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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहना हर इंसान के लिए जरूरी हो गया है। फिटनेस सिर्फ पुरुषों के लिए नहीं बल्कि महिलाओं के लिए भी बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। पर अफसोस की बात तो ये है कि ज्यादातर लोग बॉडी फिटनेस का मतलब सिर्फ जिम वर्कआउट और डाइटिंग को मानते हैं। हालांकि असल मायने में ऐसा होता नहीं है। बॉडी को फिट रखने के लिए खानपान, एक्सरसाइज उतनी ही जरूरी है, जितनी शरीर की सही मूवमेंट, मसल्स और जोड़ों की मजबूती।
पुणे स्थित वेन्सर अस्पताल के स्पाइन सर्जन (ऑर्थो), ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. समीर पाटिल के अनुसार, शरीर की सही मूवमेंट, मसल्स और जोड़ों की मजबूती को मेडिकल भाषा में फिजियोथेरेपी कहा जाता है। हर उम्र के अनुसार, फिजियोथेरेपी की जरूरत बदल जाती है, इसलिए फिजियोथेरेपी के तरीके भी उम्र के अनुसार अलग होने चाहिए।
डॉ. समीर पाटिल के अनुसार, 20 से 30 साल की उम्र में इंसान के शरीर की ताकत और लचीलापन सबसे अधिक होता है। लेकिन इस उम्र में लोगों के ऊपर नौकरी और पढ़ाई का प्रेशर सबसे ज्यादा होता है। लंबे समय तक बैठकर काम करने या पढ़ाई करने से शरीर का पॉश्चर खराब हो जाता है। पॉश्चर को अगर समय रहते सही न किया जाए, तो बढ़ती उम्र में कई प्रकार की परेशानियां हो सकती हैं। यही कारण है कि डॉ. समीर पाटिल 20 से 30 साल की उम्र के लोगों को रोजाना कम से कम 30 मिनट तक एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग, योग और कोर मसल्स एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं।
इस उम्र में ज्यादातर लोगों में पीठ दर्द, गर्दन दर्द या कंधों की जकड़न जैसी समस्याएं शुरू होती हैं। इसका कारण लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठना और तनाव है। फिजियोथेरेपिस्ट के अनुसार 30 से 40 की उम्र के लोगों को बढ़ती उम्र में फिट रहने के लिए हल्की स्ट्रेचिंग करनी चाहिए। इसके साथ ही 30 से 40 साल की उम्र के लोगों को सप्ताह में कम से कम तीन दिन हल्की एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए। इससे शरीर एक्टिव रहता है और कमर व पैरों के दर्द की परेशानी भी दूर होती है।
40 से 50 साल की उम्र में मांसपेशियां और जोड़ों की लचक कम होने लगती है। इसलिए फिजियोथेरेपी का मुख्य फोकस जोड़ों को लचीला और एक्टिव रखना होता है। इसके लिए सुबह की वॉक, साइकिलिंग और हल्के योगासन बहुत फायदेमंद होते हैं। 40 की उम्र के बाद अगर घुटनों में दर्द की समस्या हो रही है, तो इस विषय पर फिजियोथेरेपिस्ट से बात करें और इलाज करवाएं।
इस उम्र में शरीर में संतुलन और ताकत बनाए रखना जरूरी होता है ताकि गिरने या चोट लगने का खतरा कम हो। फिजियोथेरेपी में बैलेंस और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने वाले व्यायाम जैसे ताई ची और ब्रीदिंग एक्सरसाइज बहुत उपयोगी हैं। अगर डायबिटीज या हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां हैं, तो फिजियोथेरेपिस्ट से अपनी स्थिति के अनुसार सुरक्षित एक्सरसाइज प्लान बनवाएं।