों का कॉम्बिनेशन खतरनाक है। आने वाले वर्षों में एलर्जी मरीजों की संख्या बढ़ेगी। ऐसे में जागरूकता, समय पर इलाज और प्रदूषण नियंत्रण तीनों बेहद जरूरी हैं।’

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

मौसमी एलर्जी को कैसे रोकें?

मौसमी एलर्जी को रोकने के लिए घर के अंदर रहें और खिड़कियां बंद रखें, और घर के अंदर की हवा को साफ रखने के लिए HEPA फिल्टर वाले एयर कंडीशनिंग और वैक्यूम क्लीनर का उपयोग करें।

मुझे प्रदूषण से एलर्जी क्यों है?

एलर्जी तब होती है जब आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से आपके वातावरण में मौजूद कुछ पदार्थों के प्रति रक्षात्मक प्रतिक्रिया शुरू कर देती है।

क्या धूम्रपान किए बिना भी लंग कैंसर हो सकता है?

हां, धूम्रपान किए बिना भी लंग कैंसर होना संभव है। पैसिव स्मोकिंग, वायु प्रदूषण, रेडॉन गैस, फैमिली हिस्ट्री या कार्यस्थल पर जहरीले पदार्थों का संपर्क भी फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है।

फेफड़े खराब क्यों होते हैं

फेफड़े खराब होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे धूम्रपान करना, बाहरी वायु प्रदूषण, लंबे समय से किसी केमिकल या गैस के संपर्क में रहना आदि।