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दिल्ली और एनसीआर समेत कई राज्यों में प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जैसे ही हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, लोग बीमार होने शुरू हो जाते हैं। प्रदूषित हवा बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करता है। प्रदूषण में रहने से फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है, लेकिन क्या आपको पता है यह पाचन-तंत्र और हृदय स्वास्थ्य को भी बुरी तरह से प्रभावित करता है। प्रदूषित हवा में रहने से गंभीर और क्रॉनिक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
प्रदूषण का सीधा असर फेफड़ों पर भी पड़ता है। प्रदूषण के कण और जहरीली गैस सांस के जरिए फेफड़ों की कार्यक्षमता को कमजोर कर देते हैं। एशियन हॉस्पिटल के डायरेक्टर एंड हेड-रेस्पिरेटरी के डॉ. मानव मनचंदाबताते हैं कि प्रदूषण के संपर्क में आने से अस्थमा, ब्रोन्काइटिस, सीओपीडी और फेफड़ों के संक्रमण का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। वैसे तो प्रदूषण की वजह से किसी भी व्यक्ति को फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। लेकिन, बच्चों और बुजुर्गों में ये समस्या ज्यादा देखने को मिलती हैं। बुजुर्गों को सांस लेने, खांसी और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती है। प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहने से फेफड़ों के कैंसर का जोखिमभी बढ़ जाता है।
प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को नहीं, पाचन-तंत्र को भी प्रभावित करता है। इससे पाचन-तंत्र पर गहरा असर पड़ता है। आकाश हेल्थकेयर सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि प्रदूषण वातावरण से पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। प्रदूषण का लिवर और आंतों पर गहरा असर पड़ता है। इससे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम का जोखिम भी ज्यादा रहता है। जब प्रदूषण के कण शरीर में प्रवेश करते हैं, तो टॉक्सिंस के रूप में जमा हो जाते हैं। इससे फैटी लिवर और मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
प्रदूषण से हार्ट हेल्थ पर भी असर पड़ता है। प्रदूषित हवा और इसके कण हृदय को नुकसान पहुंचा सकते हैं। प्रदूषण के महीन कण हृदय के लिए बेहद हानिकारक होते हैं। ये कण शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ाते हैं। ये कण रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देते हैं और ब्लड प्रेशर को बढ़ाते हैं। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इससे हृदय पर लगातार दबाव बढ़ता है और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
प्रदूषण से मस्तिष्क और तंत्रिका-तंत्र को भी नुकसान पहुंचता है। प्रदूषित हवा में रहने से डिमेंशिया, अल्जाइमर और डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। प्रदूषित हवा में रहने से याद्दाश्त और सोचने-समझने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।