
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : June 24, 2022 5:17 PM IST
बवासीर (Piles) या पाइल्स (Haemorrhoids) एक लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है। यदि किसी व्यक्ति का खानपान सही नहीं है, एक्सरसाइज या शारीरिक गतिविधि का अभाव है और जीवन में तनाव का स्तर ज्यादा है तो उस व्यक्ति को बवासीर होने की संभावना ज्यादा रहती है। हालांकि यह रोग जेनेटिक भी होता है। इस रोग में गुदा के आसपास सूजन आना, दर्द होना और मल त्यागने में दर्द व खून आना जैसे लक्षण दिखते हैं। बवासीर दो प्रकार की होती है। अंदरूनी पाइल्स (Internal Piles) और बाहरी बवासीर (External Piles). अंदरूनी पाइल्स ज्यादा खतरनाक नहीं होती है। इसमें मरीज को कभी-कभी ब्लीडिंग हो सकती है लेकिन दर्द बहुत कम होता है। जबकि बाहरी बवासीर में दर्द और खुजली के साथ मल निकलता है। इस दौरान एनस में दरार पड़ना और खून भी निकल सकता है।
-मल त्यागते वक्त एनस में दर्द और जलन होना
-गुदा के आसपास लाल होना या सूजन होना
-स्टूल पास करने के दौरान ब्लीडिंग होना
-बार बार चक्कर आना
-गुदा के पास एक संवेदनशील या दर्दनाक गांठ का बनना
बवासीर को कम करने के लिए कब्ज को कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। कब्ज़ की परेशानी को दूर करने के लिए फाइबर रीच फूड खाने की ज़रूरत होती है। स्टडी के अनुसार जो लोग बवासीर से परेशान रहते हैं उन्हें अपनी रोज की डायट में कम से कम 30-35 ग्राम फाइबर ज़रूर लेना चाहिए। बीन्स, फ़्रूट, वेजटबल और होल ग्रेन फाइबर के उच्च स्त्रोत हैं। इसके साथ ही बवासीर के मरीज़ को अपनी डायट में सूखा अंजीर, आलूबुखारा, ब्लैकबेरी, रस्पबेरी, नाशपाती, किडनी और पिन्टो बीन्स, लेन्टीन्स और ब्राउन राइस आदि को शामिल करना चाहिए ताकि बॉवेल मूवमेंट बेटर हो सके। ये सारे फूड्स मल को नरम करने में मदद करते हैं। अध्ययन के अनुसार ईसबगुल से भी नेचुरल तरीके से कब्ज़ को रोका जा सकता है।
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