पिगमेंटेशन डिसऑर्डर से न हों परेशान, संभव है उपचार

नई तकनीक के जरिए कम किया जा सकता है इस बीमारी के प्रभाव को।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : August 22, 2018 6:58 PM IST

मैलेनिन एक पिगमेंट है जिसे त्वचा सेल्स द्वारा उत्पन्न किया जाता है और जो किसी व्यक्ति की नेचुरल त्वचा टोन के लिये जिम्मेदार होता है। जब किसी बीमारी या चोट आदि के कारण त्वचा सेल्स डैमेज या अस्वस्थ हो जाती हैं तो मैलेनिन का उत्पादन प्रभावित होता है।

क्‍या है पिगमेंटेशन डिसऑर्डर

पिगमेंटेशन डिसऑर्डर में या मैलेनिन के अति उत्पादन (हाइपर पिगमेंटेशन) से त्वचा का रंग नार्मल त्वचा टोन से ज़्यादा गाढ़ा हो जाता है या मैलेनिन का उत्पादन कम हो जाने (हाइपो पिगमेंटेशन) के कारण त्वचा का रंग हल्का पड जाता है। जहां कुछ पिगमेंटेशन डिसऑडर्स त्वचा की सतह पर पैचेज के रूप में नजर आते हैं वहीं दूसरे पूरे शरीर पर असर दिखा सकते हैं।

पिगमेंटेशन के लक्षण

त्वचा पिगमेंटेशन डिसऑडर्स के विभिन्न प्रकारों के कारण लक्षण भिन्न हो सकते हैं। रंजकहीनता (अल्बिनिज्म) को किसी व्यक्ति की आंखों, त्वचा और बालों के रंग की सावधानी से जांच करके पता किया जा सकता है।

अल्बिनिज्म क्‍योंकि  मैलेनिन की पूरी तरह नामौजूदगी से होता है और यह जेनेटिक समस्या है इसलिये त्वचा और बालों का एक समान हल्का रंग पूरे शरीर पर दिखता है। जब त्वचा के रंग में कोई बदलाव पैचेज के रूप में हो तो वह एक महत्त्वपूर्ण लक्षण हो सकता है।

पिगमेंटेशन के कारण

धूप में ज्‍यादा देर तक रहने से यानी सन एक्सपोजर के कारण।

औषधि प्रतिक्रिया होने की वजह से भी पिगमेंटेशन की समस्‍या हो सकती है।

यह एक जेनेटिक बीमारी है, जो पारिवारिक भी हो सकती है।

यह व्‍यक्ति की प्रतिरोधी क्षमता के कारण भी हो सकती है।

शरीर में जब हार्मोनल बदलाव होते हैं तब यह समस्‍या हो सकती है।

यदि कहीं चोट लगती है तो उसके कारण भी यह हो सकता है।

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 जोखिम के कारण

त्वचा पिगमेंटेशन की आनुवंशिक प्रवृत्ति (जेनेटिक टेन्डेन्सी) या ऐसा पारिवारिक इतिहास भी इसका जोखिम बढ़ाता है। अब तक इस मामले में ज्ञात प्रमुख जोखिम कारणों में जेनेटिक यानी आनवांशिक प्रवृत्ति को प्रमुख माना गया है। यदि आपके परिवार में पहले से किसी को यह समस्‍या है तो यह आपको भी हो सकती है।

संंभव है उपचार

त्वचा पिगमेंटेशन डिसऑडर्स का निदान करने के लिये किसी व्यक्ति के विजुअल एग्जामिनेशन के अलावा कई बार वुड्स लैम्प या ब्लैक लाइट टेस्ट (डर्मेटोलॉजिकल डायग्नोस्टिक टूल) का उपयोग किया जा सकता है ताकि पिगमेंटेशन से कुछ विशेष त्वचा कंडीशन्स का डायग्नोज किया जा सके।

त्वचा कैंसर की जांच के लिये बायोप्सी की जाती है जिसमें प्रभावित त्वचा के एक छोटे टुकड़े का अध्ययन माइक्रोस्कोप से किया जाता है।

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त्वचा पिगमेंटेशन डिसऑडर्स से प्रभावित सभी लोगों को यह सलाह है कि वे धूप में ओवर एक्सपोजर से खुद को बचाने के लिये अच्छी तरह ढंकने वाले कपड़े पहनें, सनस्क्रीन का उपयोग करें और धूप तीखी होने के दौरान बाहर जाने से बचें।

त्वचा लाइटनिंग या त्वचा ब्लीचिंग एजेन्ट्स त्वचा का रंग हल्का करने में मदद कर सकते हैं (हाइपर पिगमेंटेशन डिसऑडर्स)

हाइड्रोक्विनोन या ट्रेटिनायन युक्त लगाने की क्रीमें और लगाने की स्टेरॉयड क्रीमें कुछ प्रकार के हाइपर पिगमेंटेशन का असर घटाने में सहायक हो सकती हैं।

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कैमिकल पील्स के जरिए भी इसका उपचार हो सकता है।

डर्माब्रेसन भी पिगमेंटेशन का इलाज है।

लेज़र सर्जरी तकनीक के द्वारा इसका उपचार हो सकता है।

पिगमेंटेशन से बचने के लिए जरूरी है कि धूप में ओवर एक्सपोजर से बचें विशेषकर जब धूप काफी तीखी हो तो बाहर निकलने से बचें। बाहर जाते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। यदि यह गंभीर समस्‍या हो तो चिकित्‍सक से संपर्क करें।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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