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Treatment of Pneumonia: निमोनिया के कारणों को जानकर जल्दी उपचार से बच सकती है मरीज की जान

वैश्विक स्तर पर प्रत्येक वर्ष निमोनिया से 2.5 मिलियन वयस्कों और बच्चों की मौत हो जाती है। अकेले भारत में वैश्विक निमोनिया बोझ का 23 प्रतिशत है। 2018 में देश भर में 9,28,485 लोग निमोनिया से प्रभावित थे। 16.9% पर यह भारत में नवजात शिशुओं की मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।

Written By Anshumala
Published : November 16, 2021 5:26 PM IST

निमोनिया की पहचानकर जल्द उपचार बेहद है जरूरी

निमोनिया (Pneumonia) सांस संबंधी एक गंभीर संक्रमण है। वैश्विक स्तर पर प्रत्येक वर्ष निमोनिया से 2.5 मिलियन वयस्कों और बच्चों की मौत हो जाती है। अकेले भारत में वैश्विक निमोनिया बोझ का 23 प्रतिशत है। 2018 में देश भर में 9,28,485 लोग निमोनिया से प्रभावित थे। 16.9% पर यह भारत में नवजात शिशुओं की मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। वायरस, बैक्टीरिया या फंगस से होने वाला निमोनिया एक या दोनों लंग्स (फेफड़ों) को प्रभावित करता है। निमोनिया होने पर सांस लेना में परेशानी होने लगती है, क्योंकि ऑक्सीजन सीमित मात्रा में ही अंदर जा पाती है। बैक्टीरियल निमोनिया का सबसे आम कारण है, स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिये (Streptococcus Pneumoniae)।

निमोनिया की पहचानकर जल्द उपचार बेहद है जरूरी

पहचान और उपचार योग्य स्थिति होने के बावजूद निमोनिया का पता चलने में अक्सर देर हो जाती है। इससे बीमारी बढ़ जाती है और मरीज की मौत तक हो जाती है। हालांकि, इसे रोका जा सकता है।निमोनिया और सांस की नली में अन्य संक्रमण की पहचान के लिए स्पुटम कल्चर में 24 से 48 घंटे लग सकते हैं। देखभाल की जगह पर किए जाने वाले परीक्षण जैसे यूरिनरी रैपिड एंटीजेन टेस्ट से प्रयोगशाला परीक्षणों के जरिए सही बीमारी का पता लगाने से इंतजार के समय की बाधा से निपटा जा सकता है। चिकित्सकों के पास रैपिड टेस्ट एक शक्तिशाली टूल है। इससे जांच जल्दी हो सकती है और पैथोजेन का कारण अक्सर 15 मिनट में ही मालूम हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप क्लिनिकल सेटिंग में देखभाल मुहैया कराने वाले आसानी से उपयुक्त लक्षित और थेराप्यूटिक रुख अपना सकते हैं। इससे मरीज जल्दी ठीक होता है। अस्पताल में रहने का समय कम होता है और मौत की आशंका कम हो जाती है। ऐसे डायग्‍नोस्टिक समाधान ज्यादा संक्रमण की मौजूदगी वाली आबादी में खासतौर से उपयुक्त हो सकते हैं।

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इंडियन चेस्ट सोसाइटी के सचिव और पल्‍मोनोलॉजिस्ट डॉ. राजेश स्वर्णकार ने कहा, “निमोनिया के कारणभारतीय आबादी पर अच्छा-खासा बोझ पड़ता है, इसलिए इंडियन चेस्ट सोसाइटी और नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियंस (आईसीएस-एनसीसीपी) द्वारा स्थापित, भारत विशेष निमोनिया गाइडलाइन्स का पालन करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि बीमारी का पता चल जाने पर उसके प्रबंध और उपचार के लिए मार्गदर्शन मिल जाएगा, जो मरीज की स्थिति के अनुकूल होगा और उसे ठीक कर सकेगा।”

निमोनिया का उपचार (Treatment of Pneumonia)

निमोनिया के उपचार के लिए इंडियन चेस्ट सोसाइटी-नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन के स्थापित मार्गदर्शन (2012) में स्पष्ट रूप से निमोनिया का पता लगाने से संबंधित आवश्यकताओं और मौजूदा समस्याओं को रेखांकित किया गया है। मरीज की बेहतर देखभाल के लिए इन्हें व्यवस्थित करने की आवश्यकता है। यही नहीं, दिशा-निर्देशों को अपडेट किया जाना चाहिए, जो समय और सही रोग निदान को सपोर्ट करे। इससे बेहतर स्वास्थ्य परिणाम के लिए दवाइयों का जिम्मेदार उपयोग भी सुनिश्चित होगा।

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